लेखक परिचय : मूलत: गोपालगंज जिला के निवासी संजीव सिंह जी नवका पीढी के एगो सशक्त रचनाकार बानी। फिलहाल गाजियाबाद में रह रहल संजीव जी के रचना में भोजपुरी भाषा आ संस्कृति के प्रति लगाव, आ ओकरा विकास खातिर प्रयास करे के जज्बा साफ दिखाई देला। पिछला हफ्ता बिहार में जवन घोटाला के लेके आरोप-प्रत्यारोप भइल, ओही पर संजीव जी आज के राजनीति के नब्ज टटोलत ई आलेख हमनी के सहयोगी वेबसाइट जय भोजपुरी डॉट कॉम पर लिखनी ह। - संपादक
Sahitya
कवि परिचय
: मूलत: देवरिया जिला (उत्तर प्रदेश) के निवासी अनूप श्रीवास्तव जी फिलहाल नई दिल्ली में बानी आ एगो बडहन मीडिया ग्रुप में कार्यरत...
लोटा जईसन चीज आज चुहानी से लापता हो गईल बा। कभी कभी लउक जाला। लोटा के महत्व कम ना होखे। आज उ लोटा के रूप परिवर्तन हो गईल बा आ एकर जगह म...
हरि ओम! हरि ओम!! भला अइसनो बात कइल जा सकेला कबों? जवना धरती पर सदियनि से नारी खाली भोग्या की रुप में रहलि बिया पुरुष के, ओह समाज में ओक...
एगो जमाना रहे जब साधु-सन्यासी लोग जंगल में रह के तपस्या करत रहे, आ लोगन के कवनो तकलीफ होत रहे त उनका लगे जात रहे, लेकिन आज-काल्ह के बाब...
हमार देस, हमार प्रांत आ हमार सहर बड़ा नीमन लागेला। हाले में जयराम रमेश जी, भारत सरकार के पर्यावरण मंत्री के एगो बात कहल दिल के छू गइल। क...
