लेखक परिचय : मूलत: गोपालगंज जिला के निवासी संजीव सिंह जी नवका पीढी के एगो सशक्त रचनाकार बानी। फिलहाल गाजियाबाद में रह रहल संजीव जी के रचना में भोजपुरी भाषा आ संस्कृति के प्रति लगाव, आ ओकरा विकास खातिर प्रयास करे के जज्बा साफ दिखाई देला। पिछला हफ्ता बिहार में जवन घोटाला के लेके आरोप-प्रत्यारोप भइल, ओही पर संजीव जी आज के राजनीति के नब्ज टटोलत ई आलेख हमनी के सहयोगी वेबसाइट जय भोजपुरी डॉट कॉम पर लिखनी ह। - संपादक
हरि ओम! हरि ओम!! भला अइसनो बात कइल जा सकेला कबों? जवना धरती पर सदियनि से नारी खाली भोग्या की रुप में रहलि बिया पुरुष के, ओह समाज में ओक...
एगो जमाना रहे जब साधु-सन्यासी लोग जंगल में रह के तपस्या करत रहे, आ लोगन के कवनो तकलीफ होत रहे त उनका लगे जात रहे, लेकिन आज-काल्ह के बाब...
