Home Sahitya Aalekh शांति दूत ओबामा, अशांति दूत गांधी !

शांति दूत ओबामा, अशांति दूत गांधी !

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अबकी के नोबेल शांति पुरस्कार के घोषणा, हमरा बुझाता कि दुनिया के आठवां आश्चर्य नियर लागल ह। विश्व शांति पुरस्कार आ उहो नव महीना के राष्ट्राध्यक्ष के, ओहू में अचरज ई कि जब एह पुरस्कार खातिर इनिका नाम के चयन भइल रहे, तवना घरी ओबामा साहेब के अपना कुर्सी पर बइठले जुम्मा- जुम्मा आठ ऊपर एक दिन भइल रहे। यानी कुल मिला के उनुका राष्ट्राध्यक्ष के पद के उमिर मात्र नव दिन रहे।


त होइये नू गइल ई दुनिया के आठवां अचरज के बराबर घटना साहब कि उमिर नव दिन आ कीमत 14 लाख डालर। अब पता ना एह नव दिन में कवन अइसन काम कइ दिहले रहले, जवना के चलते एकरा पांच गो जज लोगन का पैनल में तीनि गो, यानि आधा के जादा लोगन के मन इनिका खिलाफ रहला के बादो ई एह पुरस्कार के अधिकारी घोषित हो गइले। अपना कवना अनुभव के बल पर भाई? कारण अभी इनिकर उमिरियो त एतना नइखे पाकल जवना का चलते इनिके अनुभव सम्राट मानि लीहल जाउ।

अपना पहिले के शासक आ खास क के जार्ज डब्लू बुश साहेब के अभी उदाहरण लीहल जाय त उनुकरे पाप धोवे में त अभी सफल नइखन भइल ई जनाब। अऊर सफल भइला के बात त छोडि दीं, अभी तक अइसन कवनो पहलो नइखे भइल। इराक के हाल जस के तस बा। अफगानिस्तान में इनिकर सेना बडले बा, ओसामा आजु ले खोजाते बा, पाकिस्तान तक के अरबों- खरबों रुपया के मदद जारिये बा, आ जवना बारे में संउसे दुनिया जानत बा कि ई रकम उहां कवना मद में खर्च हो रहल बा। विश्व आतंकवाद के त बाते छोड दीं, अभी ले ना त अपना देश आ ना अपना पिठ्ठू पाकिस्तान से ऊ आजु ले आतंक खतम करवा पवले। आ ना ओह लोगन के शांति के पाठ पढा पवले, त फेर कवनो माने में ऊ कैनेडियो से बड आ सर्वप्रिय राष्ट्रनेता हो गइले कि दुनिया उनुका के विश्व शांति पुरस्कार के योग्य मानि लीहलसि?

असल में हमरा कबो कबो शंका होला कि एह पुरस्कार के नेंव त आखिर विस्फोटक के कमाई से राखल रहे, त कहीं एही से त ना नूं ई पुरस्कार अबकी के एह भूमिका पर दिआइल हा कि जे जेतना विस्फोटक खपावल ऊ एह पुरस्कार के अधिकारी भइल, कारण, आखिर एह फंड के रायल्टी त तबे नूं बढी जब एकर विस्फोटक ढेर से ढेर बिकाई। लेकिन एहू लिहाज से हमरा बुझाता जे एह पुरस्कार के असली हकदार या त जार्ज डब्लू बुश साहेब नजर आव तारे, चाहे ओसामा बिन लादेन। आखिर एह लोग से बेसी एह धरती पर बारुद के खपत के कइल भला? कम से कम ओबामा साहब त नाहिये।

फेर साहब अइसन में त – दे दी हमें आजादी बिना खडग, बिना ढाल – वाला गांधी जी त एकरा खातिर कबों उपयुक्त पात्र होइये ना सकत रहले। बारुद के एगो कण के बात त छोडिये दीं, बंदूक के एगो गोलियो जे अपना से त कबों नाहियें छोडले होइहें, नाहीं केहू का ओरि से एकरा के छोडे के पक्ष में रहले कबो। त अइसन आदमी एह पुरस्कार खातिर नकारा त साबित होइये नू जाई साहेब, जेकरा चलते बारुद के एगो पइसा के बिक्री ना भइल। त जे आदमी एकरा रायल्टी में एको पइसा के बृद्धि ना क पावल ओकरा के भला ई पुरस्कार कइसे दीहल जा सकेला भला, चाहे ऊ चारि बेरि नाहीं चउदह बेरि एकरा खातिर नामांकित काहे ना भइल होखे।

जे आदिमी, जाने कतने साल तक, अपना शांति के पाठ के चलते अपने देश भारत के अशांत बनाके रखले रहे ऊ त होइये नू जाई अशांति दूत। आ जवन देश अपना दादागिरी के बल पर संउसे दुनिया के आतंकित कइले रही, बारुद के बल पर शान्त रखले रही ऊ कइसे ना हो जाई शान्ति दूत? आखिर दुनिया जे बदलि रहलि बिया, त एकर परिभाषा काहे ना बदली –

कुछ तुम जो कर रहे हो, कुछ हम जो कर रहे हैं, तुम अपनी कर रहे हो, हम अपनी कर रहे हैं।
जो सोचता हूं आखिर क्या हो रहा है गालिब, दुनिया बदल रही है, हम भी बदल रहे हैं ।।

(लेखक प्रसिद्ध भोजपुरी पत्रिका 'भोजपुरी माटी' के संपादक आ भोजपुरिया डॉट कॉम के साहित्य विभाग के संपादक बानी)

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Comments (1)
Obama ko Shanti Purshkar
1 Monday, 02 November 2009 14:41
Suraj Singh Yadav
main aapke vichar se sahmat hun,obama katai is purashkar ke layak nahi the.na jaane unse darkar ya kisi aur karan se unko is purashakar ke liye chuna gaya.yeh purashkar kisi aur neta ko de dena vajib tha lekin obama ko nahi.
agar maine kuchh galat likha hai to krpya humko maaf kar denge.

Aapka
Suraj Babu