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पिंजरा के मोल

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कवि परिचय : अनिल ओझा नीरद जी प्रसिद्ध भोजपुरी पत्रिका 'भोजपुरी माटी' के संपादक आ भोजपुरिया डॉट कॉम के साहित्य विभाग के संपादक बानी। इहाँ का एगो ट्रांसपोर्ट कंपनी में नौकरी कइला का बावजुद भोजपुरी खातिर हमेशा समर्पित रहेनी। नीरद जी के कई गो किताब आ चुकल बाडी सन, आ एकरा अलावा इहाँ का भोजपुरी के कई गो संगठन जइसे विश्व भोजपुरी सम्मेलन, अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन, पश्चिम बंग भोजपुरी परिषद आदि से जुडल बानी।

 

 जबलंइ पंछी तबलंइ पिंजरा के बा मोल सजनी

ए सजनी जबलंइ पिंजरा में सोन चिरइया बाटइ
तबेले दुनियाँ में एकरा से नेह लगइया बाटइ
नाहीं त सोनवों के पिंजरा बा बेमोल सजनी
जबलंइ पंछी तबलंइ पिंजरा के बा मोल सजनी  

सुन सजनियां बिन पंछी ना पिंजरा कहीं रखाला
तबहूं एक दिन तूरि के नाता ई पंछी उडि जाला
जाने के दो कइसे देला पिंजरा खोल सजनी
जबलंइ पंछी तबलंइ पिंजरा के बा मोल सजनी

जबलंइ पंछी बाटइ पिंजरा नाचइ जइसे पुतरी
बाकिर नाच नचावत के बा केकरा हथवा सुतरी
केहू देखल नाहीं खुलि पावल ई पोल सजनी
जबलंइ पंछी तबलंइ पिंजरा के बा मोल सजनी

पंछी एकइ पिंजरा चाहें राजा रंक फकीर
एकइ हाथ के रचना सभकर अलग अलग तकदीर
रचलंइ रचना ओकर केतनी अनमोल सजनी
जबलंइ पंछी तबलंइ पिंजरा के बा मोल सजनी

पिंजरा संग पंछी बा जबलंइ घेरलंइ मोह आ माया
बाकिर जहिया उडिगा पंछी जरे चली रे काया
लोगवा चेत करावइ राम-नाम सत बोल सजनी
जबलंइ पंछी तबलंइ पिंजरा के बा मोल सजनी

अब का चेत कराके करब के चेती ए भाई
पिंजरा छोडि के उडल चिरइया लवटि के फेरना आई
नाहीं धन से केहू पाई एह का मोल सजनी
जबलंइ पंछी तबलंइ पिंजरा के बा मोल सजनी

(दूरदर्शन कलकत्ता से पहिला हिन्दी कवि सम्मेलन 23-2-1978 के प्रसारित)

 


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Comments (1)
विचार
1 Thursday, 26 November 2009 15:07
लाल बिहारी लाल
बहुत बढिया लागल कि समसासयिक विषय पर भी नीरद जी के विचार आ समाचार भोजपुरी में पढे के मिलल

लाल बिहारी लाल,बदरपुर,नई दिल्ली-44