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आखिर कार, जूनियर डाक्टरन के मानदेय बढल

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पटना। पिछला महीना मानदेय (स्टाइपेंड) बढ़ाये के मांग के लेके पटना मेडिकल कालेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) के जूनियर डाक्टर 9 नवंबर से बेमियादी हड़ताल शुरू क के पीड़ित जनता के सामने गंभीर समस्या खडा क देले रहले सन।

बाद में एह हडताल में दरभंगा मेडिकल कालेज अस्पताल के जूनियर डाक्टरन के शामिल भइला से मुसीबत आउर बढ़ गइल रहे। जवन लोग सम्पन्न रहे, ऊ लोग त अपना मरीजन के खर्चीला निजी नर्सिग होम में शिफ्ट कइल। लेकिन गरीबन का लगे ओहिजा एह हड़ताल के कहर झेलला के अलावा आउर कवनो उपाय ना रहे। जब कबो चिकित्सा सेवा में हड़ताल होला, त अस्पताल में भर्ती मरीजन के दुख-दर्द बढ़ जाला। सरकार हड़ताली लोगन के काम शुरु करे के चेतावनी देवेले, आ बातचीत से समाधान निकाले के दावा करेले। जबकि दोसरा ओर हड़ताली लोग कहेला कि अगर ओह लोगन के मांग शांतिपूर्ण तरीका से मान लिहल जाई, त ऊ लोग अइसन गलती ना करित। एह बीच में पिसेला खाली आम आदमी, जेकर एह में कवनो कसुर नइखे।

लगभग सवा सौ रोगियन के जान लेके जूनियर डाक्टरन के हड़ताल खत्म भइल रहे। लेकिन, काम पर आप वपस लवटत डाक्टर लोग सरकार से पंद्रह दिन में आपन माँग माने के चेतावनी देले रहे, ना त फेर दोबारा हड़ताल शुरु करे के धमकी भी देले रहे। एही धमकी के आगे झुक के राज्य सरकार आज जूनियर डाक्टरन के मासिक स्टाइपेंड मनमाफिक बढ़ा दिहलस। ई बढल राशि ओह लोगन के एक अप्रैल 2009 से मिली।

नया मानदेय के हिसाब से रेजिडेंसी स्कीम आ एमसीएच वालन के 25 हजार, देशी सहित अंग्रेजी इंटर्नशिप वालन के 7 हजार, जूनियरशिप खातिर 8 हजार आ सीनियरशिप खातिर 9 हजार रुपया के मासिक भुगतान के मंजूरी दिहल गइल। फीजियो थेरेपी आ एक्युपेशनल थेरेपी के छात्रन के 4500 रुपया मिली। मंगलवार के राज्य मंत्रिपरिषद भी एह प्रस्ताव के मंजूरी दे दिहलस। लेकिन सवाल ओहिजे बा, कि अगर सरकार के माने के ही रहे, त फेर ओतना लोगन के मरे के इंतजार काहें कइल गइल?
 
Comments (1)
जूनियर डोक्टर के मानदेय
1 Wednesday, 02 December 2009 14:19
R.P.Shahi
जब अधिकारी लोग आपन तनखाह बढ़ावत बा , मंत्री और संत्री सब लोगन के तनखाह अपने से बढ़ी जात बा , त डाक्टर और इंजिनियर और मेहनत करे वाला लोगन के मानदेय वोही के साथ काहे नईखे बढ़त .

छठवां वेतन आयोग के सिपारिश त बड़का सबे लोग ले लिहल त इतना छोट , छोट बात के , कहें हड़ताल के बाद में ही बढावल जाई . अपना लेबे समय त दुख तकलीफ ना भईल , त वोही समय और लोग के भी तनखाह या मानदेय काहे ना बाधा दिहलन लोग ?

न्यायधीश लोग के चाही एक लाख रूपया महिना , सांसद आ मंत्री के चाही पाच लाख महीना , IAS / IPS के भी लाखे रूपया माहिना चाही , घर , गाड़ी , सब खर्चा के बाद ....त डाक्टर के केतना होखे के चाही , इ समझ में ना आवेला ??? जब अपने बिना काम के इतना लूटत बा लोग त जे दिन रात मरीजन के बीच में रहत बा , ओकरे बारे में त आपन बढ़ावे के पहिले ही सोचे के चाहीं न , हड़ताल के बादे सुनत बा लोग त डाक्टर का करी लोग .
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