Home Samachar Bihar गया में लइकी देहली सन माई के अर्थी के कंधा

गया में लइकी देहली सन माई के अर्थी के कंधा

E-mail Print PDF
गया। बियफे (गुरुवार) के अतरी प्रखंड के माफा गांव के तीन बहिन मिल के अपना माई के अर्थी के कंधा दे के एगो पारंपरिक सोच पर चोट करे के साहस दिखवली सन। उनुकर माई मालती देवी के मौत ठंड लगला के कारण भइल रहे।

मालती के खाली तीन गो बेटी रहली सन। सबसे छोट बेटी (बियाह हो चुकल रहे) सुषमा एह दुख के बेला में माई के घरे ही रहे, जबकि बाकी दूनो ससुराल में रहली सन। 200 घर वाला एह गांव में मालती देवी के मौत के खबर सुन के लोग देखे त आइल, लेकिन दोपहार ले कंधा देवे खातिर केहू आगे ना आइल। सुषमा एह बात के खबर अपना दूनो बहित मंजू देवी आ चंचल देवी के देहली।

सांझ तक दूनो बहिन घरे आ के माई के अर्थी अपना हाथ से तैयार करे लगली सन। ई सब देखला के बावजुद परंपरा के जड़ता में बंधल गांव वालन के दिन ना पसीजल। लोग देखत रहल, लेकिन केहू अर्थी के हाथ लगाये के कोशिश ना कइल। अंत में तीनो बहिन अपना बाबुजी का संगे राम नाम सत्य के उच्चारण करत मालती के अर्थी उठवली सन, आ गांव से एक किलोमीटर दूर पैमार नदी पर अर्थी ले जा के अंतिम संस्कार क दिहल गइल। गांव के कुछ लोग उनुका पीछे-पीछे शमशानो तक पहुंचल। ओहिजा सभ बहिन मिल के अपना बाबुजी के ढाढस दिला के माई के चिता के मुखाग्नि दिलवली सन।

एह घटना के बाद बड़की बहिन मंजू देवी एहिजा एगो दैनिक अखबार से बातचीत करत कहली कि उनुका भाई ना रहला के वजह से गांव वाला लोग हमेशा उनुका माई- बाबुजी के हीन भावना से देखत रहे। हम सभ बहिन मिल के माई के अर्थी के कंधा दे के एह समाज के संदेश देवे के कोशिश कइले बानी जा कि आज के नारी ऊ हर काम क सकेले, जवन कि एगो पुरुष क सकेला। माई के शोक का संगे- संगे लोगन के रूढ़ीवादी नजरिया से आहत मंजू ओकर विरोध करत कहली कि अगर बाबुजी ना रहते, त हमनी का इहो दिखा देती जा कि बेटी मुखाग्नि भी दे सकेले।

गया के एगो गांव में भइल ई शव यात्रा अपना पीछे कई गो संदेश छोड गइल। एक त ई असंवेदनशील पुरुष- प्रधान समाज के मुँह पर एगो तमाचा हवे, जवन कि परंपरा के नांव पर हर गलत- सही चीज के मनवाये के कोशिश करेला। ईहे मानसिकता शायद काफी हद तक कन्या भ्रूण के हत्या खातिर भी जिम्मेदार रहेला। आ दोसर आ सबसे महत्वपूर्ण बात ई ह कि लइकी सब अब धार्मिक कर्मकांड के नाम पर जारी एगो असंवेदनशील परंपरा के अर्थी उठाये के तैयारी क लेले बाडी सन। (स्त्रोत: दैनिक जागरण)
 
Comments (3)
daughter's of the real world-performs bravely last rituals of their mother
1 Monday, 14 December 2009 00:57
ashok sharma atul
jab se prakriti ne Adam and Eve to banaya hai, ek hi baat samne nikalkar aaye hai-"Jaroorat pada to aurat maa, bahan, patni-aadi-ityaadi. Magar jahan Mard ka "Kaam" nikal gaya phir naari pair ki jooti. Kash ham samajh paate-prakriti yaani yeh sristi-yaani mard aur aurat-arthat koi bhed nahi-pran mein, janm mein, mrityu mein-yaani "Aurat hai to mard hai. Mard hai to aurat hai." Thik hai hamare DHARMA GRANTHA jo bhi kahen, itnaa to hum jaante hi hai ki kul-khandan ka naam agar sifr bete ke kandhe par hota to hamare desh mein, samaj mein itne "Bahubansh" nahi paide hote. Jyada Darshan ki baat karna munasib nahi hoga. par "Gaya ki Betiyon ne jo kiya hai" usse sabit hota hai. yehi prakrti ka asli niyam hai. Aur "Manaviya soch, vikash" ka, "Aadhunik Vishwa" mein Sabse Umda, "Vidrohi", "Samajik Sudhar, Kraanti" ka "Inspirational Aagaaz" hai. Agar hum khud ko mard bharne ka dam bhartein hai to....hame kya karna chahiye.....shayad kehne ke jaroorat nahi.....
Daughter's also perform the last rirual.
2 Tuesday, 15 December 2009 14:27
manju ojha
dear sir,

I am going to speak about the rigidness of our society. our social structure are not allowed daughter's to perform the last ritual of their parrentsbut now the rule has changed . if i have only one baby then she have the right to perform the last ritual. there are no doubt our society are not allowed to do the same. one could do this then this is the right for the baby .

manju ojha
बेटा नहीं तो क्या हुआ बेटी भी दे सकती है मुखाग्नि
3 Wednesday, 16 December 2009 20:46
Navin Bhojpuria
विद्वान प्रियशील चतुर्वेदी कहते हैं कि गरुड़ पुराण में उल्लेख है कि कुल में यदि कोई पुत्र नहीं है तो पुत्री या पत्नी मुखाग्नि दे सकती है। यदि वह भी नहीं है तो राजा, ब्राह्मण या कोई मित्र भी मुखाग्नि दे सकता है। पुत्री द्वारा पिता को मुखाग्नि की घटना कोई नई नहीं है। पहले भी ऐसा होता रहा है।

=============================

मंजु जी ई समाज के बनावल रिति रिवाज बा ना त धार्मिक ग्रंथ भी एह बात के मान गयिल बाड्न स और उपर के लाइन एहि से हम लिखनी हा ।


जय भोजपुरी , एगो भोजपुरिया
click here