अहमदाबाद। बिहार के बदलत तस्वीर अब देश के भावी प्रबंधकन के भी अपना ओर आकर्षित कइ रहल बाटे। विकास के तकरीबन सभ मापदंडन पर देश के कई राज्यन के पीछे छोड़ चुकल बिहार अब भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) अहमदाबाद के छात्रन के भी आकर्षित कइ रहल बाटे। आ एही वजह से आईआईएम - अहमदाबाद के छात्र बिहार के ग्रामीण इलाका में जाके ओह क्षेत्र के समस्या के बारे में जाने आ ओकर समाधान निकाले के पहल करे के फैसला कइले बाडे सन। रूरल इमर्सन प्रोग्राम (आरईपी) के तहत एग्री बिजनेस मैनेजमेंट (पीजीपी-एजीएम) के पहिला साल के छात्र दो हफ्ता के दौरा पर बिहार के कई इलाका में जइहें सन। छात्रन के दौरा के ई योजना अप्रैल आ दिसंबर में दू चरणन में आयोजित कइल जाई। एकर उद्देश्य इहे बा कि स्थानीय प्रशासन आ लोगन के रोजाना के समस्या के बारे में वास्तविक जानकारी मिलो, आ ओकर समाधान तलाशल जा सको।
पिछला पांच सालन में राज्य के जोरदार विकास दर का वजह से सिर्फ छात्रन में ही ना, बल्कि कारोबारियन के भी बिहार में दिलचस्पी बढ़ल बाटे। केंदीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) द्वारा हाल में ही जारी कइल गइल आंकड़न के मुताबिक राज्य के जीडीपी दर 11.03 फीसदी हो गइल बाटे। एह सूची में गुजरात 11.05 फीसदी विकास दर के साथ देश में सबसे आगे बा।
पिछला पांच सालन में बिहार के सकल घरेलू उत्पाद 58,000 करोड़ रुपया के बढ़ के एक लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गइल बा। सीएसओ द्वारा जारी आंकडा के अनुसार देश के और पिछडा कई गो राज्य भी शानदार प्रदर्शन कइले बाडे सन। ओही वजह से आईआईएम-ए के छात्रन के समूह बिहार जाये के तैयारी में बा। एह कार्यक्रम के तहत छात्रन के एगो एक दल पटना आ मधुबनी जइसन इलाका में जाई, ओहिजे एगो दोसर दल के महाराष्ट्र के औरंगाबाद आ गुजरात के कच्छ आ मेहसाणा भेजल जाई।
पीजीपी-एबीएम (कोर्स) फैकल्टी के चेयरपर्सन प्रद्युम्न खोकले के कहनाम बा कि "छात्रन के एक दल के आरआईपी के तहत बिहार भेजल जाई। ओह छात्रन के सहायता खातिर ओहिजा संस्थान के कुछ पुराने छात्र भी रहिहें, जवन कि अब उद्यमी बन चुकल बाडे। एकरा अलावा स्थानीय एनजीओ भी उनुकर मदद करिहें। राज्य के विकास के आंकडा देखला के बाद हर केहू बिहार जाये खातिर तैयार बा।" वास्तव में आरआईपी प्रोग्राम छात्रन के हकीकत से रूबरू कराये खातिर बनावल गइल बाटे। एहसे छात्रन के ग्रामीण इलाका के समस्या के करीब से देखे के मौका मिलेला, आ ऊ लोग ओकर समाधान ढूंढे के कोशिश करेला।
साल 2009 में एहिजा के छात्र आंध्र प्रदेश के कई इलाका अउर महाराष्ट्र के कोल्हापुर आ चित्तौड़ के दौरा कइले रहे। कोल्हापुर की यात्रा के दौरान छात्र अइसन भूमिहीन मजदूरन से मिलले, जिनका के स्थानीय लोग काम ना देत रहे। ओह लोगन का लगे आपन पूंजी भी ना रहे, जइसे कि ऊ लोग रोजगार शुरू कर सको। ई छात्र लोग ओह लोगन के कोल्हापुर के एगो स्थानीय बैंक के माइक्रो फाइनेंस योजना के बारे में बतावल, आ ओह लोगन के कर्ज लेके कारोबार शुरु करे खातिर प्रेरित कइल। ओकरा बाद स्थानीय अधिकारियन के मदद से ऊ लोग कारोबार शुरू कइ दिहल।




