बक्सर। कुछ दिन पहिले खबर आइल रहे बक्सर के एगो गांव से, जहंवा लोग मिल के गांव में इंजीनियरिंग कॉलेज खोल रहल बा, आ आज हमनी का बात कर तानी जा बिहार के ही एगो गांव के, जहाँ के माटी में धान, गेहूँ, मटर आ बाकी चीजन का संगे-संगे ज्ञान के भी खेती होला। ई गांव प्रसिद्ध बा अपना शिक्षकन खातिर, जवन लोग पूरा देश भर में ज्ञान के ज्योति फैला रहल बाटे।बक्सर जिला मुख्यालय से लगभग पच्चीस किलोमीटर दूर डुमरांव-अरियांव मार्ग पर स्थित लाखन डीहरा गांव के नांव सुनते ही अस्सी के दशक में चर्चित दस्यु सरदार डाकू लाखन के नांव जेहन में आ जाला। किन्तु गांव में प्रवेश करते ही एह भ्रम पर आत्मग्लानि होखे लागेला। एहिजा के माटी में अब रबी आ खरीफ की फसलन का संगे-संगे ज्ञान संपदा के खेती होला। तकरीबन सौ घर वाला एह गांव में हर शख्स शिक्षा के क्षेत्र में स्कालर बने के सपना देखेला, आ ओकरा के पूरा करे खातिर खुब मेहनत भी करेला।
एहिजा के सपूत आईआईटी रुढ़की, पटना विवि, मगध विवि, रांची विवि, वीर कुंवर सिंह विवि आ कृषि विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित कालेजन में शिक्षक बन के ज्ञान के ज्योति जला रहल बाडे, आ एही खूबी का चलते आसपास के लोग लाखडीहरा के 'द्रोणाचार्यन के गांव' कहे लागल बा। ई शायद शिक्षा के ही असर हवे कि गांव में बेरोजगार युवकन के संख्या नगण्य बाटे। अइसन बात नइखे कि एहिजा के लोग डाक्टरी, इंजीनियरिंग आ अन्य क्षेत्रन में नइखे, लेकिन पूर्व राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम आ प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह का तरह एहिजा के स्कालर शिक्षक भइला पर अपना पर ज्यादा गर्व करेला।
एही गांव के डा. नागेन्द्र चतुर्वेदी प्रतिष्ठित भारतीय तकनीकी संस्थान (आईआईटी), रुढ़की में अंग्रेजी के प्राध्यापक बाडन। जबकि सुप्रसिद्ध विज्ञान शिक्षक प्रो. के. डी. दुबे एचडी जैन कालेज (आरा) में भौतिकी के प्राध्यापक बाडन। गांव के ही प्रो. रामाशंकर दुबे सेंट जेवियर कालेज में नियुक्ति के बाद रांची विश्वविद्यालय में गणित विभागाध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त भइलन। किसान परिवार के रामलक्ष्मण सिंह किसान कालेज, सोहसराय में प्राध्यापक बनला के बाद पुलिस सेवा में अइलन, आ झारखंड में डीआईजी पद के सुशोभित कइलन। डा. शशिकांत दुबे वर्तमान में डीएवी जमुई के प्राचार्य बाडन, जबकि डा. रंगजी दुबे पटना के बी. डी. इवनिंग कालेज में संस्कृत के विभागाध्यक्ष बाडन। एहिजे के उमाकांत दुबे दिल्ली आ मनीष कुमार कोलकाता इंटर कालेज में ज्ञान बांट रहल बाडन। लेकिन शिक्षकन के फेहरिश्त एहिजे खत्म नइखे होत। डा. नागेन्द्र दुबे, डा. राजेश कुमार, प्रो. हरिश्चंद्र दुबे आ उमाकांत दुबे जइसन कई गो नांव बा, जवन कि देश के विभिन्न शैक्षणिक संस्था में अपना गांव आ सूबा के नांव रौशन कइ रहल बाटे।
खास बात इ बा कि एह गांव के लोग शिक्षा के क्षेत्र में जवन भी मुकाम हासिल कइल, ओकर नींव एहिजा के सरकारी विद्यालयन में ही गढ़ल गइल। शिक्षा के प्रति एहिजा के लोगन में अइसन जुनून बा कि हाल ही में जिला शिक्षा अधीक्षक डा. महेश प्रसाद जब एहिजा के स्कूल के निरीक्षण करे अइलन, त पूर्व छात्रन के रिकार्ड देख के दंग रह गइलन। एहिजा के शैक्षिक माहौल से ऊ एतना प्रभावित भइलन कि दूरदराज में स्थित एह गांव के स्कूल में मैट्रिक परीक्षा के केंद्र बना दिहल गइल। स्थानीय निवासी आ एमवी कालेज में राजनीति शास्त्र के विभागाध्यक्ष (बराक ओबामा अउर वैश्विक मंदी पर किताब लिखे वाले) डा. रविकांत दुबे के कहनाम बा कि गांव के नवहा लोगन में उच्च शिक्षा हासिल करे के जुनून बाटे। आ जब भी कवनो गुरुजी छुट्टी में गांव आवेलन, त एह जुनून के पूरा करे खातिर नवहा लोगन के मार्गदर्शन देवेलन। वइसे एह गांव के आध्यात्मिक मान्यता से भी गहरा नाता बा। लोग कहेला कि भगवान श्रीराम के अनुज लक्ष्मण एहिजा डेरा डलले रहलन, एही वजह से एकर नांव लखन डीहा पड़ल, जवन कि बाद में अपभ्रंश होके लाखन डीहरा कहाये लागल। [साभार: जागरण]



भोजपुरिया डोट कॉम के कोटिशः धन्यवाद / ज्ञान के रौशनी फैलावेवाला एह गाँव पर अब तक के प्रकाशित इ सबसे बेहतरीन आलेख
बटुए / श्री सुधीर कुमार और श्री कंचन किशोर जी के लेखनी के प्रणाम /