जीरादेई (सिवान)। अगर रउआ कुछ करे के जज्बा लेके आगे बढ तानी त मार्ग में भले केतनो बाधा आ जाये, केहू के आगे बढे से ना रोक सकेले। कुछ एही तरह के जज्बा लेके अपना बल पर मंजिल के रास्ता तय कर रहल बाडी मुखिया वीणा देवी। सिवान जिला के जीरादेई प्रखंड के भरौली पंचायत के मुखिया वीणा देवी के राजनीति विरासत में ना मिलल। अपना मेहनत से ऊ जनता के लड़ाई लडली, ओह में जनता के साथ मिलल अउर ओकरा संगे मिलल मुखिया के दायित्व। जीरादेई प्रखंड के भरौली गांव के निवासी वीणा देवी के जनम 15 अप्रैल 1965 के छपरा जिला के सिताब दियारा गांव में भइल रहे। इंटर तक के पढाई के बाद 18 जून, 1983 के भरौली निवासी बृजकिशोर सिंह का संगे उनकर बियाह हो गइल। ससुराल में घूमे-फिरे आ बात करे में शुरु में तनी संकोच होत रहे, सामाजिक परेशानी भी सामने आइल। लेकिन दिल में कुछ करे के तमन्ना रहे, ओह से विरोध की परवाह कइला बिना समाज खातिर कुछ करे के फैसला ले लेहली।
वीणा देवी के कहनाम बा कि गांव में गरीबी आ अशिक्षा के बीच सामाजिक बंधन के कारण जिंदगी में ठहराव सा महसूस होत रहे। खास कर के गांव में रहे वाली औरतन के आर्थिक- सामाजिक हालत देख के दु:ख होत रहे। एह हालात से लडे के इच्छा त बहुत पहिले से रहे, लेकिन जनवरी 2001 में समाज सेवा के रास्ता पर चल पड़ली, ओकरा बाद फेर पीछे मुड़ के कबो ना देखे के पडल।
नारी के आधार मान के सबसे पहिले ऊ दहेज प्रथा के खिलाफ आवाज उठवली, ओकरा बाद परिवार नियोजन आ नारी शिक्षा खातिर घर-घर जाके अलख जगवली। एह अभियान के बाद वीणा देवी औरतन के आर्थिक आत्मनिर्भरता खातिर स्वयं सहायता समूह बनाये के राह देखवली। शुरुआत में समाज के बंधन उनका के रोके के कोशिश कइलस, लेकिन एह सब के तूर के ऊ आगे बढत गइली। अब त मुखिया बना के समाज भी उनका काम के मान्यता दे देले बाटे।
सबसे आश्चर्य के बात ई बा कि वीणा देवी के परिवार के कवनो राजनीतिक आधार नइखे। पति छपरा स्थित उत्तर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के प्रबंधक बाडन, आ दूनो लइका स्कूल में पढेले सन। वीणा देवी के कहनाम बा कि मुखिया के चुनाव में परिवार के कवनो सदस्य प्रचार तक ना कइल, एहमें ऊ जनता के समर्थन से चुनल गइली। आ मुखिया बनला के बादो ऊ अपना के रबर स्टाम्प ना बनवली, बल्कि खुद निर्णय लेके आगे बढली। जनहित में योजना के कार्यान्वयन में सहभागिता के दावा करते ऊ कहली कि औरतन के नरेगा के काम में हाथ बटाये खातिर ऊ हमेशा उत्प्रेरित करेली। ग्राम सभा या पंचायत में औरतन के भागीदारी अधिक से अधिक सुनिश्चित करे खातिर ऊ पंचायत भ्रमण करत रहेली।
गांव वालन के भी कहनाम बा कि वीणा देवी अपना काम का बदौलत मुखिया बनल बाडी। एही गांव के रहे वाला हीरा साह, नंदा ओझा, आंधी देवी आ अनिल सिंह कहलन कि वीणा देवी में साहस आ जुझारूपन बाटे, जेकरा बल पर ऊ गांव वालन के एगो नया राह देखवले बाडी। वीणा देवी के मानना बा कि अवसर मिलला पर नारी भी केहू से कम नइखे, जरुरत बा खाली उनका के रास्ता देखाये के। जरूरत बा पुरुष प्रधान समाज के मानसिकता में बदलाव ले आये के, आ एकरा खातिर उनकर अभियान जारी बा। (जागरण)




