अति-महत्वाकांक्षा आदमी के कवना हद तक गिरा सकेले, एकर प्रमाण हाल में ही आरा में देखे के मिलल, जब स्नाताकोत्तर (एम. ए.) के परीक्षा में भोजपुरी साहित्यकार मनोज सिंह 'भावुक' का जगह कवनो आउर आदमी के परीक्षा देत रंगे हाथ पकडल गइल। आरा के वीर कुंवर सिंह विश्वविधालय प्रबंधन का ओर से उनका खिलाफ थाना में प्राथमिकी भी दर्ज करावल जा चुकल बाटे।एह घटना के बाद से समूचा भोजपुरी साहित्य जगत सदमा के स्थिति में बा, आ मनोज भावुक फरार बाडे। हमनी के मिलल जानकारी के अनुसार पुलिस उनुका के तलाश करत उनुकर गांवे भी गइल रहे, पर ओहिजा भी उनुकर कवनो पता ना चल पावल। पुलिस सूत्रन से मिलल जानकारी का अनुसार अब उनका के फरार घोषित क के कुर्की के आदेश लेवे के तैयारी कइल जा रहल बा।
एगो भोजपुरी टीवी चैनल में काफी बडहल पद पर काम क रहल मनोज भावुक के मुसीबत एहिजे खतम ना भइल। एह मुसीबत के घडी में आपन साख बचावे खातिर टीवी चैनल भी उनुका के नाता तूर लेले बा, आ उनुका के ओहिजा से बाहर के रास्ता देखा दिहल गइल बाटे।
"हमरा से कुछ मत पूछिं, हमरा त लाज लागता कि हम अइसन गिरल आदमी का संगे एके मंच पर कविता पढले बानी। हमनी के उनुका से बहुत उम्मेद रहे, बाकिर अब नफरत हो गइल बा। अइसने कुछ लोगन का वजह से सारा दुनिया भोजपुरी के आ भोजपुरियन के खराब कहेले," अपना नाम ना छापे के शर्त पर एगो साहित्यकार कहले। एह घटना के लेके साहित्यकारन का बीच में तरह तरह के चर्चा हो रहल बाटे, जवना के केन्द्र में मनोज भावुक ही बाडे। "अगर इ बात सच ह, त एह तरह के लोग भोजपुरी ने नाम पर एगो धब्बा हवे। अइसन आदमी के समाज से बाहर निकाल देवे के चाहीं," साहित्यिक संस्था संदर्भ के अध्यक्ष प्रो. रविकांत जी कहनी।
वइसे कुछ लोगन के कहनाम बा कि मनोज एम. ए. के डिग्री लिहला का बाद शिक्षण के क्षेत्र में आपन कैरियर बनावल चाहत रहलन। लेकिन सवाल इ बा कि जवन आदमी अपना जगह दोसरा के परीक्षा में बइठा के आगे बढे के रास्ता खोजत होखे, का ऊ शिक्षण कार्य के लायक बाटे? का विधा के मंदिर में अइसन घृणित काम करे वाला इंसान के भोजपुरिया समाज एगो साहित्यकार का रुप में स्वीकार करी? जब इ सवाल हमनी का पूर्वांचल एकता मंच के संतोष कुमार पटेल जी से पुछनी, त ऊ कहले – “ई एगो बहुत ही दुखद घटना हवे, आ भावुक जइसन आदमी से केहू इ उम्मेद ना कइले रहे। अपना के एतना बड साहित्यकार प्रोजेक्ट करेला लोग, आ जब समय आवे त... हमनी के अइसन लोग से सावधान रहे के चाहीं, एह तरह के लोग भोजपुरी आन्दोलन के गति के अवरुद्ध क सकेला।“
वइसे एह मामला के सामने अइला का बाद उनुका खिलाफ कई गो आउर मामला भी खुल रहल बाटे। दिल्ली के एगो उभरत गायक पंकज प्रवीण के आरोप बा कि मनोज भावुक अपना कुछ दोस्तन का साथ मिल के एगो एलबम निकाले के नांव पर उनुका संगे 55 हजार रुपया के धोखाधडी कइले। एह मामला पर पंकज प्रवीण से खास बातचीत रउरा भोजपुरिया डॉट कॉम पर पढ सकेनी।
कुछ दिन पहिले ले मनोज भावुक के नांव एगो उभरत भोजपुरी साहित्यकार का तौर पर लिहल जात रहे, आ इंटरनेट पर कई गो भोजपुरी वेबसाइटन पर ऊ काफी सक्रिय भी रहले ह। इंटरनेट पर उनकर प्रभाव के अहसास एही से लगावल जा सकेला कि खाली उनकर एगो व्यक्ति से निजी मतभेद भइला का वजह से उनकर मित्र लोग मिल के एगो वेबसाइट बंद करा दीहल। वइसे, कई वेबसाइटन के प्रिय गजलकार मनोज भावुक के असलियत जब दुनिया के सामने आ गइल बा, तब एह मामला में ओह वेबसाइटन के चुप्पी अपने आप में कई गो सवाल खडा क रहल बाटे। हर छोट-बड खबर के सबसे पहिले सामने ले आये के दावा करे वाली आ छोट-छोट मुद्दा पर तुफान खडा क देवे वाली ओह वेबसाइटन के एह मामला में शायद काठ मार गइल बा।
भोजपुरिया डॉट कॉम हमेशा निष्पक्ष भाव से सच के दुनिया के सामने ले आवेला, काहें कि हमनी का मानेनी जा कि अपना समाज के अंदर के बुराई के ढके के ना बल्कि ओकर इलाज करे के जरुरत बाटे, तबे समाज स्वस्थ रह सकी। मीडिया के मतलब रिश्ता निभावल ना, बल्कि सच के सामने ले आवल होला, शायद ई बात बहुत लोगन के नइखे पता। अगर कवनो जज के बेटा चाहे मित्र कवनो अपराध करी, त का ओकरा के ऊ जज सजा ना दी? सच कडवा भले हो सकेला, लेकिन ओकरा के तोपे (छूपाये) के जवन प्रयास हो रहल बा, ओहसे एह तरह के आपराधिक मानसिकता वाला लोग के आउर प्रोत्साहन मिली। वइसे हमरा पुरा विश्वास बा कि एह खबर के छपला के बाद भी कवनो वेबसाइट एह सच्चाई पर लिखे के साहस ना क सकी, ओह महापुरुष (?) के बारे में। लेकिन, आखिर सच के छुपा के कवनो वेबसाइट केतना दिन ले आपन अस्तित्व बचा पाई? एह सवाल के जबाब ओह वेबसाइटन के पाठकन के तलाशे के पडी, फिलहाल त अइसन शुभचिंतक वेबसाइटन का वजह से भोजपुरी के भविष्य दांव पर लागल बा।




भोजपुरिया डॉट कॉम ई खुलासा क के उनका मुँह पर से नकाब हटा देले बा.
hamra hisab se inkar sabse bad saza hoyi ki inka ke Kavi Sammelan me na jae dihal jao... waise bhi kawan muh leke jaihen ab.
cheating kar ke agar koi teacher banane ka sapna dekh raha tha, to fir wo apne students ko kya sanskar deta? shame on you.
Media wale baat to badi-badi karte hain, ar aisa gira hua kaam. sharm aani chahiye.
भोजपुरिया समाज में अइसन लोगन खातिर कवनों जगह नइखे। धिक्कार होखे मनोज भावुक तोहरा जियला प।
sharm karo farji sahityakar.. shram karo manoj bhawuk...........kuch to laaz karo itni umra mai