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मॉरीशस में मनल भोजपुरियन के पिकनिक !

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विश्व भोजपुरी सम्मेलन (देवरिया) के दोसरका अंतर्राष्ट्रीय अधिवेशन फेर से मॉरीशसे में आयोजित भइल, पिछिला 29-30 अगस्त 2009 के। विश्व भर से करीब सवा सइ भोजपुरिया प्रतिनिधि लोग एकरा में शामिल भइल, जवना में खाली भारत से करीब सइ लोग पहुँचल रहले। ओईसे पहुँचहूं के चाहीं, कारण भोजपुरी भारते के देन ह, उपज ह, त जाहिर बा भोजपुरी बोले वाला लोग एहिजे सबसे बेसी होइहें।

लेकिन मारीशस सम्मेलन के अबकी के नजारा देखि के हमरा ई सोचे पर मजबूर होखे के पडता कि का सबसे बेसी भइला के मतलब सबसे असभ्य भइल होला? अब पहिला सम्मेलन में मारीशस के धरती पर भारत के केतना लोग पहुँचल रहे आ का-का कइले रहे, ई त हमरा नइखे मालुम, बाकि अबकी के सम्मेलन में जतना लोग पहुंचल रहल हा आ जवन- जवन कइल हा, ऊ देखिये के हमार माथा, एह देश के भोजपुरिया भइला का नाते शर्म से झुकि गइल हा।

हमरा ई कहे में तनिको संकोच नइखे होत कि अबकी के सम्मेलन में भाग लेवे वाला लोगन में से खाली पच्चीसे प्रतिशत लोगन का सम्मेलन के गरिमा के ख्याल रहल हा, आ एकरा से कवनो सरोकार रहल हा। बाकी के पचहत्तर प्रतिशत लोगन खातिर एह सम्मेलन में भाग लीहल मारीशस के धरती पर उतरि के, विश्व के एह सबसे खूबसुरत टापु पर पिकनिक मनावे से बेसी ना रहल हा। हलांकि ई सम्मेलन करावे वाला लोग, अपना ओरि से अधिवेशन के मूल तिथि दुइये दिन रखले रहल हा, आ बाकी के चार दिन एह लोगन खातिर खुदे देश भ्रमण आ जगह- जगह अपना उपस्थिति के गरिमा बढावे खातिर रखले रहल हा, बाकिर हमरा कहे में तनिको संकोच नइखे होत कि हमनी के दल के ई पचहत्तर प्रतिशत लोग कहीं आपन गरिमामय उपस्थिति ना दर्ज करा पावल हा, जवना के चलते बाकियो पच्चीस प्रतिशत का शर्मसार होखे के पडि गइल हा।

सबसे अभद्र व्यावहार, एह लोगन के, हमरा तब लागल, जब एह सम्मेलन के उदघाटन करे उहां के राष्ट्रपति माननीय अनिरुद्ध जगन्नाथ जी मंच पर उपस्थित भइले, आ ई लोग अपना गरिमा के कुल्हि हद पार करत, संउसे प्रोटोकॉल के धता बतावत, झुंड के झुंड, बे-बोलवले मंच पर चढि गइल आ उनुका संगे फोटो खिंचवाये खातिर भेडिया धसान मचा दिहल। ई नजारा देखि के जहाँ आयोजन पक्ष के लोग परेशान हो उठल, खुद राष्ट्रपति महोदय हक्का- बक्का रहि गइले आ अपना के राष्ट्रपति के जगह शायद बेचारा राष्ट्रपति महसूस करे लगले, अइसन उनुका चेहरा के भाव बतावत रहे तब। ई त गनीमत रहे कि ऊ एगो छोटहन गणराज्य के राष्ट्रपति रहले, एह से एह लोगन के इज्जति बाँच गइल, ना त अगर एह देश के राष्ट्रपति, चाहें प्रधानमंत्री, भा कवनो प्रांत के गवर्नर चाहें मुख्यमंत्री काहें ना रहिते, अगर ओह लोगन के सामने ई लोग अइसन हरकत करे के कोशिस कइले रहित त शायद ओह लोगन में से साबुत त केहू नाहिये बांचल रहित। एह लोगन के अइसन खातिर सेक्यूरिटी गार्डस कइ दिहले रहिते सन।

ठीक अइसने आपन जाति के परिचय ई लोग ओहू घरी दीहल, जहां एतना सबका बावजुदो राष्ट्रपति महोदय दोसरा दिने अपना आवास पर एह दल के चाय- पानी खातिर बोलवले। अतने ना, एक दिन त ई लोग तब हद क दीहल, जब उहां के नेशनल एसेम्बली में उहां के स्पीकर बोलवले, आ उनुका अनुपस्थिति में ई लोग उनका कुर्सी तक पहुंचि के आपन फोटो खिंचवाये लागल। बिना बोलवले मंच पर पहुंचि गइल, बिना कहले माइक तक पहुंचि गइल, जबरदस्ती आपन उपस्थिति दर्ज करावे के हरकत, हर जगह फोटो खिंचवावे के मानसिकता, ताकि अपना देश में जाके अपना घर-परिवार में ई प्रमाण दे सकीं कि हमहीं उहां के निमंत्रित आ सबसे सम्माननीय सदस्य रहनी हां। हमरा ख्याल से एगो छोटहन देश में, जवन हमनिये के मूल के लोगन के बनावल बसावल एगो गणराज्य ह, भारत जइसन बडहन आ सम्मानित गणराज्य के माथा शर्म से झुकावे खातिर पर्याप्त रहल ह, खाली अपना कुछ लोगन का कारगुजारी का वजह से।

एह बात के बहुत लम्बा ना खिंचि के आ विस्तार ना देके, ओहू में केहू के नाम ना लेके हम, बस एगो इशारा भरि कइ रहल बानी, एह सम्मेलन में शामिल अइसन लोगन के मानसिकता के बारे में, जेकरा खातिर अइसन कवनो बड सम्मेलन, चाहें अधिवेशन, जवन कवनो भाषा, साहित्य, संस्कृति आ संस्कार के उजागर करे खातिर कइल जात होखे, मात्र एगो पिकनिक स्पॉट रहल, अउर कुछ ना।

एकरा बावजुद कि एह सम्मेलन में जाने कतने लोग अइसनो शामिल भइल रहल हा, जेकरा भोजपुरी से कवनो माने में दूर-दूर के रिश्ता ना रहल हा, भोजपुरी खातिर मरे-मिटे वाला लोगन का महात्मा गाँधी संस्थान में, अपना पूर्वजन के सजों-सजों के राखल धरोहर के दर्शन करे के मौका मिलल हा। ओह अप्रवासी घाट के दर्शन करे के मौका मिलल हा, जहाँ सबसे पहिले हमनी के पूर्वज गिरमिटिया मजदूर बनि के उतरल रहले, आ ई समझे के मौका मिलल हा कि कतना- कतना आ कइसन- कइसन सांसति सहि के ऊ लोग आपन वजुद कायम रखि पावल ओहिजा, आ कवना तरह से संघर्षरत गिरमिटिया से ओहिजा के गवर्नमेंट बनि पावल।

मारीशस के राष्ट्रपिता मानल जाये वाला आदरणीय सर शिवसागर रामगुलाम के समाधि स्थल, उनका नाम पर रोपल गइल ओहिजा के बोटानिकल गार्डेन, आ दुनिया के एगो छोटहन स्वर्ग के, ओहिजा के रमणीय स्थलन के दर्शन के सौभाग्य मिलल हा। ई समझे, बूझे के मौका मिलल हा कि कइसे ई लोग आपन अस्तित्व कायम रखे में ओहिजा सफल हो पावल।

एकरा अलावे एगो एकर दुखदो पहलू समझ में आइल हा, कि जवना भारत के चलते एह टापू के वजुद कायम भइल, जवन भारत उहां के धरती के महात्मा गाँधी संस्थान, इंदिरा गाँधी सेंटर फॉर इंडियन कल्चर, राजीव गाँधी संस्थान, जवाहर लाल नेहरु हॉस्पिटल, महात्मा गाँधी आयुर्वेद औषधालय, विवेकानन्द संस्थान, आ इहां त कि ओहिजा के नेशनल असेम्बली में बइठे खातिर उहां के स्पीकर के कुर्सी तक उपलब्ध करवले बा, ओह भारत के रुपया के मोल ओहिजा कउडी के बराबर ना, बल्कि ओहू से कम। यानि भारतीय मुद्रा के कवनो पूछ ओहिजा नइखे। एहिजा के एक रुपया ओहिजा के चालिस- पचास पइसा के बराबर बा, बाकी ऊहो खुले आम ओहिजा नइखे चले के। मारीशस करेंसी के बाद अगर कवनो करेंसी के ओहिजा पूछ बा त ऊ बा अमेरिकन डालर चाहे यूरोपियन यूरो।

कुल मिला के चलीं चाहें जइसन भइल ई सम्मेलन भइल। भोजपुरी खातिर कवनो क्रांति से कम ना कहाई जवन। लेकिन तकलीफ एह बात के जरुर बा कि जवना मारीशस के वजूद भारत के चलते कायम भइल, आ खास क के भोजपुरियन का चलते, ओह मारीशस में भोजपुरी भाषा के सरकारी मान्यता मिली गइल, लेकिन भारत में आजु तक ना मिलल। ई भोजपुरियन खातिर कम शर्म के बात ना कहाई...?    
 
(लेखक प्रसिद्ध भोजपुरी पत्रिका 'भोजपुरी माटी' के संपादक आ भोजपुरिया डॉट कॉम के साहित्य विभाग के संपादक बानी)

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Comments (3)
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1 Thursday, 08 October 2009 16:18
anoop narayan singh
jai bhi log bhojpuri kai taran har banai kai kosis kar rahal ba log u sarahniai paryas ba baki nautanki karai wala log asal bhojpurya naikhai log wu sponcer ba log anoop narayan singh sub editor bihari khabar
Aapke koti koti pranaam....!!
2 Friday, 09 October 2009 16:58
Jitendra Tiwary
Maananiya Anil Ji,

Kuch likhla se pahile, hum apna hridaya ke gaharayi se aapke pranaam karataani....!!
Hanlaki, hum aapke god chhoo ke god ta kai ber lagale baani lekin, raura hamani ke khoon ke katra katra mein basal eh paawan bhasha 'BHOJPURI' ke apne adwitiya prayaas se jeh uchayi par pahuncha rahal baani aur apne sadridha sankalp se jutal bani.... ekra khatir agar hamara roj ekbaar aapke god chhoweke bhi soubhagya milat ta bhi kam rahal ha....!!
Mauritius mein jawan bhayil, okra khatir aapke wyathit bhayil lazimi ba, kahen ki raura ego swabhimani aur apna BHOJPURI se atoot prem rakhewala insaan hayin. Lekin, aapke bura laage toh hum ke kshama kar deb, par hamara kahe mein taniko sankoch naikhe ke hum UP BIHAR ke logan mein ihe ego kami hamara laukele ke khud ke expose kare mein kehu kawano kor kasar na chhodelein....!!
Khair, ekra khatir zyada dukhi bhaila mein ka fayada ba..... raur hayi article oh log ke aankh khole khatir kaafi ba.....aur hamara pura bharosa ba ki uhan log ehse sabak li log kahein ki hum jaanataani ki insaan ke fitrat na badale...lekin ei article uhan log ke atmasamman par seedhe waar kari aa phalaswaroop, pariwartan hoyi....kahein ki aakhir mein uho log BHOJPURIAS ha.....aur BHOJPURIA aatmasamman pe chot na sah sake....!!

Dhanyawaad.....
Saadar Praam....!!
I am working in Morocic
3 Wednesday, 19 May 2010 17:52
uttam kumar pandey
I am come to Mauritius and see
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