नई दिल्ली। चौदह साल के लमहर इंतजार के बाद आखिरकार महिला आरक्षण विधेयक मंगलवार के राज्यसभा में पारित हो ही गइल। बिल के विरोध कइ रहल सांसद एकरा के शर्मनाक घटना बतवले ह, जबकि समर्थक लोग एकरा के देश की औरतन के जीत बतावल। 233 सांसदन में से 186 सांसद लोग महिला आरक्षण बिल के समर्थन में वोट दिहल, जबकि एक सांसद एह बिल के खिलाफ वोट दिहलन।बिल के पास कराये खातिर 155 वोटन के जरूरत रहे। एह विधेयक के विरोधी सात सदस्यन के सदन से ना सिर्फ बजट सत्र खातिर निलंबित कइल गइल, बल्कि मार्शलन के जरिए कंधा पर लाद के सदन से बाहर भी भेजवावल गइल। एह से पहिले ई सातों निलंबित सांसद सपा अउर राजद के अपना साथी सांसदन का संगे मिल के जम के हंगामा मचावल। तमाशा के हालत इहे रहे कि सपा के एगो सांसद कमाल अख्तर त सदन में ही खुदकुशी के धमकी तक दे दिहलन, और एगो गिलास तोड के कांच अपना सीना पर रख के सदन के धमकाये के प्रयास कइलन। एकरा बाद सात निलंबित सांसदन के मार्शल के जरिए बाहर निकालल गइल, अउर बहस शुरू कइ दिहल गइल।
बहस के शुरूआत में नेता प्रतिपक्ष अरूण जेटली कहलन कि हम बिल का संगे बानी, आ इ एगो प्रगतिशील विधेयक हवे। हमनी का एकर समर्थन कर तानी, लेकिन एह बीच में काफी शर्मनाक घटना भइल, जवन निंदनीय बाटे। ऊ इहो कहलन कि प्रकृति त स्त्री-पुरूष के बराबर के दर्जा देके पैदा कइलस, लेकिन आजादी के 63 साल बाद भी हमनी के देश में आधी आबादी के लोकसभा तक पहुंचे के मौका ना मिलल। अब तक खाली 7 से 11 प्रतिशत महिला लोग ही लोकसभा तक पहुंच पाइल बाटे। जेटली ने कहनाम रहे कि मौजूदा लोकसभा में 10.7 फीसदी औरत बाडी सन, आ अगर कानून ना बनल, त अगिला 63 साल से अइसने हाल रही। एकरा अलावा जेटली स्कूल छोडे वाली लइकियन के संख्या लइकन से ज्यादा बतावत एह स्थिति पर भी चिंता व्यक्त कइलन। ऊ लोकसभा अउर राजनीति में औरतन के बराबर के भागीदारी के भी वकालत कइलन।
विधेयक पर भइल चर्चा में हस्तक्षेप करत प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह आज के दिन के ऐतिहासिक बतावत एह विधेयक के महिला सशक्तीकरण के दिशा में ऐतिहासिक कदम करार दिहलन। एकरा संगे ऊ इहो स्पष्ट कइलन कि ई विधेयक अल्पसंख्यक, पिछडा वर्ग या अनुसूचित जाति, जनजाति के विरोधी नइखे।
भारत के संविधान के एह 108वां संशोधन विधेयक के सदन में एक के मुकाबले 186 मत से पारित कइ दिहल गइल। चर्चा में राजद, सपा आ लोजपा के सांसद भाग ना लिहलन। मतदान के ठीक पहिले बसपा नेता सतीशचंद्र मिश्र अपना पार्टी के सदस्यन का संगे विधेयक के विरोध करत सदन से वाकआउट कइ गइलन। बसपा के सतीश चंद्र मिश्र एह विधेयक में 33 प्रतिशत आरक्षण का जगह 50 प्रतिशत सीट औरतन खातिर आरक्षित करे के मांग करत रहलन।
एह से पहिले सदन में राजद, सपा अउर लोजपा के सदस्यन के भारी विरोध अउर हंगामा के कारण बैठक के तीन बार स्थगित करे के पड़ल। सदन में आज भइल एह तरह के घोर अनुशासन वाला घटना के मनमोहन सिंह, विपक्ष के नेता अरुण जेटली समेत विभिन्न दल के नेता लोग दुखद बतावल, अउर भविष्य में एह तरह के घटना के पुनरावृति ना होखे देवे के बात कहल।
ई विधेयक काल्हे सदन में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर पारित होखे के रहे, लेकिन कुछ सदस्यन के भारी विरोध के कारण ना हो पाइल।


