Home Samachar National अगर मन में बा हौसला...

अगर मन में बा हौसला...

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धनबाद। कहल जाला कि हिम्मते मर्दा त मदते खुदा... एह कहावत के सच कर देहले बाड़ी धनबाद के एगो किसान परिवार के महिला गीता देवी। आज उनकर अदम्य साहस आ बुलंद हौसला से पूरा देश प्रभावित बा। गीता के बियाह 16 साल के उमिर में धारकिरो के एगो ग्रामीण विकलांग का संगे भइल रहे। ओह समय में निरक्षर गीता अपना किस्मत के ना कोस के अपना उपर विश्वाश रखते हुए मेहनत आ लगन से अपना परिवार के जिम्मा उठवली।

धीरे-धीरे जब परिवार बढ़ल त मन थोडा विचलित भइल लेकिन पति के प्रेरणा उनकर के देहरी से निकले में मदद कइलस। सबसे पहिले त उ अपना बेटी लोगन के पढ़े खातिर प्रेरित कइली, एकरा बाद बेटी से सीख-सीख के खुद भी पढ़े के कोशिस में लाग गइली। जब बेटी मैट्रिक पास कइली त गीता मध्यमा।

एकरा से हौसला बढ़ल त निकल गइली दोसरा लोगन के जगाये। सन 2002 में नरेगा के मजदूरन के मास्टर रोल पे अंगूठा न लगा के हस्ताक्षर से बैंक व पोस्टआफिस के खाता से पइसा निकाले के सिखवली। गीता आज तक कुल 40 मजदूरन से ज्यादा के साक्षर बना चुकल बाड़ी, अउर ई अभियान अभियो जारी बा। गीता देवी के कहनाम बा कि एह साक्षरता अभियान के एगो अउर मकशद बा - मजदूरन के उनका हक के बारे में बतावल। एकर परिणाम इ निकलल कि पहिले निरक्षर मजदूरन से नरेगा के काम में तिन दिन के काम के बदले छह दिन की हाजिरी पर अंगूठा लगवा लिहल जात रहे लेकिन मजदूरन के साक्षर होखला पर इ हेरा फेरी रूक गइल। एकरा संगे-संगे बुजुर्ग मजदूरन के ऊ इ समझवली कि बेटा-बेटी के भरोसे ना रह के अपना भविष्य खातिर छोट-छोट बचत सुरु कइल जाव।

एही क्रम में गीता महिला समाज के कल्याण खातिर कई गो कार्यक्रम चलावे के शुरुवात कइली। अभी ले कुल मिला के 21 स्वयं सहायता समूह गठित करवाए में उनकर महत्वापूर्ण भूमिका बाटे। बाल-विवाह का संगे-संगे कई सामाजिक कुरीतियन के खिलाफ जागरूकता के ही परिणाम रहे के गीता के ग्राम शिक्षा समिति के अध्यक्ष चुन लिहल गइल। बाद में धारकिरो मध्य विद्यालय में अध्यापकन के कमी होखला पर उ खुद बिना पारिश्रमिक के पढावल शुरू कइ देहली। पिछला साल 1 अक्टूबर 2009 के गीता देवी धावाचिता नोडल महेशपुर पंचायत के नरेगा प्रेरक खातिर चुनल गइली। आज गीता देवी के एगो बेटा आ दू गो बेटी बाड़ी सन। बेटा नरेगा मजदूर के रूप में काम कर रहल बाटे अउर इंटर पास पति घर पर ट्यूशन पढ़ावत बाड़े। उनका एह बात के संतुष्टि मिल रहल बा की उनकर जिंदगी समाज के एगो बड़ा वंचित वर्ग के जीवन में नवविहान लावे के काम आ रहल बा। (शुभंकर राय/ जागरण)
 
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