नई दिल्ली। राज्यसभा के नया सदस्यन के शपथ ग्रहण समारोह में हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत अउर तमिल का संगे-संगे कुछ समय खातिर भोजपुरी भी गूंजल, लेकिन संविधान के आठवीं अनुसूची में शामिल ना भइला के कारण भोजपुरी में शपथ लेवे वाला राजीव प्रताप रूड़ी (भाजपा) के दोबारा अंग्रेजी में शपथ लेवे के पड़ल। एही तरह से राजस्थान से निर्वाचित एगो सदस्य राजस्थानी भाषा में शपथ लेवे के जिद कइलन, लेकिन आठवीं अनुसूची के हवाला देके उहां के मना लिहल गइल। वइसे एगो आश्चर्यजनक घटना का तहत उत्तर प्रदेश से चुनकर आइल बहुजन समाज पार्टी के एगो सदस्य तमिल में शपथ लिहलन। वइसे ई पहिला बेर नइखे, जब भोजपुरी संसद के दरवाजा पर दस्तक देले बिया। पिछला साल ही कांग्रेस के सांसद संजय निरुपम लोकसभा में भोजपुरी के मान्यता के मुद्दा पुरजोर तरीका से उठवले रहलन, अउर एह से पहिले भी जद-यू के भूतपूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह समेत इक्का-दुक्का सांसद सदन में भोजपुरी के मान्यता के बात समय-समय पर उठावत रहेलन।
चार-पाँच साल पहिले संसद में कई लोग चौंक गइल रहे जब पंजाब से अकाली दल के दूगो सांसद सदन में भोजपुरी के मान्यता के माँग एह आधार पर उठवले रहे कि सिख संप्रदाय के धार्मिक ग्रंथ "गुरु ग्रंथ साहिब" में जवन कबीर के दोहा के संकलन बा, ऊ भोजपुरी में बा। अकाली दल के ऊ सांसद लोग (जे पंजाबी रहे) एह बात से हैरान रहे कि सैकडन साल पुरान एह भाषा के आज ले संविधान में काहें ना शामिल कइल गइल। भोजपुरी के मान्यता के बारे में लोग माँग त कई दशकन से कइल जा रहल बाटे, लेकिन सांसदन के उपेक्षा के वजह से ई अभियो लंबित बाटे।





hamani ke sapana ab jaldiy pura hoi ai hamar vishvas baa