पटना। भोजपुरी में एगो कहावत बा कि "जेकर माई पूवा पकावे ओकरे धियवा तरसे" उहे हाल आज भोजपुरी लोक संगीत के गीतकार लोगन के संगे हो रहल बा। जेकरा लिखल गीतन पे पूरा भोजपुरिया समाज झूम रहल बाटे अउर गायक लोग दौलत आ शोहरत बटोर रहल बा लोग, ओही गीतन के रचनाकर लोग गुमनामी के अँधेरा में जी रहल बाड़े।अपना भोजपुरी गीतन से दूसरा के पहिचान दियावे वाला गीतकार लोगन में में पं. गणेश दत्त 'किरण', लक्ष्मण ओझा 'बागी', लक्ष्मण लहरी, परशुराम केसरी, तारकेश्वर मिश्रा 'राही', शशि बावला, अशोक शिवपुरी, झुन्नू चंचल आ मिथिलेश गहमरी जइसन लोग आज गुमनामी में बा, जबकि एह लोगन के लिखल गीतन के गा के भरत शर्मा, पवन सिंह आ विष्णु ओझा जइसन गायक खूब नाम अउर दाम दुनो कमइले बा लोग। एतने ना, एह लोगन के लिखल गीतन के कैसेट-सीडी निकाल के म्यूजिक कंपनी अपना के मालामाल कइ चुकल बाड़ी सन।
पंडित गणेश दत्त किरण के द्वारा लिखित गजल 'केसर के गंध लेके पूर्वा चलल रहे..' व 'दबे पांव अइहा नजरिया बचाके..' पे गायक भरत शर्मा के भोजपुरिया समाज में जबरदस्त लोकप्रियता मिलल। लेकिन एह गीत के गीतकार पं. गणेश दत्त किरण आज भी पहचान के मोहताज बाडे, इहाँ तक कि उहां के चर्चा भी कही ना होला।
एह बारे में प्रसिद्ध गीतकार लक्ष्मण ओझा बागी कहलन कि पांच साल पाहिले त कैसेट कंपनी पारिश्रमिक के तौर पर आठ गीतन के एवज में पांच हजार देत रहली सन। मगर आज के गीतकारन के भीड़ में स्तरीय गीत लिखे वाला लोग त पहिचान के मोहताज हो गइल बा। कैसेट आ सीडी बनावे वाली कंपनी अश्लील शब्दन से भरल गीतन के ही अपना एलबम में राखत बाड़ी सन। एही विषय पर मशहूर गीतकार अशोक शिवपुरी के कहनाम बा कि "कम से कम गायक लोग के त गीतकार लोगन के विशेष ख्याल रखे के चाहीं, काहें कि उनकरे लिखल गीतन पे गायक लोग के भविष्य निर्भर बा।"
कुछ एही तरह के दुःख दर्द शशि बावला अउर झून्नू चंचल के भी बा। एह लोगन के कहनाम बा कि एगो गीत खातिर हजार रुपये देवे में भी कंपनी के हालत ख़राब रहत बा, जबकि गाना हिट होखला पर ओकरा से लाखन रुपया के कमाई होखेला। एह सब के बावजूद भी उ लोग दिन रात एक करी के गीत लिखेला, ताकि भोजपुरी के पहिचान बरक़रार रहे। गीतकार शशि बावला आपन दर्द कुछ एह लेखां बयान कइलन -'रात के चांद, दिन के आदित्य लिखेनी, अचानक कबो-कबो ना रोजे नित्य लिखेनी, नाम शशि बावला ह भोजपुरी बचावे खातिर साहित्य लिखेनी...।' (जागरण)



"गुमनामी के अंधरिया ना जाने कब तक ले बीती,
निकलत सुरुज के देखला भी कुछ दिन हो गईल.
हमरे सजवला से चमकत बा चाँद आसमान में,
और अमावास के रात हमरा जिनगी में आ गईल."
bahut sahi kahale baani Ashok Shivpuri ji
Gayak log me bhi manawata naam ke kawano cheej nayikhe rah gayil.
KABHU ANJOR HOI
RAT KATNO HOKHE LAMHAR
KABAHU T BHOR HOI