आज कुछ विशेष काम का वजह से रात भर जागल रहनी ह (इ हमार आदत बन चुकल बा), अभी सबेरे साढे सात बजे सुते के तैयारी ही करत रहनी ह कि मोबाइल फोन के घंटी बाजे लागल।
अब हम कइसे समझाईं इरशाद भाई के कि खाली एही मुद्दा का वजह से हमनी का शुरु से एह कार्यक्रम के विरोध क रहल बानी, आ आज फाइनल में शामिल भइला के निमंत्रण होखला के बावजुद, हम पटना जाये से इंकार क देहनी, जबकि महुआ का ओर से आये-जाये आ रहे के व्यवस्था कइल गइल रहे। कइसे समझाईं, आ केकरा के समझाईं कि आज ओह दूनो प्रतिभागी में से केहू भी जीतो, हार जाई हमार भोजपुरिया समाज। कइसे समझाईं कि जवन कवनो गायक भी आज जीती, ओकरा पर इ लोग भोजपुरी गायक का जगह बिहार के गायक, आ उत्तर प्रदेश के गायक के ठप्पा त पहिलहीं लगा देले बा, त कवनो हालत में ओकरा बाकी आधा समाज के त सहयोग आ प्रोत्साहन मिले वाला नइखे।
एकरा अलावा इरशाद भाई कहनी कि कार्यक्रम त बढिया बा, लेकिन यूपी आ बिहार के लडाये वाला तरीका ठीक नइखे लागत। "हमनी का एहिजा ओमान में बइठ के केरल के लइकियन से भोजपुरी में गाना गवाव तानी जा, ओकनी पर का बीती जब ओकनी के पता चली कि एहिजा लोग रियलिटी शो के नाम पर आपस में लडे खातिर तैयार बइठल बा?" ई सवाल हमरा के भीतर ले झकझोर दिहलस, आ शायद एही वजह से हम एह मुद्दा के दोबारा उठाये खातिर मजबूर हो गइनी।
भोजपुरिया डॉट कॉम पर पहिले भी लिखल जा चुकल बा कि भोजपुरियन में एह तरह से दरार डाले के कोशिस के हर स्तर पर विरोध होखे के चाहीं। आखिर आज ले कबो हमनी के भोजपुरिया समाज में केहू के यूपी आ बिहार के नाम पर बाँट के ना देखल गइल, बल्कि सबके एक सूत्र से बाँधे के काम क रहल बिया ई भाषा। हमनी के वेबसाइट पर भी यूपी आ बिहार के सदस्य आयेला लोग, लेकिन कबो हमनी के साइट के, या बाकी सदस्य के ओह भावना से ना देखल जाला, जवन कि आज सुर-संग्राम में भडकाये के कोशिस हो रहल बाटे। का सुर संग्राम के राष्ट्रीय-स्तर पर आयोजित ना कइल जा सकत रहे, ठीक ओही तरह जइसे कि वॉयस ऑफ इंडिया आ सारेगामापा बगैरह के आयोजन होला? का गजेन्द्र सिंह आ महुआ के एकरा में टीआरपी बढाये के कवनो तरीका लउकत रहे? सवाल त ढेर सारा बा, आ हमनी का चाहेब कि एह मुद्दा पर आगे विचार कइल जाव, अइसन कवनो कार्यक्रम बनाये से पहिले।
भोजपुरी में हमनी का नागपूरी, छत्तीसगढी, आ कई गो आउर भाषा के जोडे के कोशिस में बानी। एह सभ भाषा बोले वालन के एक मंच पर ले आये के प्रयास में ढेर संस्था लागल बाडी सन, अगर रउरा ओह में सहयोग नइखी क सकत, त कम से कम ओह में दरार त मत डालीं। कला के जोडे के माध्यम बनाईं, तूरे के ना... ना त शायद आये वाली पीढी एह कृत्य के कबो माफ ना क पाई। आ ओकरा संगे ही माफ ना क पइहें ऊ कलाकार, जिनका जितला के बावजूद दोसरा राज्य के प्रशंसकन के प्यार ना मिल पावल, खाली एही वजह से कि ऊ दोसर राज्य के हवन।
वइसे इरशाद भाई एगो बात बहुत बढिया कहनी ह कि जवन ऊर्जा हमनी के नवहा लोग आज यूपी आ बिहार के प्रतिभागी के सपोर्ट करे में लगा रहल बाटे, ओकर आधा भी अगर ऊ लोग भोजपुरी आन्दोलन में लगाइत, त हमनी के भाषा के मान्यता बहुत पहिले मिल गइल रहित। वइसे एह मुद्दा पर भोजपुरिया डॉट कॉम के साहित्य- सम्पादक अनिल ओझा नीरद जी के ई सवाल बा कि संसद के अगिला सत्र में जब भोजपुरी के मान्यता के विधेयक पेश होई, आ ओहिजा अगर केहू ई सवाल उठा दिहल कि कवना भोजपुरी के मान्यता दिहल जाई, यूपी वाला के कि बिहार वाला के... तब का होई ? तब का करी हमनी के समाज ???
एह मुद्दा पर आउर आलेख एहिजा देखीं:
सुर-संग्राम के नांव पर यूपी-बिहार बंटवारा काहें
राज ठाकरे से अलग कहाँ बा महुआ के नजरिया?




पाहिले ता बहुत बहुत धन्यवाद एह विषय के एह घटना के हमनी के जानकारी में लावे खातिर |
जी इरशाद भाई के जवन सोच बाटे ऊ हर भोजपुरिया के सोच बाटे , जी हम सही कहत बानी आ कहे के कुछ कारण बाटे
~ भोजपुरिया के का पहचान बाटे ?
~ भोजपुरिया समाज के का पहचान बाटे ?
जी हम हकीकत में जिए वाला आदमी हई, हम एगो भोजपुरिया हई , १८ साल असल गाँव में रहल बानी , जब शहर में गईनी ता केहू बिहारी कहे ता केहू भोजपुरिया कहे ( हम यु पी के रहे वाला हई लेकिन भोजपुरी के कुछ लोग बिहारी भाषा भी कहेला आ ऑरकुट पे ता आधिकारिक तौर पे ई बिहारी भाषा बाटे ) लेकिन हमके कबो बाउर ना लागल आ हम कहनी की जे समझली आप , हमके कवनो एतराज नईखे , काहे से यु पी आ बिहार एगो माई के दू गो बेटा हवन सा जवन इक संगे पिटात बाडन स मुंबई में , असाम में आ झारखंड में आ बाकी सब राज्य में |
जी हम गजेन्द्र सिंह जी के दोष ना देब काहे की हम एगो व्यव्शायिक आदमी से अपना भाषा के आ समाज के बारे में बढ़िया करे के उमेद नईखी राखत , ऊ पैसा कमाए खातिर आईल बाड़े ता ऊ ता कुछु बेच किन के पैसा के कमाई करिहन |
लेकिन महुवा के का जिमेदारी बाटे , महुवा जवन भोजपुरी के नाम पे पैसा कमात बटे ओकर का भोजपुरिया समाज खातिर कुछ दायित्वा नईखे का |
जी एगो ता भोजपुरिया समाज ऐसे ही बटाईल बाटे आ वोह में अब ई एगो नया शगूफा भोजपुरियन के बाटे के |
का भाई लोग भोजपुरी के ता तहन लोग फाटल चीटल लुगरी बना देले बड़ा लो अब का वोह के इक दम ज़रा देबे के मन बाटे ??
अरे मरदे तनी दिल से सोच के देखा लो , ई उहे भाषा हवे जवन सबसे मीठ भाषा के नाम से जानल जले , लेकिन तहां लोग ता एह भाषा के लोगन के आपस में लड़ा के इक दम तीत बना देत बाड़ा लो , काहे ??
कवन दुश्मनी बाटे रउवा सब के भोजपुरी भाषा से आ भोजपुरी समाज से , आज जहा भोजपुरी समाज के जोड़े के बात होत बाटे ता रउवा सब ओकरा के बड़ा नीमन से बाट देले बानी , काहे ?
महुवा बड़ा बढ़िया शुरुवात ले के चलल रहे लेकिन पैसा के मोह बाटे की गलत करावे पे मजबूर कई देले बाटे | लेकिन जब भोजपुरियन के ई तहन लोगन के गणित बुझा जाई ता ताला लगावे के पड़ जाई तहन लोगन के अपना दूकान में |
इक बार ध्यान करी सभे वोह समय के जब भोजपुरिया माती के लोग चारो दिशा में भोजपुरी के आवाज बुलन कईले रहल चाहे ऊ कबीर दास जी होखस , चाहे राजेन्द्र प्रसाद जी , चाहे भिखारी ठाकुर जी होखस , चाहे कुवंर सिंह जी , चाहे मंगल पाण्डेय जी होखस , चाहे चित्तू पाण्डेय जी , सब भोजपुरिया के लाल रहल लो केहू यु पी आ बिहार के ना रहे |
आ क्षेत्र के नाम पे राजनीति राज ठाकरे खेलत बाटे आ वोही समय में क्षेत्र के नाम पे आपन रोटी तहन लोग पकावत बाड़ा लो , काहे ??
अरे तहन लोग आ राज ठाकरे में कवनो अंतर नईखे , ऊ वोट खातिर ई करत बाटे आ तहन लोग नोट खात्री ई करत बाड़ा लोग |
बात के समझी सभे , आज के समय में हमनी के बहुत कमजोर बानी जा , कही भी आसरा नईखे मिळत आ एह समय में अगर रउवा सब अउर कमजोर करब ता ओकर नतीजा का हो सकेला ई बतावे के जरुरत नईखे |
जय भोजपुरी
there must be a conscious effort to unite,assimilate local deviation of the language and develop it as the language of the largest indian community.