भरत शर्मा 'ब्यास' के नाम भोजपुरी गायकी में कवनो परिचय के मोहताज नइखे. भोजपुरी गायकी के एह शलाका-पुरुष के हमनी का बात कइनी जा, उनुकर एलबम का बारे में, उनुकर कैरियर का बारे में आ भोजपुरी भाषा के बारे में... एहिजा हमनी का ओही बातचीत के खास अंश दे तानी जा:
भोजपुरी के आज चहुँ ओर चर्चा बा, एकरा बारे में कुछ बताईं ?
पहिले त लोग भोजपुरी के आ भोजपुरी के कलाकारन के कुछ नीच दृष्टि से देखत रहे. फेर जब भिखारी ठाकुर के दौर आइल, त बिदेसिया आ एह तरह के तमाम नाटक लोगन के सोच में बदलाव ले आइल. फेर बीच में जवन कुछ नया-नया गायक अइले, त एहिमें लोग अश्श्लीलता देवे लागल, रातों-रात हिट होखे खातिर. खराब- से- खराब शब्द लोग इस्तेमाल कइल, लोग के लागल कि अश्लील शब्द गाके हम रातो-रात हिट हो सकिला, गीत बाजार में आइल, 1-2 महिना त चर्चा रहल, फेर उ लोग लुप्त हो गइल.
गायन के क्षेत्र में अपना शुरुआती दिन के बारे में बताईं ?
सन 1971 से हमार गायकी के शुरुआत भइल. 1972 में हमार शादी भइल, ओकरा बाद हम आ गइनी कलकत्ता, ओहिजा एगो समाज में रामायण गावे लगनी, उहे समाज के लोग हमार नौकरी "हिन्दुस्तान मोटर्स" में लगा दिहल, 500 रुपया पगार रहे. करीब तीन साल ले हम नौकरी कइनी. पर हमार कलकत्ता जाये के पीछे जवन मुख्य कारण रहे इ कि भोजपुरी के सब बड कलाकारन खातिर कलकत्ता एगो मंच रहे. त हमहुँ सोचलिं कि हम ओहिजा इ लोगन के संगत में कुछ सीख लेब.
फेर हम 1976 में धनबाद चल गइनी, गायकी में अच्छा नाम-आ-शोहरत हासिल हो गइल रहे, 1987 ले हम रामायण गइनी, देहात में जइसन ढोलक आ ताल के संगे गावल जाला. फेर हम स्टेज ध लेहनी, ओह घरी स्टेज पर गावे वाला खाली तीन आदमी रहे – मुन्ना सिंह, शारदा सिन्हा आ बालेश्वर जी. हमरा के बहुत लोग कैसेट निकाले के कहुवे, पर हमरा बुझाते ना रहुवे कि कहाँ जाईं, केकरा से बतियाईं, हम त रामायण गाये वाला ब्यास रहुवीं.
एक दिन अचानक आर-सिरीज (मउ, उत्तर प्रदेश) से लोग गाडी लेके आ गइल आ कहलस कि राउर कैसेट निकाले के बा. हम खुश त बहुत भइनी कि लोग जवन कहत रहे, उहे होये जा रहल बा. लेकिन हम कहनी कि हम त अकेले बानी अभी, हमार तबला बजाये वाला कामेश्वर सिंह मुगलसराय बाडे, आ बाकि लोग बलिया बा. त उ लोग कहल कि रउरा पता बता दीं, हम सब केहु के ओहिजा बनारस में बो बोला लेब, रउरा गाडी में बैठीं, त हम झाल बजावे वाला के ले लेहनी, आ चल देहनी. रात बारह बजे से चार बजे तक हमनी का दु गो कैसेट कइनी जा, हमार पहिला कैसेट रहे आर-सिरीज में, "दाग कहाँ से पडी", दुनो कैसेट हिट हो गइल. इ दुनु कैसेट खातिर हमरा के 1000 रुपया मिलुवे, (साज वाला लोग के अलग से मिलुये), ओह घरी ऊ 1000 रुपया हमरा एक लाख रुपया नियर बुझाइल, काहे हम इ चाहत रहुवीं कि दस आदमी हमरा के जाने, पइसा खातिर त कबो गइबे ना गइनी. हमनी का त भोजपुरी में एही खातिर गाव तानी जा, काहे कि:
कौनो दुल्हिन के माथे के रोडी लगे.
भोजपुरी में गाई ला एही बदे,
कि मीठ मिसरी के जइसन इ बोली लगे...
दुनो कैसेट अच्छा बिकाये लागल. इ सुन के हमरा लगे 1989 में टी-सीरिज से चिट्ठी आ गइल, हम टी-सीरिज में गइनी, आ "राजा, पिय जन गांजा", "अइले मोर सजनवा", आ "राम जाने", कुल मिला के तीन कैसेट कइनी जा एके दिन में, जबकि आज हमनी के एक कैसेट करे में 6 दिन लागता. तीनों कैसेट सुपरहिट हो गइल.
आज के नया गायकन का बारे में राउर का राय बा ?
आज के जवन गायक बाडे, उ खाली श्रृंगार पर गाना गावत बाडे, लइकी कइसे चल तिया ओकरा पर गाना बा, ओकर कमर कइसे लचकत बा, ओकरा पर गाना बा, उ आँख कइसे मार तिया, ओकरा पर गाना बा, जबकि गीत होखे के चाहीं औरत के जवन भावना पर, चाहें करुणा पर... आ एह तरह के भाव पर. गीत जवन होखे के चाहीं, उ दिल के छुवे के चाहीं, ओह से आदमी घायल होई आ ओकरा के महसुस करे खातिर रुक जाला आदमी, चाल धीरे हो जाला. लेकिन पीठ पर जब लागी, त आदमी सरपट दौड जाला. आजकल के जवन लोग गावता, त उ दिल पे ना, बल्कि पीठ पे लाग ता, त आदमी भागे लाग ता, एहि से इ संगीत लोग जल्दिये भुला जा ता.
पहिले गीत के प्रधानता रहे, जवनो बात सुनि आदमी त उ दिल पे असर करत रहे, गीत ज्यादा गावल जात रहे, म्युजिक बहुत कम रहे. आज उ बात नइखे, आज उल्टा बा, अब म्युजिक प्रधान हो गइल बा. रउरा 20-25 साल पुरान कवनो गाना उठा के सुन लीं, गीत के प्रधानता रहे, त उ गाना आज भी नया बा. आज देखीं कि म्युजिक ज्यादा बा, गीत के अर्थ नइखे मिलत, त लोग के दिल पे असर नइखे होत. बहुत तरह के गीत बा हमनी के, जैसे पुरबी आ निर्गुण, रउरा अगर होइमें म्युजिक डाल देब त ओकर आत्मा ही मर जाई, त हमनी के जवन इ धरोहर बा, उ लुप्त हो रहल बा, जइसे भिखारी ठाकुर पुरबी पर केतना गीत गा गइले, पर आज लोग पुरबी गावत नइखे.
रउरा अलावा और के पुरबी गा रहल बा ?
बिहार में देव कुमार सिंह जी बानी, उ अच्छा पुरबी गा लेवेनी. बाकिर केहु आउरी नइखे लउकत. लोग कह ता कि हम पुरबी गा रहल बानी, पर उ लोग के सुर के ज्ञान नइखे. पुरबी में हम जब "हमके साडी चाहीं..." हम गउवीं, त नया गायक लोग एही धुन में गाये लागल, लोग जानल कि इहे एगो धुने बा, जबकि पुरबी में बहुत सारा धुन बा, जइसे हम अभी एगो नया कैसेट कइनी ह "बलमा बिहारी चाहीं..." ओकर टाइटल सांग हवे...
हमके बलमा... हमके बलमा बिहारी चाहीं...
एहीं गान एगो अउर बाटे,
परदेशिया बलम के बिना रहलो ना जाए...
एगो नया पीढी खातिर मैसेज बा, पहिले के लइकी घर के सारा काम कइला के बाद, सास के पैर दबाइले के बाद आराम करे जात रहुवे, पर आज के लइकी सब कह तारी सन...
हम त कइले बानी बी.ए. के पढाई राजाजी...
दुई लाख तिलक लिहलसS, बात नाहीं सहब...
बईठल नहाइब, खाइब, रानी बन के रहब...
हमके टाइटन के घडी किनवाईं राजाजी...
हम त कइले बानी बी.ए. के पढाई राजाजी...
भोजपुरी फिल्मन में आज जवन एक उफान आइल बा, एकरा बारे में राउर का राय बा ?
इ त एगो दौर होला, अइसन बात नइखे कि आज इ कवनो नया बात हो रहल बा, एकरा से अच्छा त इ नाजिर हुसैन साहब के जमाना में रहुवे, ओह घरी जेतना फिल्म देखीं, सब सुपर-डुपर हिट होत रहली सन... ओकरा बाद लक्ष्मण शाहाबादी के दौर आइल... फेर भोजपुरी फिल्मन के ना चले के कई गो कारण रहे, पहिला त ई कि बाहर के लोग जाके फिल्म बनावल, जेकरा उ मिट्टी, उ संस्कृति क्य ज्ञान ना रहे, त उ फिल्म ना चलल.
त का आज फेर उहे गलती दोहरावल जा रहल बा ?
हाँ, दोहरावल त जा रहल बा. पहिले, कैसेट के माध्यम से अश्श्लिलता सुने के मिलत रहुवे, अब फिल्मन के माध्यम से उ देखे के मिलSता, इ ना होखे के चाहीं.
पुरा भोजपुरिया समाज में एगो धारणा बाटे कि नवहा लोग भोजपुरी से नइखे जुडत, ओकर का कारण बुझा ता, उ लोग के कइसे जोडल जा सकेला ?
देखीं... एगो उमर के असर होला, जब सब केहु “फास्ट बीट” चाहेला, पर एकरा मतलब इ नइखे कि उ लइका अपना राह से भटक गइल बा, इ त एगो उमर के दौर होला, ओकरा बाद उ शांति के तलाश में आपन जड खोजेला, आ उ शांति ओकरा के आपन भाषा (भोजपुरी) में ही मिल सकेला.
भोजपुरी के जवन संविधान से मान्यता वाली बात बा, ओकरा बारे में राउर का सोच बा ?
इ बहुत ही दुखद बात बा, कि हमनी के भोजपुरी जवन की राजा भोज के बोली ह, आ इ अभी ले बोली बन के ही रह गइल बिया, एकरा भाषा के दर्जा नइखे मिलल. एहिजा से लोग जाके मॉरीशस, सुरीनाम आ अनेक देशन में भोजपुरी के पहचान आ दर्जा दिलवले बाटे लोग, बाकी हमनी देश में अभी ले एकर मान्यता नइखे मिलल. हमनी का गीत के माध्यम से, कुछ मीडिया वाले, आ कुछ राजनेता भी, जइसे लालु प्रसाद जी, प्रभुनाथ सिंह जी आ अन्य लोग एह प्रयास में लागल बा आ जल्द ही हमनी का इ सुखद समाचार के इंतजार कर तानी जा. कई बार एह मांग के लेके राष्ट्रपति भवन पर धरना भी दिहल जा चुकल बा.
नया गायक लोग खातिर रउरा का संदेश देब ?
नया गायक लोग खातिर हम इहे कहेब कि अगर उ लोग के ज्यादा दिन टिके के बा, त अश्श्लिल गीत मत गावे लोग, ना त अगर भादो के बाढ नियर कुछ दिन रहे के बा, त जवन मन करे गाव, 2-4-6 महीना में चल जइब.
जब भी भोजपुरी के बात आवेला, त खाली, अश्लीलता पे बात आ जाला, का हमनी के समाज अइसन गिरल समाज बा कि खाली अश्लील गीत ही पसंद करेला ? का हमनी के समाज ओतना मैच्योर नइखे कि अच्छा आ खराब में फर्क कर सके ?
ना अइसन बात नइखे, कुछ गायक लोग कह ता कि हमनी का त उहे गावतानी जवन समाज माँग ता, लेकिन कहाँ समाज मांगता... ? इ परोसल जाता, जबरदस्ती दिहल जा ता. जइसे, रउरा मान लीं किभी अपना घरे जाएब, त राउर माई चाहे मेहरारु जवन भी बना के धइले होई लोग, उ रउरा चुप चाप आनंद के साथ में, खा लेब, काहे कि रउरा त इ बोल के आइल नइखी कि का खाइब. आ कि रउरा थरिया पटक देब कि काहे बनवलु ह... त राउर इ मन रहल ह त काहे ना बता के अइनी ह ?
लेकिन ओकरा खातिर त एगो माँग होला कि आज हमरा इ चाहीं ?
हाँ, उ त कभी-कभी होला कि रउरा कुछ खावे के इच्छा होला, लेकिन रोज खातिर त बनावे वाला के पता होला कि रउरा का चाहीं. एह खातिर त गीतकार के इ समाज के पकड होखे के चाहीं, कि लोग का सुने के चाह ता ? देखीं, हम एगो अश्लीलता के खिलाफ गीत गवले बानी “भौजी तोहार बहिनिया” एलबम में :
त कतना नीमन होइत, त कतना नीमन होइत...
दुषित समाज के होइला के होखे दे बचावल जाइत
त कतना नीमन होइत, त कतना नीमन होइत...
पहिला दोषी त लिखे वाला गीतकार बाडे,
दुजा दोषी त गावे वाला गवनीहार बाडे,
कैसेट कंपनी आ दोषी सुननीहार बाडे,
बैठ के सोचीं त इ चारों गुनाह्गार बाडे...
कलंकी गायन पर लगाम लगावल जाइत,
त कतना नीमन होइत, त कतना नीमन होइत...
अब आखिर में, भोजपुरिया डॉट कॉम के बारे में राउर का विचार बा ?
इ भोजपुरिया डॉट कॉम भोजपुरी के प्रचार खातिर बहुत ही अच्छा माध्यम बा. देखीं पहिले किताब के जवाना रहे, त किताब त एक बार में एके आदमी नु पढी. ओकरा बाद उ दोसरा के दे दी, तबे उ पढ़ सकेला. फेर टेप/ रेडियो के जमाना आइल, एहमें एक संगे 10-20 लोग सुनता, ओकरा बाद, टीवी / वीडियो के जमाना आ गइल.. ओहीं गान अब इंटरनेट के जमाना बा ओहिसे देश ही ना जन-जन तक, पुरा दुनिया में, इ जौन भोजपुरी भाषा आ संस्कृति के प्रचार कइल जा रहल बा, इ भोजपुरी खातिर बहुत ही सुखद समाचार बा. हम अपना भोजपुरिया समाज का तरफ से रउरा सब के बहुत बधाई देब कि रउरा इ काम कर रहल बानी जा.
आपन प्रशंसक लोग खातिर एगो संदेश दीं ?
प्रशंसक लोग के इहे हम आग्रह हमेशा करिले कि जहाँ भी हमार श्रोता बाडे, जे भोजपुरी से प्यार करे वाला बा, उ श्रोता चाहें देश से होखे चाहे दुनिया के कौनो कोना से होखे, उ भोजपुरी में अच्छा-अच्छा गीत सुनस आ अच्छा गीतन के प्रोत्साहित करस.



ke dekhte hue unkara ke -- " BHOJPURI KE BHISMPITAMAH " ke sangya dihal jaye ke Chahi . Sharma jee jauna
Sadhna, Tapasya aur Parisram se aaj bhojpuri ke ' aachar, vyavhar aa Sanskar ke zinda rakhle ban u apne aap me Vishv me Adwitiy aur Atulniy bate ..
SUDHIR jee , unka par prakashit i ab tak ke Sabse Behtarin Sakchhatkar bate... rau ke dher sara Badhai...
aur bhojpuri ke meethas ke bare mein ka boli, aisan meeth ta duniya mein kehu naikhe,
aise hi geet gawat rahi,
Thanks
Raure geet bahut pashand kariley .............
Raurr geet ke tariff me jetna kahal jawal u kamey ba.........
Bass etna eltejja ba ki rurra hamey sa geet sunait rahi.............
Thanks
Raur
Shrota\
Shambhu
Basanti chamn mein...
gayaki hai bharat sharma ke kuno jabab na ba .
bhojpuri samaj ke uthan ke ley hum sab ek hoke ke ba our sab log milkar ek yesa samaj banim ja ki bhojpuri ka dhanka baje, bhojpur chainal ke aisan bistar kari ja ki samaj nam ho,
my name is uttam kumar pandey vill-lachhanpur psot-jamira dist- Ara -bhojpur
I am Job at Raipur shalimar pig,pvt,ltd as a Accountant
humni ke bihar-up se upar uth ke bhojpuri ke bare me baat kare ke chahi,humni bihar ke hoi jaa chahe up ke ,sab bhojpuria login ke ek hi riti-riwaj aa sanskriti baa,eh chalte sabse pahile humnio ke bhojpuria hae jaa...okra baad aawela apan state....kaheseki e jawan aapan bhasa baa e bihar aa up baneke pahile se baa.jab bihar up nahio hoit ta humni ke bhojpuri bolat rahti jaa.hum engineering ke student hae lekin humra bhojpuri se otne prem baa jatna ki ago beta ke apna maai se hokhe ke chahi...aaj hum jaha bhi jaaila ,hum paailaa ki bhojpuri nawka log me bhi ootne mahatwa rakhela jatna ki purania log me...antim me ehe kaham ki ................AAPAN BHASA AAPAN BHASA HOLA ,JAISE TELUGU ,TAMIL,BENGALI,LOG AAPAN BHASA NAIKHE BOLAL CHHODAT, OOSAHI HUMANIO KE MAN ME BHOJPURI KHATIR OOTNE PYAR HOKHE KE CHAHI.....
JAI BHOJPURI-JAI BHOJPURIA
bhojpuri ke abhi tak jivit rake me sharma ji ke sabse bada yogdan ba.
koti-koti pranam karatani Sharma ji ke.
JAI BHOJPURI
Hum up k ghazipur sahar se bani,,
Aur bhojpuri k gayak banal chahat bani,,
Kai bar aapse mile k koshish kaini par har bar asafal rahni,,
Lekin hamara vishwash bate k ek na ek din humhu aap k tarah ek bahute bada bhojpuriya gayak banab,,
Jab hum apana bayak banala k ichha apana mata ji se kahli ta u hamara se ehe kahli ki ''beta sapna dekahal theek h ar guru manal bhi thik h baaki kehu k sahara leke aage badhla se aachha bate k tu khud aapan rasta banawa , O rasta me tohra k 2-4 thokar jarure lagi par thokare se insaan sikhela''
Mata ji k ihe vachan hamesha hamara kaan me gujat rahela,,
Par kauno kaam k sahi se kare khatir guru k marg darshan bahute jaruri hola aur hum aap k aur manoj tiwari ji k aapan guru manale hai,,
Aasha h jaldi hi aap duno log se mile k mauka mili.
Ashirwad dei....
Sadar pranaam,,
aapka gumnaam shishya
-resham singh anmol-