लेखक परिचय : मूलत: गोपालगंज जिला के निवासी संजीव सिंह जी नवका पीढी के एगो सशक्त रचनाकार बानी। फिलहाल गाजियाबाद में रह रहल संजीव जी के रचना में भोजपुरी भाषा आ संस्कृति के प्रति लगाव, आ ओकरा विकास खातिर प्रयास करे के जज्बा साफ दिखाई देला। पिछला हफ्ता बिहार में जवन घोटाला के लेके आरोप-प्रत्यारोप भइल, ओही पर संजीव जी आज के राजनीति के नब्ज टटोलत ई आलेख हमनी के सहयोगी वेबसाइट जय भोजपुरी डॉट कॉम पर लिखनी ह। - संपादक"बिहार विकास मंच" बिहार के एगो अईसन संस्था के नाम हवे जे बिहार के विकसित करे खतिरा समर्पित बा। एह संस्था में तीन गो दल बावे। चोरवा दल, डकुआ दल आउर लुटवा दल। तिनु दल के अध्यक्ष लो के नाम क्रमश हवे छुटन तिवारी, लूटन राय आउर भूलन ठाकुर। तिनु दल के बारी बारी से "बिविम" के संचालित करे के अवसर मिलेला। जेकरा भी हाथ में "बिविम" के पगहा रहेला ऊहे बिहार के तानी आउर गहिर जोते के सोचेला। चोरवा दल बिहार के सभ्कुछ चोरावे के सोचेला त लुटवा दल बिहार के बाचल-खुचल ईज्जत के लूटे के सोचेला आउर डकुआ दल बिहारी संस्कार पर डाका डाले के सोचेला। सभकर काम करे के आपन-आपन अंदाज बावे। बाकिर चाहे केहू भी "बिविम" के चलावे बिहार के नाम दुनिया में रौशन जरुर होला।
ऐ घरी चोरवा दल "बिहार विकास मंच" के चलावत रहल। काम त सभ चोर-लुका के ठीके हॉट रहे। आ बिहार के जनता भी आपन सभ्कुछ चोरा लिहल गईला के बाद भी खुश रहे। लेकिन चोरवा दल के मेम्बर लोग सोचल की हमनिए के राज बा काहे ना तानी बड़हन चोरी कील जाव। बस कुछ लोग मिल के एगो योजना बनावल आउर तय दिने बिहार भवन में चोरी हो गईल। आ चोरी भी इतना बड़का भईल की शायदे बिहार में पहिले कबो भईल होखी। पूरा जनता के साथे-साथे डकुआ दल आउर लुटवा दल भी चोरी के ईल्जाम चोरवा दल के अध्यक्ष छुटन तिवारी पर लगा दिहल। वईसे हमरा नईखे पता की चोरी के कईले बा। चोरवा दल की लुटवा दल आ की डकुवा दल आ की बिहारी जनता। खैर हमरा ओसे का करे के बा? हमरा त बस अपना के बचावे के बा जे कही हमारा के केहू चोर समझ के लासा ना निकाल देव।
सभकर आरोप के सुनत-सुनत छुटन जी के माथा में अईसन हेडेक भईल की जईसे चोरी ना उनका सार के बहिन फरार भईल बिया। बाकिर कहस केकरा से चोरी त भईल बा। लेकिन कईले के बा? ई बतिय छुटन जी के नईखे बुझात। अगर हम छुटन तिवारी रहिति ता कहती "ईकड़ी-बिकड़ी सोना के टिकडी, जे भी चोरवले बा ओकर एगो आँख भड़क जाव" फेर आँख भड़क जाईत आ चोर पकड़ा जाईत। बाकिर छुटन जी हमरा नियन चालाक नईखन नु। छुटन बाबू जहा-जहा जास सभ लोग बस ईहे पूछल -"ऐ चोरी कौन किया रे, छुटन" अब छुटन जी केकरा-केकरा से कहस कि "हम नईखी कईले, राम जी के बिलईया कईले बिया"। हर के सारा बिहार के नामी-नामी लोग के ऊचका तिला पर आवे के कहलन। आ ईहो कहलन कि जेकरा जवान पूछे बा ओही जा सभ्केहू के सामने पूछी कहे कि हमरा अकेले में तानी लाज लागेला।
चली छोड़ी ऊनका लाज लगत बा त लागो। लेकिन चोरी के कईले बा पकडल जरुरी बा। सारा नामी लोग ऊचका टीला पर पहुच गईल। हमार परमिशन ना मिलल त तनी दुरे से देखे लगनी। "बिविम" के लुटवा दल आउर डकुआ दल के मेम्बर लोग भी आगईल रहे। हमरा बाद में पता लागल कि ई लोग आपन-आपन हिस्सा खतिर जुटल बा। अब देखि छुटन तिवारी त कटईला खोसी खानी मुड़ी लटका के कुछ सोचत रहन। आ छोट-छोट पिस काटे के बारी रहे लूटन राय आउर भूलन ठाकुर के। तब तक ले सवाल सुरु हो गईल। लूटन राय - "बता कौन किया है ई घोटाला, जब तेरा हाथ में पगहा था तो पीछा से बैलवा के कौन खोद रहा था"। छुटन जी कहलन - "देखि जा अभी हमरा नीखे पता लाग पाइल कि असली चोर के हवे, अगर पता रहित त जरुर बता देती। वईसे हमरा लगे आलादीन वाला चिराग बावे। हम करा जिन्न से कह देले बानी जईस्ही जिन्न चोर के बारे में बताई हम रौउआ लोगिन के जरुर अवगत करायेम"।
लुटवा दल के अध्यक्ष श्री भूलन ठाकुर जी कहनी कि "ई एकदम झूठ बोलता है, ईहे चोरिया किया है आउर कह रहा है कि हम कुछ नहीं जानता हुँ"। अब लूटन जी कहे चुप रहिति कहनी - "अगर तू गंगा में ठरा होके भी ई बतिया कहेगा तो भी हम विश्वाश नहीं करेगा। बुझा कि नाही..." हमरा लागल कि ई लूटन जी के डायलोगवा तनी कमजोर रह गईल। अगर हम रहिति त कहती कि "अगर तू लंगटा होके आउर गर्म तवा पर बईठ के भी ई बात कहेगा तो भी हम विश्वाश नहीं करेगा"। लेकिन का करी ओज हमार कौनो विसाध ना रहे एही से मन के सरधा मने में गाड देहनी। खैर हमार छोड़ी टीला के द्रश्य अब लुभावन होखे के काम लगा देहले रहे। सारा लोग आपन-आपन दिल खोल के छुटन जी गरियावल। ओही में केहू कहला "मरो ईसको आउर ईसके मेम्बरवा को, तबे चोरिया सकारे गा"। बस फेर का रहे जेकरा जवान मिलल ऊहे ले के छुटन जी आउर उनका दल के मेम्बर लो पर टूट पडल। माटी, धेपा, जूता, चपल, खुरपी, हसुआ, डंडा आउर झापड़ जवाने मिलल हथियार बनत गईल। दुनु तरफ से हाथा-पाहि सुरु, गारी-गलौज सुरु। ई सीन देख के हमरा अन्दर के पहलवान जागे लागल बाकिर खुद के काबू कैनी आ मने में सोचनी कि अगर हम ओज गइनी त कही सभ मिल के हमरे के ना चोर बना द सन। एही से चुप-चाप बिहार के धरती पर हो रहल कलयुगी महाभारत के दूर से ही संजय वाला दिव्य-द्रष्टि से देखे लगनी।
चोरवा दल के लोग भी कुछ कम ना रहे मारा-मारी करते रहे लो आउर साथे-साथे नारा भी लगावत रहे लो कि "लूटन राय असली चोर"। आउर डकुआ दल के लोग नारा लगावे "पईसा चोर गद्दी छोड़"। डकुआ दल के नारा त हमरा बुझाईल बाकी "लूटन राय असली चोर" ई नरवा हमरा भेजा में ना समाईल। बाद में याद आईल कि जब "बिहार विकाश मंच" के पगहा डकुआ दल के हाथे रहे तब लूटन बाबू पर बैलन के "नाथ" खतिरा वाला रखल पईसा के घोटाला के ईल्जाम लागल रहे। ओही से ई नारा चोरवा दल के मेम्बर लो लगावत बालो।
हम त एह महाभारत से दूर अकेले धरती पर गोड रख के... ना ना मुड़ी रख के... ना ना गोडे रख के ई मनभावन सीन देखत रहनी। बड़ा मजा मिळत रहे एह कलयुगी महाभारत में। सोचनी जब ले ई महाभारत होई हम एज से हिलेम ना। हमरा पूरा देखे के बा एकरा के हउ कुरुक्षेत्र वाला महाभारत के बेर भगवान हमरा के धोख दे देहले लेकिन अबकी के ना छोडेम। तब ले दूर कुछ बुद्धिजीवी लो के काना-फूसी सुनाईल। पेट फुले लागल कि आखिर का बात होत बा सुने के चाहि। दऊर के पहुचनी आ कान लगा के सुने लगनी। एक जाना कहलन "अरे ई सारा एके लेखा बाडन सन", दुसर जाना "जवान के हाथे जवन-कुछ भी आवेला ऊ ओकरा के अपने झोरी में डाले के सोचे ला", तीसर जाना "अरे चलअ लोगिन एक्नी के त ईहे आदत हवे सुबेरे कटा-कटी करिहे सन औउर सांझ के एक-दूसरा के घरे चाह पिए जईहे सन", चौथ जाना " हई सभ खाली बिहार के जनता के देखावे खतिरा हॉट बा सभ त एके बाडन सन बाकिर अभी झूठो -मूठो के मारामारी कर्ट बाडन सन"। ई बतिया सुनला के बाद हम फेरु से एक नजर हो रहल कलयुगी महाभारत पर डालनी आउर चौथ वाला महाशय से पूछनी कि अगर झूठो के हॉट बा त एक-दूसरा के खून काहे बहावत बाडन सन। रउये देखि ललका पानी से त ईहो धरती लाल होखे लागल। हम पूछनी आ चौथ महास्य चुप। हम अपना संतुष्टि खातिर सभकर चेहरा देखे लगनी। तब तक ओही भीड़ के अन्दर से एगो बुजुर्ग हमरा सामने अईलन आ कहलन "बबुआ तू अभी छोट बाड, ना समझ पईब। हई कूल्ह जवान तू देखत बाड असल में "ई हक के लड़ाई हवे" कि ओह चोरी के धन में सभकर हिस्सा बराबर के लागे के चाहि।
खैर केकरा-केकरा हिस्सा मिलल ई त ना बुझाईल बाकिर "हक" का होला ई हमरा ओह बुजुर्ग के बात में जरुर बुझा गईल। फेर एक बार आउरी कलयुगी महाभारत पर नजर डाल के चुप-चाप चोरी के पईसवा में आपन हिस्सा के हिसाब लगावे लगनी।




बहुत ही जबरद्स्त कटाक्ष , बहुत ही जबरद्स्त विश्लेषण , बहुत ही जबरद्स्त तरिका से रउवा आज के राजनीति , सरकार , विपक्ष आ जनता के उघार कईले बानी । जनता जवन Ignore करत जा रहल बिया , सरकार जवन लुटे मे व्यस्त बिया , विपक्ष जवन हिस्सा खोजत बा भा ओकरा एह बात के गम बा की ई लुटे के मोका काहे ना मिलल आ जे टोकत बा एह कुल पे ओकरा के ई तीनो लोग बबुवा भा छोट कही के रोक देत बा ।
आज के समय मे सब खेल सत्ता के चल रहल बा , जनता के कई गो चीजन पे बुरबक बना के ( जवना से जनता के कबो फायेदा नईखे होखे वाला ) सरकर लुट रहल बिया आ एह लुट के हिस्सा कबो विपक्ष रहत बा त कबो पक्ष ( जब जेकर सरकार होखे ) ।
जनता कब ले एह के हक के लडाई कही के चुप रही कब ले चली ई महाभारत का हमनी के आवाज उठाईब जा त छोट आ बबुवा कहाई के रही जाईब जा ?
संजीव भाई , हम बहुत लेख आलेख पढनी , हम खुद बहुत लिखले बानी लेकिन राउर ई लेख अपने आप मे सम्पुर्ण बा आ एह लेख के आगे बाकी लेख बहुत कमजोर पडी गईल बाडन स ।
रउवा एह लेख के माध्यम से बिहार मे दु दिन पहिले भईल महाभारत के जवना रुप मे देखवले बानी वोह के देख के ई लागत बा की अब अगर ना सोचल जाई त एह दल के चक्कर मे सब धुरकुस हो जाई , इज्जत के बुकनी होत बा उ अलग ,जनता के खुद कही मुह छुपावे के जगहि ना मिली ।
एह बरियार रचना खातिर हमरा तरफ से कोटिशः बधाई आ साधुवाद बा ।
हम उमेद करत बानी की एह रचना के Impact लोगन के उपर पडी आ लोग कम से कम सोच के समझ के आगे के रास्ता अख्तियार करी ।
धन्यवाद आ जय भोजपुरी
Hamhu Gopalganj Zila Bihar se bani, Padh ke bahut hi acchha lagal tohra ke bahut bahut dhanyabad
Tohar Bhai Bandhu
Alok