अभिभूत बा एह देश के संउसे नारी समाज, अउर संउसे भोजपुरिया समाज कि रउआ के संसद के उच्चासन पर पहुँचे वाली पहिला महिला के गौरव मिलल। हलांकि एह बात के अफसोसो कम नइखे कि केन्द्रीय मंत्री पद से रउआ इस्तीफा के बाद सउंसे बिहार त का, सउंसे भोजपुरिया समाज एह पद से विहीन हो गइल। तबो चलीं, सफलता ओकरे के कहल जाला जवन सिर चढि के बोले, आ सफल ऊ कहाला जेकरा के देखे खातिर लोगन के आपन पगरी सम्हारे के पडे। आ एह संसद में ई नजारा देखे के मिली, जब प्रधानमंत्री तक का रउआ आसन आ ओरि देखे खातिर आपन पगरी सम्हारे के पडी।खैर, अफसोस त एहू बात के कम नइखे कि कबो बरिसन तक एह देश के लगातार प्रधानमंत्री देबे वाला उत्तर प्रदेश एह पन्द्रहवीं संसद तक पहुंचत पहुंचत एगो कैबिनेट मंत्री तक देबे के काबिल ना रहि गइल। अउर देश के पहिला राष्ट्रपति देबे वाला प्रदेश बिहार एह संसद में एगो मंत्री पद खातिर तरसि गइल।
लेकिन खैर, रउआ के बधाई कि रउआ अबकी संसद के सर्वोच्च आसन के सुशोभित करे में कामयाब भइनी। अब भोजपुरियनि का रउआ से बहुत उम्मीद लागि गइल। कारण, सन 2006 में, रउआ अपने संसदीय क्षेत्र सासाराम में, अखिल भारतीय भोजपुरी सम्मेलन के एकइसवां राष्ट्रीय अधिवेशन के मंच से ई वादा कइले रहनी कि भोजपुरी भाषा के एही संसद में त का, एही सत्र में संविधान के आठवीं अनुसूची में मान्यता मिली जाई लेकिन दुर्भाग्य भोजपुरी के, कि राउर ऊ वादा आजु ले पूरा ना हो सकल।
अब चुकिं एह संसद के सर्वोच्च आसन पर रउआ खुद आसीन हो गइल बानी त संउसे भोजपुरिया समाज के ई आशा बन्हल स्वाभाविक बा कि अब एह काम में कवनो बाधा ना रहि जाई। कारण, एह विषय पर बहस करावे के समय देवे के अधिकार रउरे अधीन रही आ रउआ अगर मन से चाहि देब त एह काम के पूरा होखे में कवनो बाधा ना रहि जाई, अइसन हमनी के भरोसा बा। एगो जज लेखां खुद संज्ञान लेत अगर चाहबि त ई काम अउरो आसान हो जाई। बहसो हो जाई आ पासो हो जाई।
विश्वास बा कि देर आयद, दुरुस्त आयद के कहावत के चरितार्थ करत रउआ अपना समाज, अपना लोग से कइल वादा एह संसद आ एकरा पहिलके सत्र में पूरा करावे के कोशिस करबि, ना त हमरा आशा बा कि संउसे भोजपुरिया समाज ई कहे खातिर मजबूर होई कि - संसद के उच्चासन मुबारक! सासाराम के मिथ्या भाषण मुबारक!!
(लेखक प्रसिद्ध भोजपुरी पत्रिका 'भोजपुरी माटी' के संपादक आ भोजपुरिया डॉट कॉम के साहित्य विभाग के संपादक बानी)


