Home Sahitya Aalekh महुआ पी के बलमुआ अखिया लाल कइले बा

महुआ पी के बलमुआ अखिया लाल कइले बा

E-mail Print PDF
10 अगस्त 2008 के ऊ सांझ हमरा के बढ़िया से याद बिया। दिल्ली के चमचमात पांच सितारा होटल ‘द ओबेराय’ के शानदार हॉल के मंच पर ओह घरी के रेल मंत्री श्री लालू यादव आ श्री पी.के. तिवारी मौजूद रहले। पी.के.तिवारी लोगन से सवाल पूछे के कहलन। हॉल में बहुत सारा पत्रकार लोग भी मौजूद रहे बाकिर केहू एको सवाल ना पूछल। ओह कार्यक्रम में एगो पत्रकार के हैसियत से हम मौजूद रहीं। बहुत देर तक इंतजार कइला के बाद हम माइक हाथ में लेनी आ एगो सवाल पूछनीं। सवाल में हम अपना जीवन के एगो घटना के जिक्र करत (कि काहें 2001 में भोजपुरी के कुछ निहायत अश्लील कैसेट ले के हमरा के दिल्ली के अदालत में केस करे जाए के पड़ल रहे) हम पूछनी कि अभी रउआ भोजपुरी संस्कृति के संरक्षण अउर विकास के बात कइनी ह जवन सुने में त बड़ा नीमन लागल ह बाकिर ओकरा साथे एगो समस्या बा। पंजाबी आ कई गो दूसर चैनल एह बात के गवाह बाड़े स कि करोड़न रूपिया के चैनल चलावे आ लाभ कमाए खातिर नीचला स्तर के मनोरंजन आ अश्लीलता के सहारा लेवे के पड़ेला। रउआ एके साथे पइसा पीटेवाला व्यापार आ संस्कृति के रक्षा दूनो कइसे करब?

प्रश्न पूछ के हम पी. के. तिवारीजी से जवाब के इंतजार करत रहीं बाकिर जब ऊ काफी देर तक ना बोलले त अपना हाजिरजवाबी खातिर मशहूर लालू यादव जवाब देहले कि सब हो जाई, आ ना होई त तोहन लोगन इनका के पकड़ लीहजा।

ई महुआ चैनल के उदघाटन के अवसर रहे आ ओह कार्यक्रम में हम भोजपुरी के साप्ताहिक पत्रिका 'द संडे इंडियन' के एडीटोरियल डेस्क इंचार्ज के हैसियत से भोजपुरी टी.वी. चैनल के लांचिग पर रिपोर्ट तइयार करे गइल रहीं। ओह कार्यक्रम भोजपुरी के शायदे कवनो अइसन स्टार रहल होइहें जे ना पहुंचल होखे। कुणाल सिंह, शारदा सिन्हा, प्रकाश झा, भरतजी, भाग्यश्री, मुकेश तिवारी, मनोज बाजपेयी, रवि किशन, मनोज तिवारी सुरेन्द्र पाल, आदेश श्रीवास्तव, समीर उहां पहुंचल लोगन में शामिल रहे। ओह घरी के रेल मंत्री श्री लालू यादव त खैर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ही रहले। कार्यक्रम तनी देर से शुरू भइल एह बीच हम अतिथि लोगन से बतियावत रहीं आ अपना पत्रिका खातिर सामग्री जुटावत रहीं। एह घटना के जिक्र हम एह से कर रहल बानीं कि कार्यक्रम के बाद गायक-अभिनेता मनोज तिवारी हमरा के बढ़िया सवाल पूछे खातिर बधाई दिहले रहलन आ ओही कार्यक्रम के बाद लीहल भोजपुरी के नामी अभिनेता कुणाल सिंह के साक्षात्कार अगिला अंक में द संडे इंडियन में छपल रहे।

रउआ सभे के ई इतिहास बतावे के पीछे कुछ खास कारण बा। उद्घाटन के समय चैनल के मालिक पी.के.तिवारी कहले रहलन कि बाकि काम ऊ व्यवसाय खातिर कइले, ई काम अपना भाषा आ संस्कृति खातिर करत बाड़े। एह बात से हमरा के बहुत संतोष मिलल रहे आ हमरा के चैनल से बहुत उम्‍मीद भी रहे। कहे के जरूरत नइखे कि पिछिला अढ़ाई साल में ऊ उम्‍मीद लगातार टूटल बा। इहां एह बात के ध्‍यान राखल जाव कि भोजपुरी चैनल खोलल पी.के.तिवारी के कवनो मजबूरी ना रहे, इहां हम इहो बता दिहीं कि महुआ चैनल से पी.के.तिवारी के खर्चा ना चले। 1970 में मद्रास से आपन कैरियर शुरू करेवाला पी.के.तिवारी के विशेषज्ञ लोग मीडिया बैरन अथवा मीडिया महंत कहेला। 1986 में आइल शशि कपूर के सिनेमा ‘न्यू दिल्ली टाइम्स’ खातिर ओह घरी के राष्ट्रपति श्री ज्ञानी जैल सिंह इनका के नेशनल अवार्ड देले रहन। आ इनकरा कंपनी सेंचुरी कम्यूनिकेशन लि. के नाम बहुते सम्मान के साथ लीहल जाला। ई उहे कंपनी हवे जवन कसौटी, फोकस आ चुनौती जइसन कार्यक्रम बनवले रहे। आज ई एतना बड़का कंपनी बिया कि बड़-बड़ दूसरा कंपनी सब के एयरटाइम सेल्स, ब्रॉडकास्ट ब्रांडिंग आ डिजाइन, टीवी कंटेन्ट प्रोडक्शन, रेडियो ब्रॉडकास्टिंग, स्टूडियो कॉम्प्लेक्स आ डिजिटल न्यूजरूम आदि के सेवा देवेले आ एह एवज में खूब पइसा बटोरेले। ई सब बात हम एह से बता रहल बानीं कि पी.के.तिवारी के सैकड़न गो काम में से एगो ह महुआ भोजपुरी चैनल। जवना के उ कमाए खातिर ना भोजपुरी माई आ संस्कृति के रक्षा खातिर शुरू कइले रहलन।

अब सवाल ई उठत बा कि का सांचहूं में महुआ भोजपुरी संस्कृति के आगे बढ़ा रहल बा? का ऊ भोजपुरी समाज के एकता अउर हक के बात करेला? भोजपुरी भाषा के विकास खातिर महुआ चैनल काम कर रहल बा? अइसने कई गो सवाल बा जवना के संबंध ओह सवाल से जुड़ रहल बा जवन हम एह चैनल के उद्घाटन समारोह में पूछले रहनीं। संस्कृति शब्द में सम के भाव होखेला, एकरा में निर्माण, सृजन आ पवित्रता के भाव होखेला ना कि विभाजन के। एह चैनल प सबेरे प्रसारित होखेवाला रामायण अउर समाचार के छोड़ के कवन अइसन कार्यक्रम बा जवना के भोजपुरी समाज जोड़े में रउआ गौरव के अनुभव करेनीं आ ई त साफ बा कि ई दूनो चैनल के प्राथमिकता नइखे। हर तरह के साधन से संपन्न ई चैनल भोजपुरी भाषा आ साहित्य खातिर कवन उल्लेखनीय काम कइले बा? संगीत के नाम प दू गो राज्य के लइका-लइकिन के विरोधी के रूप में खड़ा कइला के संस्कृति कहल जाई कि विकृति। करोड़न के संख्या में अलग-अलग राज्यन में भटकत भोजपुरिया युवा लोग के ई चैनल कवन रस्ता देखवले बा? बहुत सारा विद्वान आ दिल्ली के सुधी जन लोग हमरा के भोजपुरिया मान के पूछेले कि, "जो महुआ में दिखाया जाता है वही भोजपुरी है?" हमरा समझ में ना आवे कि का जवाब देहीं।

जब पहिला बेर हमरा के महुआ के तरफ से कार्यक्रम में आवे के निमंत्रण मिलल रहे त मन मे अनायासे ई सवाल उठल रहे कि भोजपुरिया समाज में गंगा, अमोला, तुलसी से ले के सतुआ, कबीरा तक जाने केतना प्रतीक बा बाकिर लोगन के महुआ नाम ही काहें सूझल ह। हमरा इलाका (कैमूर जिला) में महुआ खूब होखेला, रात के समय चुअत ओकरा फल के अउर ओकरा रस से बनेवाला पेय पदार्थ के बारे में भी हम खूबे सुनले बानीं जवना से माई-बाबूलोग अपना बचवन के दूर राखल पसंद करेले, बाकिर हम ओह घरी एह बात के टाल देले रहनीं कि नाम में का राखल बा, ई हमरा दिमाग के फितूर ह असल में महुआ के भौतिक पक्ष ना खाली ओकर प्रतीक रूप आई। बाकिर आज करीब अढ़ाई साल बाद महुआ के जवन रूप हम देख रहल बानीं ओकरा बाद हमरा इहे लागत बा कि चैनल वाला लोग खाली महुआ के एकही पक्ष के पकड़ले बा। एह बात में हमार पूरा विश्वास बा कि भोजपुरी समाज में प्रतिभा के कवनो कमी नइखे। बिहार कबो ध्रुपद आ ठुमरी जइसन बेहतर संगीत के गढ़ रहल बा बाकिर आज जइसन गायक-गायिका लोग तथाकथित बड़का मंच से कार्यक्रम देत बाड़े ओकरा के सुनल अक्सर हमरा के सजा लागेला आ हमार पूरा यकीन बा कि ई लोग के दूसरा चैनल प आवेवाला बचवन के कार्यक्रम 'लिटिल चैंपियन' के बचवन के सोझा खड़ा क दीहल जाव त एह लोगन के बकार बंद हो जाई। आज हमरा के भोजपुरी के एगो पुरान गाना इयाद आ रहल बा जवना के 'गाँजा' शब्द के हटा के कहीं त इहे कहब कि - ‘महुआ देखी के बलमुआ अखिया लाल कइले बा’ 

(एनसीईआरटी में सलाहकार का पद पर कार्यरत डॉ. प्रमोद कुमार तिवारी भोजपुरी के युवा कवि, लेखक आ चिंतक हईं। इहाँ से फोन द्वारा 09868097199 पर संपर्क कइल जा सकेला।) 

 


Related news items:

 
Comments (3)
महुआ , महुआ ना महुआ के रस भईल बा
1 Thursday, 23 December 2010 22:33
नवीन भोजपुरिया
प्रमोद जी

महुआ के नकाब / असलियत के देखावे आ बतावे खातिर रउवा के खांच भर बधाई बा । हम कई जगह एह बात के सुनले रहनी की महुआ के कर्ता धर्ता भोजपुरी संस्कृति और संस्कार आ माटी के बचावे खातिर महुआ चैनल खोलले रहलन लेकिन जवन रुप उ अढाई साल मे देखवले बाडे आ राउर एह लेख के पढला के बाद दु गो चीझु साफ साफ लउकत बा

1- पी के तिवारी ना भोजपुरी के संस्कार बचावल चाहत रहलन , ना संस्कार , ना साहित्य ना माटी खातिर कुछ कईल चाहत रहले औरि उँहा के ना ही बिजनेस कईल चाहत बानी । उँहा के एक ही लक्ष्य बा आ उ बा भोजपुरी के सँहार करे के आ वोह मे काफी हद तक सफल हो रहल बाडे

2- भोजपुरी के सँहार करे मे साथ दे रहल बा लोग कुछ भोजपुरिया लोग आ ई औरि शर्मनाक बात बा । एह गद्दारन के कही जगहि ना मिली आ कोर्हिया के मुईहन स ई ।

रउवा के हम बहुत बहुत धन्यवाद दिहल चाहब आ साथ मे भोजपुरिया भाई बहिन चाचा चाची , इया आजी दादा बाबा सब से इहे निहोरा करब की आगे आई सभे ,,, अगर अब आगे ना आईब जा आ आवाज ना उठाईब जा त काल्हु मुह देखावे लायक ना रही जाईब जा ।

जय भोजपुरी
Think Positive
2 Tuesday, 28 December 2010 00:45
Parshuram
Hamaar sawaal ba ki, Mahuaa ke pahale ketana go Bhojpuri channel khulal rahue. Bhojpuri moo gayil rahue, lekin Mahua aur Bhojpuria.com hum parwasi log mein Sanjivani booti ke tarah jaan phookalas. Jab Raj Thakarawa muwawat rahuye Bojpuria log ke, tab PK Tiwari Jaan ke baaji laga ke Mahua channel lunch kailan. Jahan tak Asalilata ke sawal ba, u Mahua channel ke awiskaar na ha. Aau Mahua channel bhi limit cross na karela. Sachhai ei ba ki hamani ke kehu ke safalata pachela na. ehi se Bhojpuri region pichhhadal ba. Jadi Mahua galat ba, ta naya channel kholi log au ome saaf suthara program dekhayee log. Lekin eehan ei hota ki Registaan mein ekego pokhara ba, aur ohu ke sukhaawe ke paryaas hota. Hamara ke yaad ba saayad 15 saal pahale jab Lalua ke raaj rahue tab u World Famous classical dancer Sanjukata Panigrahi ke apmaan kaile rahale. O bera u kaun aslil dance karat rahali. Hamani ke eehan negative polics and negative soch ba, wohi se hamani ke haal ei ba ki 18 carore Population ke beech ekahi go Bhojpuri mein Website ba aur Ekahi Go Bhojpuri mein channel ba. Bottomline is let come out of Crab mentality for which we already are famous for and support those who are trying to do something for the society. If you are disagree then start your own and compete, rather pulling down existing growing plant.
comments
3 Saturday, 23 April 2011 16:32
ARVIND TRIPATHI
main tiwari ji ke bat se sahmat hoon main bhi the oberoi me mahua ke lanching party me tha bipin bahar ji ke sath, lekin jahan tha aslilta ki baat hai to tiwari ji jaisa ki parsuram ji ne kaha mahua channel aslilta ki janani nahi hai. Yeh sahi hai ki parde pe kuch dikhta hai to aisa sab dikhate hain agar nahi dikhate to kya hasra hota sab ko pata hai. lekin bhojpuira.com aur mahua channel ne jitne apni bhasa ko pahchan di hai (sochne ki baat hai) aaj se panch sat sal pahle apne gaon jane pe hi log apne regional bhasa ka use karte the lekin aaj kam se kam aisa to time nahi hai jab chaho internet par bhojpuria.com aur ghar pe mahua chala ke apni bhasa se jur sakte hain. yahan tak ki bacche jo bahar me rahte hain wo bhi apni bhasa ko dekh aur samjhte hai.

yeh mera personal vichar hai. age aap sab log khud hi apne apne area ke mahir log hain. mere hisab se mahua aur bhojpuria.com ko mil kar apne bhasa ka prachar prasar karna chahiye. jai bihar, jai bhojpuri

thanks
click here