कवि परिचय: मूलत: देवरिया जिला (उत्तर प्रदेश) के निवासी अनूप श्रीवास्तव जी फिलहाल नई दिल्ली में बानी आ एगो बडहन मीडिया ग्रुप में कार्यरत बानी। अनूप श्रीवास्तव जी भोजपुरी के एगो युवा कवि हईं, आ इनकर लिखल एक-एक शब्द में भोजपुरी के प्रति वेदना साफ झलकेला।ई कविता हमनी के सहयोगी वेबसाइट जय भोजपुरी डॉट कॉम से लिहल गइल बाटे। अनूप जी के बारे में ज्यादा जानकारी खातिर एहिजा क्लिक करीं। जय भोजपुरी डॉट कॉम भोजपुरिया लोगन के सबसे बडहन सोशल नेटवर्क हवे, जहँवा रउआ खुल के अपना लोगन से बतिया सकेनी, ब्लॉग के जरिये अपना मन के बात सबका से बाँट सकेनी, अउर गंभीर मुद्दा पर बतकही में शरीक हो सकेनी। अपना शुरुआत से 10 महीना का भीतर एह वेबसाइट पर सात हजार से बेसी सदस्य जुड चुकल बाडे।
केहू मस्त, केहू त्रस्त, बाटे केहू बीमार,
कहीं तंगी के टीस, कहीं मंदी के मार,
सभे बा व्यस्त, केहू सुने ना गुहार।
सिसक-सिसक, रोअत बा, माई हमार ।।
काश्मीर होखे, चाहे कन्याकुमारी,
उहे मार-काट, उहे, कालाबाजारी,
माँग सून, गोद सून, अपंग-लाचार।
सिसक-सिसक, रोअत बा, माई हमार ।।
अंग-भंग भइल, धर्म-भाषा के नाव पर,
नून छिड़क आवें नेता, जखम आ घाव पर,
देखि-देखि, हर ओर, भ्रष्ट-आचार ।
सिसक-सिसक, रोअत बा, माई हमार ।।
जाने ना, कहवाँ, केकरी, नीयत में खोट बा,
काम केतनो गीरल, मकसद पइसा आ नोट बा,
चोरी - चकारी, भीख , देहि - व्यापार ।
सिसक - सिसक, रोअत बा, माई हमार ।।
कर्जा के, बोझ तले, मरत, किसान बा ,
सूद-खोरवन के, ईहाँ ,भरत, मकान बा ,
आस, इन्साफ के अब , करल बा बेकार ।
सिसक - सिसक, रोअत बा, माई हमार ।।
लिट्टे - लश्कर, जैश, भा उल्फा आ नक्सल ,
फइलल बा, हर ओर, मुश्किल बा चीन्हल ,
दस गो , दुश्मन, बाड़ेन, त, सौ गद्दार ।
सिसक - सिसक, रोअत बा, माई हमार ।।
देवी-स्वरूप, जहवाँ, पूजल जालीं मुनियाँ,
जन्मे से पहिले, काहें मारत बाटे दुनिया,
लरिकिन के अकाल होई, लइकन के भरमार ।
सिसक - सिसक, रोअत बा, माई हमार ।।
बड़ अधिकारी, चाहे, बिल्डर - व्यापारी ,
चोर - पुलिस, सबका से, बनल बा यारी ,
गलत, केहू होखे, भुगते, गरीबे - लाचार ।
सिसक - सिसक, रोअत बा, माई हमार ।।
गली-गली, गुरू-पंडित, मुल्ला-उलेमा ,
एगो, भगवान जी के, केतना बा, खेमा ,
जोड़े बाला, तूरे खातिर, करत बा, प्रचार ।
सिसक-सिसक, रोअत बा, माई हमार ।।
आ अन्त में,
नवीन जी के प्रेरणा से रचना तैयार बा,
रउरियो सहयोग के, हमरा, इन्जार बा,
चलीं आँसू पोछे , होखे तनिको जो प्यार ।
सिसक-सिसक, रोअत बा, माई हमार ।।



प्रणाम आ जय भोजपुरी
एह कविता में सहज ढंग से , ब्यंग और यथार्थ के चित्रण क देले बानी ..
उम्मीद बा, अईसन औरो रचना पढ़े के मिली ...
पंकज प्रवीण