भोजपुरिया डॉट कॉम पर आज हमनी का एगो अइसन कवि के रचना के रउरा सामने ला रहल बानी जा, जिनकर रचना जबान से पहिले दिल पर असर करेला। भोजपुरी माई के सपूत डा. गोरख प्रसाद 'मस्ताना' के नांव भोजपुरी साहित्य जगत में काफी सम्मान के साथ लीहल जाला। इहाँ का मूल रुप से बेतिया के निवासी बानी, आ अपना साहित्य के माध्यम से भोजपुरी माई के सेवा क रहल बानी, जेकरा खातिर इनका के अनगिनत सम्मान आ अवार्ड भी मिलल बा।
अच्छा बा गाँधी बाबा, रउआ ना जीयत बानीं
इज्जत से आपन गुदरी, सरगे में सीयत बानीं
रहती महान भारत के देख के रोअती
आ लाश आपन, अपना ही कान्ह पे ढोअतीं
देखतीं कि रउरे लोग-उतारत बा राउर पानी
राउर बनावल पाटी सागर से भइल नाली
सुनते ही नाम ओकर सब लोग देलें गाली
जबसे उ करे लगली बईमान के दरबानी
गिरगीट के लजावे से, चढे सूमो अरमदा
भोरे में जनता दल रतियाही बसपा
बा राजघाट झेल रहल, दल बदल तुफानी
इ देश जहाँ अन्धा के नाम नयन सुख
संसद के हाल देखते होखेला बडा दुख
सेवक कहात बाडें, काटेले खूब चानी
अब का बचल बा, आके जे अपने के जीयब
खाये के पडी चारा, अलकतरे के पीयब
पूछब ना तिरंगा से कह दी कुल्ही कहानी।




कथ्य के बारे में मस्ताना जी से निहोरा कईल चाहत बानी कि आधुनिक भारत गाँधी जी के दुरदर्शिता के सुपरिणाम आ उनकरे सपना के भारत हऽ। एह से उनका लगे भारत के कवनो शिकायत पहुँचावल उचित नइखे। वर्तमान सरकार के बात अगर मानल जाव तऽ भारत हर कदम पर मजबूत बा आ छः फीसदी से भी ज्यादा के विकास दर से प्रगति कर रहल बा। अब आउर काऽ चाहीं?
एगो बात आउर कहल चाहब कि गाँधी बाबा कवनो पार्टी ना बनवले रहलन बल्कि राउर इशारा जवन पार्टी के तरफ बा ओकर स्थापना सर ए.ओ.ह्यूम कइले रहलन सन् १९८५ में।