Home Sahitya Kavita गाँधी जी से...

गाँधी जी से...

E-mail Print PDF
share

भोजपुरिया डॉट कॉम पर आज हमनी का एगो अइसन कवि के रचना के रउरा सामने ला रहल बानी जा, जिनकर रचना जबान से पहिले दिल पर असर करेला। भोजपुरी माई के सपूत डा. गोरख प्रसाद 'मस्ताना' के नांव भोजपुरी साहित्य जगत में काफी सम्मान के साथ लीहल जाला। इहाँ का मूल रुप से बेतिया के निवासी बानी, आ अपना साहित्य के माध्यम से भोजपुरी माई के सेवा क रहल बानी, जेकरा खातिर इनका के अनगिनत सम्मान आ अवार्ड भी मिलल बा।

ई रचना डा. गोरख प्रसाद 'मस्ताना' के किताब "जिनगी पहाड हो गईल" से लीहल गइल बा। एह किताब के प्रकाशन नई दिल्ली स्थित इन्द्रप्रस्थ भोजपुरी परिषद द्वारा कइल गइल बा। एकरा बारे में विशेष जानकारी खातिर रउरा एकर महासचिव संतोष कुमार पटेल जी से संपर्क क सकेनी।


अच्छा बा गाँधी बाबा, रउआ ना जीयत बानीं
इज्जत से आपन गुदरी, सरगे में सीयत बानीं

रहती महान भारत के देख के रोअती
आ लाश आपन, अपना ही कान्ह पे ढोअतीं
देखतीं कि रउरे लोग-उतारत बा राउर पानी

राउर बनावल पाटी सागर से भइल नाली
सुनते ही नाम ओकर सब लोग देलें गाली
जबसे उ करे लगली बईमान के दरबानी

गिरगीट के लजावे से, चढे सूमो अरमदा
भोरे में जनता दल रतियाही बसपा
बा राजघाट झेल रहल, दल बदल तुफानी

इ देश जहाँ अन्धा के नाम नयन सुख
संसद के हाल देखते होखेला बडा दुख
सेवक कहात बाडें, काटेले खूब चानी

अब का बचल बा, आके जे अपने के जीयब
खाये के पडी चारा, अलकतरे के पीयब
पूछब ना तिरंगा से कह दी कुल्ही कहानी।
 
Comments (4)
गाँधी बाबा कवनो पार्टी ना बनवले रहलन
1 Wednesday, 23 September 2009 21:53
Rajnandan
कविता अच्छा बा!
कथ्य के बारे में मस्ताना जी से निहोरा कईल चाहत बानी कि आधुनिक भारत गाँधी जी के दुरदर्शिता के सुपरिणाम आ उनकरे सपना के भारत हऽ। एह से उनका लगे भारत के कवनो शिकायत पहुँचावल उचित नइखे। वर्तमान सरकार के बात अगर मानल जाव तऽ भारत हर कदम पर मजबूत बा आ छः फीसदी से भी ज्यादा के विकास दर से प्रगति कर रहल बा। अब आउर काऽ चाहीं?
एगो बात आउर कहल चाहब कि गाँधी बाबा कवनो पार्टी ना बनवले रहलन बल्कि राउर इशारा जवन पार्टी के तरफ बा ओकर स्थापना सर ए.ओ.ह्यूम कइले रहलन सन् १९८५ में।
Kavita bahut sateek ba.
2 Saturday, 03 October 2009 04:11
Mrs. Meera Trivedi
Ham Sanchep men etne kahab. " Kavita sateek ba"
गांधीजी कांग्रेस के अध्‍यक्ष रहलन
3 Monday, 09 November 2009 23:50
Pramod kumar tiwari
कवि के संवेदनशीलता सराहे जोग बा। एगो कमेंट में गांधीजी के कांग्रेस से संबंध के नकारल गइल बा ई सही नइखे। भले हयूम साहब कांग्रेस के स्‍थापना कइले रहले बाकिर गांधीजी ना खाली ओकर सदस्‍य रहले बलुक 1924 में कांग्रेस के अध्‍यक्ष भी रहले अउर बेलगांव अधिवेशन के अध्‍यक्षता कइले रहले। ई अलग बात बा कि आजादी के बाद उ कांग्रेस के भंग करे के सलाह देले रहन।
Kavita ta niman ba
4 Friday, 09 April 2010 23:52
Kumar Abhishek
Kavita ta bada satik likhale bani. Baki tani-mani atishayokti type ke lagata kahi-kahi. Jaise ki party wala baat jawan ba, otna sahi naikhe lagat. Ka kahal jav kul partiye ke uhe haal ba auri Gandhi ji ke dukhi kare khatir e hamni ke prajatantra ke dasha-sthiti hi kafi ba, kavno party vishesh ke bare me kahala ke kavno khas jarurat naikhe bujhat. Aise kavita bahut uttam ba.