पटना। पिछला वित्तीय वर्ष में 16.59 प्रतिशत के आर्थिक वृद्धि के साथ देश के सर्वाधिक तेजी से प्रगति करे वाला राज्य के कतार में आये वाला बिहार में नवंबर 2005 के बाद से औसतन हर दिन एगो एक पुल के निर्माण हो रहल बाटे। बिहार के सड़क निर्माण विभाग के सचिव प्रत्यय अमृत के कहनाम बा कि मुख्यमंत्री पुल निर्माण कार्यक्रम के तहत नवंबर 2005 से अब तक 1,671 नया पुल बनावल जा चुकल बाटे।अमृत एहिजा एगो न्यूज एजेंसी का संगे बातचीत में कहलन की पिछला साढ़े चार साल में 2,100 पुल बनावल गइल बाटे, जेकर रोजाना के औसत डेढ़ पुल के बा। एही तरह पिछला चार दशक में जेतना काम भइल बा, ओतना एह चार साल में ही हासिल कर लिहल गइल बाटे। एकरा परिणामस्वरूप बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड के वार्षिक आय वर्ष 2008-09 के दौरान 858 करोड़ रुपया रहल, जबकि तत्कालीन राबड़ी देवी सरकार में वर्ष 2004-05 में निगम के कुल आय मात्र 42.62 करोड़ रुपया ही रहे।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आधारभूत ढांचा के निर्माण के महत्व के रेखांकित करत अक्सरहां कहेलन कि "हमनी के सरकार खाली नदी पे ही पुल नइखे बनवत बल्कि हमनी का लोगन के एक दूसरा से जोड़ के समाज में भी सेतु के निर्माण कइ रहल बानी।" बिहार में करीब दू दर्जन नदी बाटे जेकरा में अधिकांश नदी के गिनती बड़ नदी में आवेला। गंगा, पुनपुन, सोन, फल्गु, किउल, दुर्गावती अउर कर्मनाशा राज्य के मध्य आ दक्षिणी हिस्सा में तथा कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कमला आ महानंदा उत्तरी बिहार में बाटे।
पटना के बाहरी इलाका जमालपुर के रहे वाला संजय यादव के अनुसार "पिछला साल तक पुनपुन नदी में कोई पुल ना भइला का वजह से गांव से पटना के सिर्फ 20 किलोमीटर के दुरी तय करे में कई घंटा लाग जात रहे अउर ओकरा संगे-संगे तीन किलोमीटर के दुरी पैदल ही चले के पडत रहे, लेकिन अब हालत बदल गइल बा, अउर गाँव के पास ही तीन गो पुल के निर्माण हो चुकल बाटे, जेकरा वजह से गाँव के आस पास के 7 लाख से भी ज्यादा लोगन खातिर ई वरदान बन गइल बाटे।



