Home Samachar Bihar इ दोस्ती कवना काम के...?

इ दोस्ती कवना काम के...?

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पटना। बिहार के सत्ता में फिर से वापसी के ख्वाब सजावत राष्ट्रीय जनता दल के अइसन बुरा दिन आ गइल बा कि अपना रिश्तेदारन के साथ छोडला के बाद अब संसद के राजनैतिक सहयोगी भी ठेंगा देखावल शुरू कर कर देहले बाडन। पिछला लोकसभा चुनाव में एक-दूसरा के जनाधार वाले राज्य में प्रत्याशी ना उतारे पर राजी रह चुकल समाजवादी पार्टी और राजद के समझौता बिहार विधानसभा चुनाव में ना चढ़ी पावल। सपा ऐलान कर चुकल बिया कि उ बिहार में 200 सीट पर आपन उम्मीदवार उतारी। अगर अइसन भइल त पहिले से ही दल के तितिर- बितिर होखला के दंश झेल रहल राजद खातिर एगो बहुते बड़हन  मुसीबत हो सकत बा।

जइसन की मालूम बा कि पिछला साल लोकसभा के चुनाव के समय राजद से पार्टी के नेता लोगन के थोक के भाव में जवन मोहभंग शुरू भइल रहे, पार्टी के ओकर बहुत बड़ कीमत चुकाये के पडल रहे। ओह बेरी लोकसभा में पहुचे वाला सदस्यन के संख्या 22 से घट के 4 पर आ गइल रहे। उ सिलसिला लोकसभा चुनाव के बाद थम गइल अउर कांग्रेस बिहार में जवना तरह के आंतरिक कलह से जूझत रहे, ओह से इ लागत रहे कि शायद राजद के अब अउर बिखराव ना होई। हालांकि लालू यादव लोकसभा चुनाव में मिलल भारी शिकस्त के बाद पार्टी कार्यकर्ता लोगन के दल से जोडले रखे खातिर राज्य में भरपूर दौरा कइलन, लेकिन विधानसभा चुनाव आवते-आवत इ बिखराव फिर से शुरू हो गइल बा।

पूर्व केंद्रीय मंत्री तस्लीमुद्दीन, अखिलेश प्रसाद सिंह अउर खुद लालू के साला सुभाष यादव समेत कई छोट-बड नेता अब फिर से राजद छोड के अन्य पार्टी  खासकर कांग्रेस अउर जद (यू) के ओर जा रहल बा लोग। लेकिन बात इहाँ तक नइखे, जवन लालू दूर के सोच के पिछला लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव का संगे दोस्ती के हाथ बढ़ा के उनका के राजी कर लेहले रहलन कि राजद उत्तर प्रदेश अउर सपा बिहार में प्रत्याशी ना उतार के एक-दूसरा के समर्थन करी। लेकिन मुलायम बिना कवनो लाग लपेट के ऐलान कइलन ह कि सपा बिहार में दो सौ सीट पर आपन उम्मीदवार उतारी। उल्लेखनीय बा कि राजद अउर सपा दूनो दल पिछडा वर्ग, खास कर के यादव अउर मुस्लिम लोगन के वोट पर आपन दावेदारी रखेला।

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