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बिहार के कई जिलों में बाढ का खतरा

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कटरा (मुजफ्फरपुर)। बागमती में आई उफान से दर्जनों गांव जलमग्न हो गया है। शुक्रवार को भी बाढ़ के जलस्तर में एक फीट वृद्धि हुई, जिससे अनेक स्थानों पर बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो गया। गुरुवार की रात तीन तटबंध ध्वस्त हो गये। बाढ़ से उत्पन्न स्थिति का जायजा लेने आधा दर्जन आलाधिकारियों के साथ एक टीम कटरा पहुंचे। जलस्तर में लगातार वृद्धि के साथ ही कटरा प्रखंड का अधिकांश भू-भाग बाढ़ की चपेट में आ गया है। गुरुवार की रात बकुची कृषि फार्म के पास बागमती नदी का तटबंध लगभग 12 फीट में टूट गया। वहीं बरेठा स्थित लखनदेई का तटबंध लगभग 20 फीट में टूट गया। जिससे जल प्लावन की स्थिति पैदा हो गयी। बांध टूटने से मोहनपुर, शहनौली, धोबौली, डुमरी, खंगुरा, पहसौल, बसघट्टा, बकुची आदि गांव के दर्जनों घर में पानी घूस गया। उधर, गंगेया में पश्चिमी तटबंध टूटने से दर्जनों परिवार घर छोड़कर विद्यालय में शरण ले रखे है।

पूर्वी चम्पारण से प्राप्त खबर के अनुसार वहाँ भी लगातार हो रही बारिश से क्षेत्र के कई गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। नदियों के जलस्तर में हो रही वृद्धि से ग्रामीण भयभीत हैं। ग्रामीण पिछले वर्ष की विनाशकारी लीला को भांप कर कांप उठते हैं तो कुछ गांव से पलायन की योजना बना रहे हैं। क्षेत्र में बहने वाली नदियां गंडक,धनौती व लखना में बारिश से जलस्तर में करीब पांच से 6 फीट की वृद्धि हुई है।

दूसरी ओर, रोहतास जिले के अकोढ़ीगोला प्रखंड के उगराबिगहा के पास पश्चिमी मुख्य नहर का तटबंध टूटने से शुक्रवार को सैकड़ों एकड़ धान की फसल जलमग्न हो गई। इससे पहले जुलाई में ही दो बार और तटबंध टूट चुका है। बता दें कि प्रत्येक वर्ष तटबंध मरम्मत व कटाव निरोधक कार्य पर लाखों रुपये खर्च किये जाते हैं। बावजूद इसके मुख्य नहर में वर्षो से कटाव जारी है। मरम्मत की योजना भी बनी तो कुछ जगहों पर मिट्टी भराई कर बरसात तक लिए मामले को टाल दिया जाता है। पश्चिमी नहर पर वर्ष 1991 में डेहरी से अकोढ़ीगोला तक संपर्क पथ का पक्कीकरण किया गया था। किंतु कटाव निरोधक कार्य नहीं होने से पथ भी कटाव की चपेट में आकर जर्जर हो गया है। ग्रामीण राजकिशोर, रमेश, रवींद्र, अजीत कुमार आदि का कहना है कि तटबंध टूटने से उगरह बिगहा, ललकी चवरी, सूपा बिगहा, विशुनबिगहा, शंकरपुर के बधार में पानी फैल रहा है।

सीतामढ़ी जिले के परिहार प्रखंड के कई गांवों में मरहा व हरदी नदी के बाढ़ का पानी घुस गया है। इसके चलते इन गांवों का सम्पर्क प्रखंड व जिला मुख्यालय से भंग हो गया है। प्रखंड के जगदर दलित टोल के 50 घर, रामनयका गांव के 25 घरों, बाया में 30 घर, परसा में 15 घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है। दंडी में एक जगह व भसहा गांव में दो जगहों पर सड़क पर दो फुट पानी बह रहा है। जगदर व रामनयका में सड़क पानी में डूब चुकी है। इन गांवों का सड़क सम्पर्क प्रखंड मुख्यालय से भंग हो चुका है।

वहीं मधुबनी जिले में भी जलग्रहण क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश से नदियों के उफनाने से मधेपुर व फुलपरास एवं सुपौल जिले के मरौना प्रखंडों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनती जा रही है। मरौना प्रखंड के पिपरपांती गांव के साठ घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है। मधेपुर प्रखंड के कई नये गांव भी बाढ़ के चपेट में आ गये हैं। भूतही बलान पश्चिमी तटबंध के 23 किलो मीटर से 24.5 किलो मीटर के बीच भयंकर कटाव लग गया है। कटाव निरोधक कार्य युद्धस्तर पर हो रहा है। बाढ़ के कारण सुड़ियाही, रामनगर, ननपट्टी, परसा, बलुआही टोल आदि गांवों में तबाही मची है। बाढ़ से उत्पन्न कटाव के कारण एन एच 57 में भूतही बलान पुल के एप्रोच में भयंकर कटाव लग गया है। वहां भी कटाव रोधी काम जारी है। घोघरडीहा प्रखंड के किसनीपट्टी गांव के समीप कोसी पश्चिमी तटबंध पर बने स्लूईस गेट से पानी का भयंकर रिसाव हो रहा है। जिसे रोकने का प्रयास चल रहा है। (दैनिक जागरण)

 

 
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