बक्सर। महर्षि विश्वामित्र की पावन धरती एक बार फिर दुनिया को एक पाठ सिखाने के लिए तैयार है, और यह पाठ है आँख बंद कर के न्याय करने का। दोषी भले ही कोई भी हो, या फिर चाहे जितना भी रसुख वाला हो, उसको सजा मिलनी ही चाहिए, और इसी माँग के साथ बक्सर का युवा वर्ग आज बक्सर समाहरणालय के सामने एकजुट होकर रवि कांत दुबे के खिलाफ आवाज उठा रहा है। यहाँ मुख्यमंत्री के नाम एक स्मार-पत्र स्थानीय जिलाधिकारी को दिया गया, जिसमें रवि कांत दुबे के कुकृत्यों पर प्रकाश डालते हुए, उनके खिलाफ अविलंब कार्यवाही करने की माँग की गई है। "भोजपुरी बचाओ मंच" के बैनर तले आयोजित इस एक-दिवसीय धरना को समाज के हर तबके यानि छात्रों, बुद्धिजिवियों, समाजसेवियों, वकीलों, व्यावसायियों और खास कर के महिला लोगों का अपार सहयोग मिल रहा है। धरने पर बैठी भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष श्रीमती माधुरी कुंवर ने कहा कि - "रवि कांत दुबे जैसे लोगों का सामाजिक बहिस्कार होना चाहिए। सरकार को चाहिए को वो यथाशीघ्र दुबे को बर्खास्त करे, और इस मामले की न्यायिक जाँच कराए।"
धरने पर बैठे भाजपा के जिलाध्यक्ष श्री केदारनाथ तिवारी भी इह पहल से अभिभुत दिखे। "आज बक्सर के युवा वर्ग ने आगे आकर इस आन्दोलन की कमान अपने हाथों में ले ली है, और जब युवा वर्ग कुछ ठान लेता है, तो उसके सामने कुछ भी असंभव नहीं रहता। मैं सरकार से माँग करना चाहूँगा कि यथाशीघ्र रवि कांत दुबे को पदमुक्त किया जाए, और इस पूरे मामले की न्यायिक जाँच कराई जाए," श्री तिवारी ने कहा।
मौके पर मौजुद बहुजन समाज पार्टी के जिलाध्यक्ष श्री राम निवाज राजभर ने रवि कांत दुबे जैसे लोगों को तुरंत बर्खास्त कर इस मामले की उच्च-स्तरीय जाँच की माँग की। "भोजपुरी अकादमी के अध्यक्ष पद पर बैठे श्री रवि कांत दुबे के उपर जिस तरह के आरोप लगे हैं, वो काफी गंभीर हैं। इस तरह के गंभीर आरोप वाले किसी व्यक्ति कि इस तरह के पद पर बैठे रहने का कोई हक नहीं है। मैं चाहता हुँ कि बक्सर की जनता की भावना का सम्मान करते हुए रवि कांत दुबे पर अविलंब कार्यवाही की जाए, और उस पद पर किसी योग्य व्यक्ति को बैठाया जाए," श्री राजभर ने भोजपुरिया डॉट कॉम से बताया।
"दुबे नहीं दलाल है, सुशासन पर सवाल है" और "लत्तम-जुत्तम और पिटाई, दुबे की है यही दवाई..." सरीखे नारों के बीच इस धरना में बैठे बक्सर जिला बार एसोशियसन के पूर्व महासचिव श्री शेषनाथ सिंह ने भोजपुरी बचाओ मंच की इस पहल का स्वागत करते हुए इसे एक अभूतपूर्व पहल करार दिया - "मैं पूछना चाहुँगा कि इस पूरे प्रकरण कर राज्य सरकार क्यों मौन है? क्या इस तरह के गंभीर आरोप लगने के बावजुद राज्य सरकार रवि कांत दुबे को बचाना चाह रही है? बक्सर का भोजपुरिया समाज यह चाहता है कि इस पर राज्य सरकार अपना पक्ष स्पष्ट करे।"
इस धरने से दूबे के उस दावे की कलई खुलती नजर आ रही है, जिसमें उन्होंने अपनी छवि साफ होने का दावा किया था, और इन आरोपों को अपने खिलाफ साजिस करार दिया था। इस धरने ने यह भी साबित कर दिया है कि उनकी छवि छात्रों के बीच भी खासी दागदार है, अन्यथा उन्हें रवि कांत दुबे के खिलाफ आन्दोलन की जरुरत ही नहीं पडती।
भोजपुरी बचाओ मंच के अध्यक्ष श्री आनंद सिंह, और सचिव श्री अनुपम आनंद के अनुसार इस धरने में शाम तक सैकडों लोगों के भाग लेने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी बताया कि अगर इस धरना के बावजुद राज्य सरकार नहीं चेती, तो भोजपुरी बचाओ मंच स्थानीय लोगों के सहयोग से बक्सर की सडकों पर उतरने से भी गुरेज नहीं करेगा। इस धरना को सफल बनाने में श्री राम प्रवेश यादव, श्री अमित आनन्द, श्री केशर पासवान, श्री संदीप राम, मो. मुर्तजा, व श्री शैलेन्द्र पाण्डे समेत स्थानीय विधार्थियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।




janta sadko per hai, aur log virodh kar rahe hain, ab r k dubey ke jane ka samay aa chuka hai.
बल्कि हम त कहें कि खाली बक्सर में ही न हर वोह जगहा प, जहा भोजपुरी के आदर कईल जाला, आर. के. दुबे के खिलाफ धरना कईल जाव. अउर बस आर. के. दुबे ही काहे भोजपुरिया समाज में छुपल आर. के. दुबे जईसन लोगन के खिलाफ अइसने धरना करे के चाहि.
हम तारीफ करल चाहेम बक्सर के जनता के कि ऊ लोग समाज के गंदगी के खिलाफ आवज उठावत बालो.
जय भोजपुरी