पिछला साल करीब 100 गो भोजपुरी फिल्म बनल रहे, आ सच्चाई इहे बा कि ओह में से शायद 5% भी आपन लागत निकाले में सफल ना भइल। ओह में से कई गो त अभियो बक्सा में बाडी सन, एगो अदद डिस्ट्रीब्युटर के तलाश में। अगर रउआ के रोज नया-नया भोजपुरी फिल्मन के हिट होखे के खबर पढे के आदत बा, त शायद ई रिपोर्ट राउर आँख खोल दी। त का एकर मतलब ई भइल कि भोजपुरी सिनेमा के ई सुनहरा दौर खतम हो चुकल बाटे? हमनी का एह बारे में कई गो भोजपुरी फिल्मकार, अभिनेता, समीक्षक अउर दर्शकन से बात कइनी जा, अउर भोजपुरी फिल्मन के एह हालत के पिछे जवन कारण निकलल, ऊ केहु के भी झकझोरे खातिर काफी बा।
समस्या #1 : कहानी
हमनी का जेतना लोगन से भी बात कइनी, ऊ लोग एक बात पर सहमत रहे कि भोजपुरी फिल्मन में माटी से जुडल मौलिक कहानी के अभाव बा। भोजपुरी के बहुत ही समृद्ध साहित्य बा, आ हर महीना सैकडन गो कहानी लिखल जात बाडी सन, लेकिन फिल्मकार ओकर इस्तेमाल ना कइल चाहेले सन। ज्यादातर फिल्मन के कहानी पुरान हिन्दी फिल्मन से कॉपी कइल जा रहल बाटे, जवन कि बहुत बडहन गलती हवे। हमनी के समझे के चाहीं कि हिन्दी अउर भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के दर्शक एके बाडे, त अगर केहु के पुरा कहानी पहिलहीं से पता बा, त फेर ऊ दोबारा ओह फिल्म के देखे काहें जाई?
समस्या #2 : लोकेशन
"अगर हम लंदन ब्रिज देखल चाह तानी, त हम भोजपुरी ना, बल्कि हॉलीवुड के फिल्म देखल पसंद करब, काहे कि ऊ लोग बेहतर तकनीक के इस्तेमाल करेला," एगो चर्चित गायक भोजपुरिया डॉट कॉम के कहलन। वइसे भी अगर बॉक्स-ऑफिस रेकार्ड देखल जाव त जवन भी भोजपुरी फिल्म के शूटिंग देश से बाहर भइल बा, ऊ दर्शकन के खींचे में नाकामयाब रहल बाडी सन। कारण बहुत ही साधारण बा - भोजपुरिया दर्शकन के ओह फिल्मन में अपना माटी के महक, अउर अपना संस्कारन के झलक ना मिलेला। लेकिन तबो फिल्मकार लोगन के एतना साधारण सा बात नइखे बुझात।
समस्या #3 : संगीत
"भोजपुरी फिल्मन के एह तिसरा दौर के बारे में मानल जाला कि एह में गायकन के बोलबाला बा। इंडस्ट्री के सबसे बढिया मानल जाये वाला चार गो अभिनेता में से तीन जाना के गायक के तौर पर जानल जाला। लेकिन तबो हमरा आज ले एको अइसन गीत ना मिलल, जवन कि दर्शकन के याद होखे। एकर तुलना जब हम 60 और 80 के दशक में बनल भोजपुरी फिल्मन से करेनी, त पता चलेला कि अबो लाखों लोग ओह गीतन के पसंद करेलन," हमनी के सहयोगी वेबसाइट जय भोजपुरी डॉट कॉम पर एगो सर्वे में ई बात निकलल।
सच्चाई त इहे बा कि ज्यादातर फिल्मकारन में वास्तविक भोजपुरी संगीत के ना त समझ बा, आ नाही समझे के इच्छा बा। ऊ लोग एगो संगीतकार से गाना रेकार्ड करे के कह देवेला, जेकि 2-3 गो रोमांटिक अउर 2-3 गो आइटम सांग मिला के दे देवेला, भले ही ऊ फिल्म के कहानी से मेल ना करत होखे। ओह लोगन के मकसद खाली अपना संगीत के बिकाऊ बनावल होला, अउर कुछ ना। कुछ लोग कहल की नयापन ले आये के कोशिश होता, लेकिन ओह नयापन जगह मिलल अश्लीलता से भोजपुरी संगीत के वास्तविक मर्म तोपा-ढांपा गइल।
समस्या #4 : अश्लीलता
भोजपुरी एलबम का संगे-संगे भोजपुरी फिल्मन में आइटम सांग के नांव पर अश्लीलता के जवन तडका लगावल जा रहल बाटे, ऊ फिल्म इंडस्ट्री का संगे-संगे समाज के भी अंदर-ही-अंदर खोखला कइ रहल बाटे। आइटम सांग के शब्द एतना अश्लील होले सन कि का कहल जाव, अउर ओकर विडियो में आइटम गर्ल के पहनावा आ भाव-भंगिमा देख के शायद हॉलीवुड के कवनो एडल्ट फिल्म में काम करेवाली अभिनेत्री भी शरमा जाई। काल्ह पटना में एगो फिल्म के प्रचार के दौरान खुलेआम 'किस' करे के जवन हथकंडा अपनावल गइल, ऊ एह इंडस्ट्री के गिरत स्तर के सूचक हवे। कहल जाला कि फिल्म समाज के आइना होला, अउर खुलेआम अइसन बेहुदा हरकत करे वाला लोग समाज के कवन राह देखा रहल बाटे, ऊ केहु भी समझ सकेला। अगर अश्लीलता कवनो फिल्म के सफलता के मापदंड रहित, त शायद बी और सी ग्रेड के फिल्म भी करोडन के बिजनेस करित।
समस्या #5 : मीडिया
भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के एह हालत खातिर मीडिया भी कम जिम्मेदार नइखे। नवहा निर्माता के दिग्भमित करे खातिर फिल्म के प्रचारकन के माध्यम से सुपर फ्लॉप फिल्मन के भी सुपरहिट के खबर बना के मुंबई अउर पटना से प्रकाशित ट्रेड पत्रिकन में छपवावल जाला। जेकरा परिणाम स्वरुप नया-नया लोग एह इंडस्ट्री के ग्लैमर में फंस के आपन सब कुछ लूटा देवेला। मीडिया के लोकतंत्र के चौथा स्तम्भ मानल जाला, लेकिन अपना कर्तव्य के भुला चुकल एह मीडियाकर्मी आ पीआरओ भाई लोग के जोकर के सुपरमैन आ सुपरमैन के जोकर बनावे में तनिको हाथ ना काँपेला।
समस्या #6 : बजट
कबो सोचले बानी कि ससुरा बडा पइसावाला, पंडितजी बताई ना बियाह कब होई अउर निरहुआ रिक्सावाला में का समानता बा? सबसे पहिला बात त ई कि ई मनोज तिवारी, रवि किशन अउर दिनेशलाल यादव निरहुआ के कैरियर के सबसे बड फिल्म बाडी सन, अउर दूसर बात ई कि ई सब कम बजट के फिल्म रहली सन। केहु माने या ना माने, लेकिन भोजपुरी फिल्मन के फ्लॉप भइला में ओकर बढत बजट के भूमिका से इंकार नइखे कइल जा सकत। मतलब बहुत साफ बा, अगर रउआ के आपन फिल्म के कुछ कमाये के बा, त कोशिश करीं कि ओकर बजट कम रहो। "मुन्नीबाई नौटंकीवाली" नियन फिल्मन के कामयाबी एह सिद्धांत के प्रामाणिकता एक बेर फेर साबित कइले बाटे।
भोजपुरी के राष्ट्रीय स्तर पर वर्चस्व के बावजुद सच्चाई इहे बा कि ज्यादातर भोजपुरी फिल्म खाली बिहार अउर मुंबई में ही रिलीज हो पायेली सन। 1 करोड से ज्यादा बजट वाली फिल्मन के लागत खाली बिहार से निकालल ओतना आसान नइखे। लेकिन कुछ लोग बा जे अपना फिल्मन के उत्तर प्रदेश, झारखंड, पंजाब अउर अन्य जगहन पर भी रिलीज कराये में सक्षम होला, आ ओह लोगन के फिल्मन के सफल होखे के उम्मेद भी ओतने बढ जाला।
समस्या #7 : वितरक
"हाँ, भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में सबसे बडहन समस्या फिल्म के वितरण के बा। हमार फिल्म रिलीज खातिर तैयार बाटे, लेकिन ओकर केहु खरीददार नइखे," अपना नांव ना छपला के शर्त पर एगो निर्माता कहलन। ऊ इहो कहलन कि अगर केहु राउर फिल्म के खरीदो लेता, तबो रउआ निश्चिंत नइखी बइठ सकत। एहिजा वितरक लोग अपना शर्त पर राउर फिल्म लेवेला, आ ज्यादातर समय नुकसान रउये के उठाये के पडेला।
"ऊ लोग राउर फिल्म के गैर-भोजपुरिया क्षेत्र (जइसे दरभंगा) में खाली इहे साबित करे खातिर पहिला हफ्ता रिलीज कइ देला, कि राउर फिल्म फ्लॉप हो गइल। रउये बताईं कि का रउआ गैर-भोजपुरिया दर्शक से कवनो शो 'हाउसफुल' करे के उम्मीद कर सकेनी? पहिला बेर फिल्म बना रहल ज्यादातर निर्माता एह 'ट्रिक' से अनजान रहेला लोग, अउर ऊ लोग मान लेवेला कि उनकर फिल्म फ्लॉप हो गइल।" ऊ आगे कहलन। एह सब के बावजुद कई बेर अइसन भइल बा, जब बहुत बडहन हिट फिल्म के निर्माता के ओकरा फिल्म द्वारा कइल गइल कमाई के 30 फीसदी भी नइखे मिल पावल।
"अगर रउरा डिस्ट्रीब्यूटर नइखी, त रउआ एहिजा ना कमा सकेनी। कई बेर अइसन होला जब राउर फिल्म त सुपरहिट हो जाले, लेकिन वितरक रउआ के राउर हिस्सा देवे से इंकार देवेले सन। कई बेर त रउआ के ई पता भी ना रहेला कि राउर फिल्म अभियो कवनो सिनेमा हॉल में चल रहल बाटे, काहें कि वितकरन के कहला के अनुसार रउआ पहिला हफ्ता ही ओकरा के फ्लॉप मान के वापस मुंबई आ चुकल बानी," एगो प्रसिद्ध फिल्म निर्माता कहलन। ओहिजे दोसरा ओर, अगर रउआ वितरक हईं, त रउआ एगो साधारण फिल्म बना के भी सफलतापूर्वक पइसा कमा सकेनी, शायद इहे वजह बा कि इंडस्ट्री के सबसे बडहन माने जाये वाला कुछ निर्माता लोग वितरक भी हवन। ऊ लोग अगर एगो औसत दर्जा फिल्म भी बनायेला, त ओह लोगन का लगे डिस्ट्रीब्युशन चैनल होला, आपन लागत निकाले खातिर, लेकिन बाकी निर्माता लोग का लगे अइसन कुछ ना होला। एह वितरकन के कार्यप्रणाली आज भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री का लगे सबसे बडहन चुनौती बा।
हर दूसरा महीना फिल्मकार लोगन के बैठक होला, जवना में इंडस्ट्री के भविष्य पर चर्चा होला। कई गो नया निर्माता अइलन, अउर आपन पहिला फिल्म में ही एह वितरकन के हाथों सब कुछ लुटा गइलन, लेकिन एतना बड कलयुगी सच जनला के बादो कवनो निर्माता, निर्देशक, अभिनेता या टेक्निशियन के ई हिम्मत ना पडल कि ऊ वितरक से कवनो सवाल तक कर सको। आखिर बिलार के गला में घंटी बाँधी त के...? फिल्म हिट होखे या फ्लॉप, वितरक लोग हमेशा फायदा में रहेला। बिहार के प्रमुख शहरन में हमनी के द्वारा कइल गइल एगो सर्वे में ई बात खुल के सामने आइल कि कुछ लोग अबो फिल्म देखे आ रहल बाटे, जवना से कुछ ना कुछ कमाई त आजो होते बा। लेकिन एह पूरा प्रकरण में वितरक लोग के भूमिका संदिग्ध बा। वितरक लोग के रवैया का चलते ही कई गो अच्छा निर्माता लोग एक फिल्म के बाद दोसर फिल्म बनाये के हिम्मत नइखे कर पावत, जवना से नुकसान इंडस्ट्री के ही हो रहल बाटे। भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के सुखद भविष्य खातिर ई जरुरी बा कि एकर एगो आपन पारदर्शी वितरण प्रणाली होखो, जवन सुचारु ढंग से फिल्मन के वितरण करो, अउर ईमानदारी के साथ फिल्मकारन के आगे आके फिल्म बनाये खातिर प्रोत्साहित करो।
भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में पहिले जहाँ हर बडहन कलाकार के 2-3 हफ्ता में एगो फिल्म जरुर रिलीज हो जात रहे, ओहिजे अब कई-कई महीना पर एगो फिल्म नइखे आवत। एह से साफ पता चलता कि भोजपुरिया फिल्म इंडस्ट्री के ई दौर समाप्ति के कगार पर बाटे। दर्शक भी एह इंडस्ट्री के कार्यकलाप से खुश नइखन, जेकरा वजह से ज्यादातर फिल्म बॉक्स-ऑफिस पर मुँह के बल गिर रहल बाडी सन। वइसे ई अलग बात बा कि फिल्म के प्रचारक लोग फिल्म रिलीज होखे से पहिलहीं ओकर के सुपरहिट घोषित कइ देवेला। एह में एगो आश्चर्यजनक बात इहो बा कि निर्माता लोग हर फिल्म के रिलीज भइला के बाद ओकर सफलता के जश्न जरुर मनावेला, भले ही ऊ फिल्म तिसरके दिने सिनेमा हॉल से उतर चुकल होखे। एह पूरा प्रकरण में वितरक लोग का संगे-संगे ऊ निर्माता लोग भी कम दोषी नइखे, जे फिल्म रिलीज के दुसरके दिने मुंबई में ओकरा के सुपरहिट के भव्य पार्टी कर के नवागंतुक निर्मातन के एगो छ्द्म-छलावा दे जाला लोग। चूंकि फिल्म मुँबई में बनेला, आ रिलीज पटना में होला, त ओहिजा लोग एह कुल्ह चीजन पर विश्वास भी कर लेवेला, आ एकरा संगे तैयार हो जाला एगो अउर निर्दोष निर्माता, एह इंडस्ट्री में आपन सब-कुछ गँवाये खातिर। कुल मिला के कहल जा सकेला कि भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के अभी बहुत कुछ सिखे के जरुरत बा, तबे ऊ खुद भी कमा पाई, अउर समाज के भी राह देखा पाई।



का कारण बा की भोजपुरी मे अश्लीलता परोसल जात बा ?
का कारण बा की आजो भोजपुरी सिनेमा कबो मल्टीपलैक्स मे नईखे जा पावत ?
का कारण बा की लोगो कुछुवो करत बा भोजपुरी सिनेमा मे पईसा कमाये खातिर ?
लेकिन ई लेख पढला के बाद सब चीज साफ साफ लउके लागल , हकीकत के बटोर के एक जगह कई दिहल गईल बा एह लेख मे । पर्दा के पीछे , पर्दा पे आ पर्दा के बहरी जवन जवन घृणित , छुतिहर काम ई लोग कई रहल बा उ केहु के मुडि गाडे खातिर काफी बा ।
रउवा सही कहनी की सिनेमा समाज के आईना होला , त का हमनी के समाज अईसने बा ?
राजेन्द्र बाबु जब शाहाबादी के भोजपुरी मे फिलिम बनावे के कहलन त ओकरा कपीछे जवन मकसद रहे वोह केअ ई लोग भुला गईल बा ?
का ई मान के चलल जाउ की एह लोगन के भीतर तनकियो लाज शरम नईखे , का ई मान के चल जाउ की एह लोगन के आपन भी कवनो इज्जत नईखे ?
का अईसने होला भोजपुरी आ भोजपुरिया लोग ?
बहुत सारा अईसन जरत सवाल बा जवना के एक ना एक दिन भोजपुरिया समाज पुछी आ वोह दिन कवनो जाना के लुकाये के जगहि ना मिली ।
बहुत बहुत धन्यवाद एह लेख खातिर , एह लेख से ढेर लोगन के आंखि खुल जाई जे तिलिस्म मे जियत बा ।
बधाई के पात्र बानी सभे एह सच्चाई के सामने ले आवे खातिर ।
धन्यवाद आ जय भोजपुरी
कवनो समाज के निर्माण में आज सिनेमा के बहुत बड़ योगदान बा, काहे कि युवा पीढ़ी टीवी, नेट आ सिनेमा हाल में औसतन रोज 3-4 घंटा सिनेमा के देवेला। भोजपुरी इलाका के लोग के भावना के दोहन कइसे करे के चाही ई हिंदी फिल्मकार त जानत बाड़े बाकिर भोजपुरिया निर्माता अभी एह से अनजान बाड़े। ताराचंद बडजात्या के राजश्री जइसन कंपनी 'नदिया के पार' बनवलस। आज हिन्दिए नाहीं डब कइल दक्षिण भारतीय सिनेमा में भी भोजपुरी भाषा बोलेवाला चरित्र लउकत बाड़े स। 'गंगाजल' आ 'हम ललन बोल रहे हैं' जइसन सिनेमा पूरा तरह से भोजपुरी माटी आ ओकरा संवेदना के बदौलत कमाई कर रहल बाड़ी स बाकिर भोजपुरी फिल्म निर्माता अबहीं ओइसहीं चिहाइल आ भकुआइल हालीवुड आ बालीवुड के सिनेमा के ओर देख रहल बाड़े जइसे कवनो गांव के लइका शहर के यूनिवर्सिटी में जाके कवनो सेठ के लइका के नकल करे लागेला। एगो जमाना रहे जब 'कहे के त सभे केहु आपन आपन कहावे वाला के बा' जइसन दार्शनिकता से भरल गाना सुने के मिलत रहे आ मोती बीए जइसन लोग से गाना लिखवावल जात रहे बाकिर आज जवन बोअल जा रहल बा उहे फसल काटे के मिल रहल बा, अगर अइसन ना होखत त उ अचरजकारी होखत। ई भोजपुरिया दर्शकन के समझदारी के परिणाम आ प्रमाण बा।
खैर, एह पूरा प्रक्रिया में मीडिया बड़ भूमिका निभा सकत बिया, छोटी गो इंटस्ट्री बिया आ सब केहू एक-दूसरा से जुड़ल बा बस जरूरत बा कि उ लोग के बिना लोभ-लाभ आ व्यवहार खराब भइला के भय के आंख में अंगुरी डाल के सच्चाई देखावल जाव। आई सभे कुछ दिन खातिर स्टार लोगन के साथे संबंध के किनारे राख के भोजपुरी के हित प विचार कइल जाव। सिनेमा खाली मनोरंजने ना करे ई एगो अइसन उस्तरा ह कि बानर के हाथे लग जाए त अपसंस्कृति आ अश्लीलता के माध्यम से समाज के बर्बाद भी कर सकेला। उमेद बा रउआ लोगन के साथ मिली आ एह जरूरी मुद्दा प बहस क के एकर आवाज एकरा कर्ता-धर्ता लोगन तक पहुंचावल जाई।
आमीन
एह ओर हमनी के ध्यान आकृष्ट कइला खातिर धन्यवाद। जय भोजपुरी ।
bhojuri film me sabse badka kharabi ba ki actress hokho chahe item girl u log ke kapda etna chot ba ki ago family sange baith koi filn naikhe dekhal ja sakat
gana sab ke kauno arth naikhe
kahani duplikate kail gail bate
bhojpuri mati ke kauno khushbu naikhe
khali faltu bat jod ke gana banawl jata
i sab samasyake dekhate hue hamni ago bhojpuri sociaty ke aadmi hola ke bawjud bhi bhojpuri film na dekh saktani san
bhojpuri film ke aisan halt ba ki bhula ki kauno adult film dekhal jata
ham ta ehe kahab ki ,,,,,,,,,,,,,,esan filam ke band hi kar dihal jaye ,,,,lekin ,,,,,,,,sabse badhan dikkat ,,,,,,,,,ta e baki ,,kionwo ,,,,,,avi aisan board naekhe ki javan bhojpuri ke filam par kuch contoral kar sakela ,,,,,,,,,
agar esan kiowno board ban jaye ta badiya rahi ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
To earn money in shor way, some of peoples intrested to make bhojpuri films, in which they are failed to depict original bhopuri culture. The story they choose totally avoidable and not acceptable, because of its bad theme of sense, it expose very bad picture of bhopuri samaj to outer ithinic culture. Those who doesn't belong to bhojpuri culture they think really bad when looking the films, after they ask? that this happend in bhojpuri culture.
Some Bhojpuri films are totally anti of its culture. Even charaters are choosen of bhojpuri, so the actor & actress other then bhojpuri, then cann't speake proper language as well. it give very bad meaning & sense. I am sure if this will not stopped soon, it will effect our generation also in the bad sense. Once again everybody will feel shame of thingking as being bhojpria.
So, stope allowing actor & actress other then bhojpuria, then don't know the sens of language to they cann't give the correct expression. It always looks bad exposed.
Hopfully it will be considered. And save bhojpuria as whole.
Thanks,
Vinod Kumar
Muscat International Airport, Oman
Mobile: +968 92212647