दू हफ्ता पहिले भोजपुरी फिल्म निर्माता सुधाकर पाण्डेय जी के एगो नगरपालिका अस्पताल में दु:खद निधन हो गइल। स्व. सुधाकर पाण्डेय जी के भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में बडा सम्मान रहे आ लगभग सबका से अच्छा संबंध रहे। सभे जानत बा कि नया- नया गायकन के फिल्मी कलाकार के रुप में सुधाकर जी मौका देत रहस। उनका एही प्रतिभा खोजी प्रवृति के नतीजा हवे मनोज तिवारी आ दिनेशलाल यादव निरहुआ, जवन कि आज इंडस्ट्री में स्थापित कलाकार बा लोग।सुधाकर जी के स्वर्गवास के खबर जंगल के आग के तरह सगरो तुरंत पसर गइल। जेही सुनल ओकर करेजा धक्क से कर के रह गइल। हलांकि उनकर तबियत खराब चलत बा, एह बात के जानकारी पहिलहीं से सभका रहे। लीवर के बेमारी आ उनकर लापरवाही, साथ में उचित इलाज खातिर पइसा के तंगी उनुका आकस्मिक मउवत के कारन बन गइल।
पिछला एक साल से ऊ काफी डिप्रेशन में चलत रहस। “रंग दे बसंती चोला” उनुकर आखिरी फिलिम रहे, एही फिलिम में उनुका आर्थिक रुप से लाखों के नुकसान भइल। एह फिल्म के फायनेंसर रहस श्याम बहादुर सिंह, जवन कि आऊर भी कई गो फिल्मन के फायनांस कइले बाडन। सुधाकर जी पर दबाव बढे लागल, बाकी सार्वजनिक रुप से कबो ऊ एह तकलीफ के जाहिर ना होखे दीहलन। बडा मजाकिया आ शायराना अंदाज के आदिमी रहस। अगर पइसा होखे त केहू के मदद करे में ऊ कबो पीछे ना हटलन। तंगी के दौरान भी फेरु ऊ नया गायकन आ कलाकारन (गुड्डू रंगीला आदि) के लेके जल्दिये एगो आऊर फिलिम के मुहुर्त करे वाला रहस बाकिर दुर्भाग्यवश मुहुर्त के तारीख से दस दिन पहिले उनका अस्पताल में भर्ती होखे के पडल आ मुहुर्त के ठीक दू दिन पहिले नश्वर शरीर छोड के उनुकर आत्मा हमेशा खातिर परमात्मा में मिल गइल।
बिहान भईले एगो अखबार में खबर छपल कि मनोज तिवारी उनुका पार्थिव शरीर के साथे मुंबई से सुल्तानपुर उनुका गांवे गइलन। बाद में पता चलल कि मनोज तिवारी अस्पताल में देखे खातिर जरुर गइल रहस बाकिर तब तक देहावसान ना भइल रहे। ओकरा बाद ऊ भोरे के फ्लाइट से बनारस अपना निजी काम से चल गईलन। न्यूज वालन के लागल कि मनोज तिवारी साथ ही गइल होइहें आ बिना तहकीकात कइले ई खबर छप गइल।
खैर, अबहीं कुछ लोग एह सदमा से उबर भी ना पावल रहे, तब ले कुछ लोग के तुरंत उनकर शोक सभा राखे के बेचैनी हो गइल। सुधाकर पाण्डेय एतना बड कद के आदिमी त जरुर रहस कि इंडस्ट्री उनका याद में एगो बडा शोक समारोह करीत। खैर, बिहाने भईला मसहूर निर्माता आलोक सिंह के मैसेज कुछ लोग के मोबाइल पर आवे लागल कि अगिला दिने चार बंगला के “सिद्धार्थ बैंक्वेट हॉल” में शोक सभा के आयोजन बा। ई हॉल भोजपुरी फिल्म निर्माता आ फाइनेंसर किशन खदरिया के हवे, जवन कि "भोजपुरी सिटी" नाम के पत्रिका भी निकालेलन।
अगिला दिन बारह बजे से इंडस्ट्री के तमाम हस्तियन के जुटान शुरु हो गइल। घंटा भर के भीतर करीब सौ लोग आ चुकल रहे। एह में कुणाल सिंह, श्याम बहादुर सिंह, सुनील बूबना, अभय सिन्हा, आलोक सिंह, असलम शेख, रानी चटर्जी, बिपिन बहार, पंकज केसरी, प्रवेशलाल यादव, अशोक कुमार दीप, बबलू सोनी, शशिकांत सिंह, उदय भगत (पत्रकार), पाखी हेगडे, कुणाल बैकुंठ सिंह, दुर्गा प्रसाद, विनोद गुप्ता, अशोक मेहता आ टी-सीरिज के अजय कपूर आदि मुख्य रुप से उपस्थित रहे लोग। बाद में अपना व्यस्त शूटिंग से समय निकाल के अभिनेता रवि किशन भी देर से ही सही, पर अईलन।
सभे बारी- बारी से स्व. सुधाकर पाण्डेय जी के पुष्प अर्पित कर के उनका आत्मा के शांति खातिर दुआ मंगलस। बडा शोकाकुल माहौल रहे। बडा मुश्किल से कोई माइक लेके दू शब्द बोल पावल। मनोज टाईगर कहलन कि अभिये निरहुआ के फोन आइल रहल ह, ऊ दू दिन से सुधाकर जी के पैतृक गांव में ही बाडन, आ अभी 3-4 दिन आऊर रहिहन उनका परिवार के साथे – एतना कह के टाईगर सिसके लगलन आ माइक रख दिहलन। एतना सुनते सुधाकर जी के एगो रिश्तेदार तुरंत गांवे फोन कर के पता कइलस त मालुम भइल कि टाइगर के कुल्ह बात झुठ ह। निरहुआ हैदराबाद से खबर सुनते सुल्तानपुर जरुर गइल रहस, बाकिर ओही दिने वापस लवट गइल रहस।
खैर, 2-3 घंटा के बाद हॉल लगभग खाली हो गइल। सिर्फ बांच गइले 5-7 गो आदिमी। विश्वस्त सूत्र से मिलल खबर पर अगर यकीन कइल जाव त एकरा बाद के घटनाक्रम जनला के बाद रउरा फिल्म इंडस्ट्री के लोगन से घृणा हो जाई। असल में हॉल के किराया 22,000/- रुपया रहे, जवन कि आलोक सिंह अभय सिन्हा, सुनील बूबना वगैरह से बतिया के चन्दा वसूल के देबे के प्लान कइले रहस। बाकिर ऐन मौका पर सुनील बूबना पलट गइलन, आ पइसा बिना दीहले पहिलहीं खिसक लिहले। आलोक सिंह अपना ओर से पाँच हजार दिहले, आ अभय सिन्हा का ओर से भी पाँच हजार के सहयोग मिलल, एह तरे बाकी रकम के इंतजाम खातिर आलोक सिंह बडा बुरा फंस गइल रहन। बाद में कुछ पइसा अशोक कुमार दीप आ मुकेश पाण्डेय से लियाइल। ओकरा बादो पाँच हजार घटत रहे त रवि किशन किहां से मंगावल गइल। एतना छीछालेदर के बाद तीन गो सवाल अईसन उठता कि अगर इंडस्ट्री के लोग में शरम होई, त बरिसन तक ई सवाल हथौडा नियन लागत रही।
1. मनोज तिवारी आ निरहुआ जवन कि सुधाकर पाण्डेय के देन हवे लोग, एह लोगन के अनुपस्थिति में एतना कवन जरुरी हो गइल रहे कि आलोक सिंह शोक-समारोह खातिर एके दिन में बेचैन हो गइलन?
2. आलोक सिंह, अभय सिन्हा, सुनील बूबना, विनोद गुप्ता आ एक से एक बड हस्ती उहाँ रहे जेकि हॉल के किराया सुधाकर जी के नाम पर अकेले भर दीहीत, बाकिर अइसन ना भइल? अगर आलोक सिंह के समर्थ ना रहे, त एह आयोजन खातिर एतना जल्दबाजी ना करे के चाहत रहे।
3. किशन खदरिया भोजपुरी इंडस्ट्री से लाखों रुपिया कमइले होईहन अपना पत्रिका में विज्ञापन के द्वारा। अपना के भोजपुरी के शुभचिंतक कहेवाला का भोजपुरी के एगो सम्मानित निर्माता के शोक- समारोह खातिर दू घंटा खातिर हॉल के किराया माफ ना कर सकत रहस? चाहे कम ना कर सकत रहस?
सारा घटनाक्रम के पीछे जवन भी सोच होखे, बाकिर एह तरह के गतिविधि से उनुकर आत्मा अशांते भइल होई, शांत ना। एह मामला में कुछ लोगन के अनावश्यक आ आपत्तिजनक बयान भी आइल, जवना से पाण्डेय परिवार दुखी बा। एक सितम्बर के सुधाकर जी के तेरही भी संपन्न हो गइल। सगा- संबंधियन के अलावे बनारस, गोरखपुर आ मुंबई से भी लोग पहुँचल। अभी तक मिलल सूचना के अनुसार मनोज तिवारी, प्रवेशलाल यादव, बनारस से मुर्तजा जाफरी, लखनऊ से भोजपुरी समाज के प्रभुनाथ राय आ कई गो आउर लोग उनका पैतृक निवास पर पहँचल रहे।
(स्व. सुधाकर पाण्डेय के पारिवारिक सूत्रन से बातचीत पर आधारित)


