पिछला हफ्ता लखनऊ के कुछ अखबारन में "विश्व भोजपुरी दिवस" मनाये के एगो खबर छपल रहे, ओह खबर के पढला के बाद लागल कि आखिर ई सब का हो रहल बा? 2-4 लोग मिल के एगो जेबी संस्था बनावता, आ ओकरा के प्रचारित करे खातिर एगो दोसरा विश्व-स्तरीय संस्था (?) के महासचिव के बोला के ओहिजा घोषणा करा देता, एह उम्मीद के साथ कि अब सारा भोजपुरिया समाज खातिर एकरा के मानल एगो मजबूरी हवे।
ओह से ज्यादा आश्चर्य के बात त ई बा कि ऊ विश्व-स्तरीय संस्था (विश्व भोजपुरी सम्मेलन) भी ओकरा घोषणा कइला का पहिले कवनो बैठक करे के जरुरत नइखे समझत, बल्कि एक आदमी आगे आके बहुत ही गैर- जिम्मेदाराना अंदाज में एह निर्णय के लोगन पर थोपे के कोशिस क रहल बाटे। जब एकरा बारे में हम एगो साहित्यकार से जिक्र कइनी त उनुकर जबाब रहे – “भोजपुरी के आज ले मान्यता ना मिलला का पीछे एही तरह के लोग जिम्मेदार बा। अगर रउरा कवनो भोजपुरी के संस्था के नाम उठा के देखीं, त ज्यादातर विश्व से शुरु होके अंतर्राष्ट्रीय पर खतम होले। आ विश्व भोजपुरी सम्मेलन एह में से केतना संस्था मनावेली सन, ई केहू ना बता पाई। बिना सोचले- समझले एह तरह के काम करे वाला लोग भोजपुरी भाषा के विकास में सबसे बड बाधा हवे।“
एह मामला में तरह- तरह के दावा के बीच में एक बात साफ- साफ निकल के सामने आ रहल बा। एह तरह के कवनो घोषणा कइला का पहिले भोजपुरी आन्दोलन से जुडल हर संस्था के प्रतिनिधियन के एगो बैठक बोलाये के चाहत रहे। आखिर ई चन्द मुठ्ठी भर लोग के भोजपुरिया समाज के बारे में एतना बड फैसला लेवे के अधिकार के देहल? का चार आदमी मिल के कवनो तिथि के घोषणा क दी, आ पूरा समाज ओकरा के मान ली? ई सवाल सुनला पर अखिल भारतीय भोजपुरी स्वाभिमान आन्दोलन (अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के इकाई) के महामंत्री गुरुचरण सिंह जी भडक गइनी – "आखिर कवना आधार पर ई 2 नवम्बर के तारीख रखल गइल बाटे? हम जान तानी कि एही दिने पहिला भोजपुरिया के कदम मॉरीशस के धरती पर पडल रहे, आ एकरा के ओहिजा हर साल अप्रवासी दिवस के रुप में मनावल भी जाला। लेकिन का एकरा मतलब ई भइल कि जवना दिने पहिला भारतीय देश से बाहर गइल रहे, ओकरा के “हिन्दी दिवस” करार दिहल जाव?"
"14 सितम्बर के हिन्दी दिवस मनावल जाला काहें कि ओही दिने हिन्दी के संविधान में राष्ट्रभाषा के तौर पर जोडल गइल रहे, अब चूकिं भोजपुरी के त संविधान से मान्यता नइखे मिलल, ओह से हमनी का कबीर- जयंती पर एकरा के हर साल मना रहल बानी जा, काहें कि कबीर के भोजपुरी के पहिला कवि मानल जाला। आ एह दिन भोजपुरी दिवस मनाये के परंपरा कई साल से चलल आ रहल बाटे। अगर केहू के मनावे के मने रहे, त शायद ऊ तारीख ज्यादा बढिया रहित, जवना दिने भोजपुरी के मॉरीशस के संसद में मान्यता मिलल। हम त इहे कहब कि कुछ लोग ओछी लोकप्रियता हासिल करे खातिर ई सब सिगुफा छोडले बा।" गुरुचरण जी कहनी।
वइसे मजे के बात इ बा कि लखनऊ (जहँवा एह तिथि के घोषणा भइल) से चल रहल सबसे बड भोजपुरी संस्था अखिल भारतीय भोजपुरी समाज भी एह घोषणा के विरोध क रहल बा। एह तरह के घोषणा के नाम चमकावे के राजनीति करार देत संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रभुनाथ राय जी कहनी – “2 नवम्बर के गिरमिटिया दिवस (अप्रवासी दिवस) का रुप में त मॉरीशस में मनावल जाला, एह में कवनो दिक्कत नइखे, लेकिन जब हमनी के समाज के लोग ओहिजा गुलाम बन के गइल, ओह दिन के भोजपुरी दिवस कइसे मनावल जाव? पिछला 15 साल से हमनी के संस्था देश भर में भारत-रत्न डा. राजेन्द्र प्रसाद के जयंती के भोजपुरी दिवस का रुप में मना रहल बाटे, आ एह दिन के आधिकारिक घोषणा खातिर केन्द्र सरकार के भी कई गो ज्ञापन दिहल जा चुकल बा। डा. राजेन्द्र प्रसाद के बाद भोजपुरिया समाज में बाबु जगजीवन राम जी के स्थान आयेला, आ उनुका जनम दिन पर भी आम सहमति बन सकेला। वइसे जवना दिन भोजपुरी के मान्यता मिल जाई, ओह दिन से अगर सभ केहू के सहमति होई, त हमनी का ओह दिन के विश्व भोजपुरी दिवस का रुप में मनायेब।“
हमनी का एह मुद्दा पर राष्ट्रीय भोजपुरी मंच, भोजपुरिया बेयार, भारतीय भोजपुरी संघ, भोजपुरी साहित्य परिषद आ कम से दस गो आउर संस्था से बात कइनी जा, जवन कि एह तरह के आयोजन के पक्षधर नइखे, त फेर सवाल इ उठता कि का भोजपुरिया समाज एतना कमजोर हो गइल बा, कि केहू भी ओकरा के अपना नाम चमकाये, आ मीडिया में चेहरा देखाये खातिर इस्तेमाल क सकेला? का मात्र 10-15 लोग मिल के करोडन लोगन के बारे में कवनो फैसला ले सकेला?
आ एकर घोषणा एगो अइसन संस्था के बैनर तले भइल, जेकर वजुद अभी 6 महीना भी पुरान नइखे, आ एह से पहिले ई लोग भोजपुरी के एगो आउर संस्था से जुडल रहे। ई कइसन भोजपुरी- प्रेम रहे जवन कि एक संस्था में रहते पुरा ना हो पावत रहे, लेकिन नया संस्था बनते नाम कमाये खातिर एगो तारीख के घोषणा क दिहल गइल। वइसे ओह लोगन के पुरनका संस्था 11 तारीख के दिल्ली में अधिवेशन क रहल बाटे, लेकिन ओहिजा एकर घोषणा भइला पर एह लोगन के ओकर श्रेय ना मिल पाइत, ओह से हडबडी में लखनऊ के एगो होटल में प्रेस-कांफ्रेंस बोला के एह उपलब्धि (?) के अपना नाम क लिहल गइल। आज भोजपुरिया समाज इ पुछल चाह ता कि ओह संस्था के (आ विश्व भोजपुरी सम्मेलन के) सदस्य संख्या केतना हवे, आ के ओह लोगन के एह निर्णय लेवे के अधिकार देले बा? अब चूकिं एकर घोषणा हो गइल बा, त समाज इहो जानल चाहत बा कि केतना देशन में, आ कहाँ- कहाँ ई दिवस के मनावल जाई। चूंकि 2 नवम्बर अब बहुत ज्यादा दुर नइखे, ओह से बहुत जल्दी एह ड्रामा के पीछे के हकीकत भी जनता का सामने आ जाई।
वइसे एह तिथि के घोषणा से जुडल एगो व्यक्ति, जिनकर नाम आज ले कवनो भोजपुरी आन्दोलन से जुडल व्यक्ति ना सुनले होई, ऊ एकरा के पहिलहीं से सफल मान के बहुत खुश बाडे। कुछ लोगन के चमचागिरी करते समय ऊ शायद इहो भुला गइले कि आखिर काहें उनुका के एह मुद्दा पर बहुत लोग के समर्थन नइखे मिलत? उनुका शायद इहो पता ना होई कि भोजपुरी आन्दोलन से जुडल सभ संस्था आ लोग आखिर एह निर्णय के खिलाफ काहें बा? आ काहें एह लडाई में उनुकर गुरु भी उनुका पक्ष में खुल के कुछ नइखन बोल पावत? (वइसे उनुकर गुरु से जब उनका मुद्दा पर बात भइल, त ऊ ई कह के आपन पल्ला झाड लिहले कि “नया मुल्ला ढेर पियाज खायेला“)। उत्साह बढिया चीज होला, लेकिन अति-उत्साह में आ अति-महात्वाकांक्षा में ई लोग जवन निर्णय भोजपुरिया समाज पर थोपल चाह रहल बा, ओकर परिणाम केतना गंभीर हो सकेला, शायद एकर अंदाज ओह लोगन के नइखे।




lekin eh news ke padhala ke baad ee clear ho gail ki sach me eh diwas ke manawe ke dawa kare wala log bhojpuri bhasha ke sathe khelwad kai rahal ba log.....
are bhai kwano deewas manawe ke ego aitihasik aur sanskritik adahr hokhela.....aa sach me jeh din maritus ke dharti pa bhojpuriya log bandhua majdoor ban ke gail oh din ke ta bhojpuri diwas manwe ke matlab ehe hoi ki humni ke bhojpuriya samaj aapna ghulami par garwa kai rahal ba.....oh dine aur kauno diwas bhale manain lekin bhojpuri deewas mana ke bhojpuri bhasha ke sharmsaar mat karin.....
Humar ta ehe kahnaam ba ki aam sahmati ke bina...bhojpuri diwas manawe ke "SIGUPHA" ke kada birodh hokhe ke chahin....Aur eh virodh me bhojpuri bahsha kahteer ladewala logan ke ekbadha hokhe ke chahin...Tabe ee aam sahmati ban paai ki KAWAN DIN KE BHOJPURI DEEWAS KE ROOP ME MANWAL JAAU....
AISE TA BAHUTE LOG BA SUGUPHA CHHOREWALA BA......OKRA UUPAR JANTA KE DHAYAN NA DEWE KE CHAHIN.......HAAN AGAR SACH ME BHOJPURI KA KHATEER PREM AA NEKNIYATI BA...TA PAHILE AAM SAHMATI BANAIN.....FIR AAGE BADHIN...NAHIN TA BEKAAR ME RAUA JAICHAND SAABIT HOYEB AUR BHOJPURI BHASHA KE SATHE KHILWAD KARE KHATEER ITIHAS RAUA KE "gADDAR" KE SUCHI ME DAL DIHI......
ANT ME SACH KE UJAGAR KARE KHATEER BHOJPURIYA.COM AA JAI BHOJPURI KE TEAM KE ASHESH DHANYABAD......
JAI BHOJPURI
Aisan manasikta wala log ke Bhojpuri ke naam se khilwaad kare ke ijajat na mile ke chahieb. Laaj aawe ke chahien.
जी हमनी के भोजपुरी में एगो शब्द बाटे ( जब आदमी गुस्सा हो जला कवनो अइसन , आ एह तरह के गलत काम से ता कहेले , एडमिन जी माफ़ करब लेकिन हम लिखे के मजबूर बानी ) वोह शब्द के हम रउवा सब के सामने अपन हिसाब से ले के आवत बानी |
जी असल में भोजपुरी में कुछ लोग अइसन बाटे जे भोजपुरी के नाम ले के आपन लाल करे में लागल बाटे , उ लोगन के भोजपुरी भाषा के विकास के चिंता कम और अपना विकास के बारे में ज्यादा बाटे | भले उनका विकास से भोजपुरी के विनाश कहे न हो जाऊ |
उ कहल जाला की भगवान् के घरे देर बाटे अंधेर न और हम आज एह पूरा समाज के सामने ई बात के कहत बानी की जवना दिने ई भोजपुरी जनता जग गईल वोह दिने अइसन लोगन के लुकाये के जगह ना मिली |
हम इकबार फेरु से कहत बानी की
भोजपुरी भाषा के संगे मत खेला बबुआ कहे की ई हमनी के भाषा ही ना हवे बल्कि संस्कार भी हवे
ab ta bhagwane malik bane
amit kumar singh