मुंबई। महाराष्ट्र में एक बेर फेर उत्तर भारतीय लोगन के निशाना बनावल गइल बाटे। लेकिन एह बेर ई हमला मनसे आ शिवसेना का ओर से ना होके राज्य के कांग्रेस-एनसीपी सरकार का ओर से बाटे। राज ठाकरे के दिखावल राह पर चल के महाराष्ट्र सरकार ई फैसला कइले बिया कि टैक्सी के लाइसेंस पाये खातिर मराठी जानल जरूरी बा।एतने ना, एकरा संगे 15 साल के डोमिसाइल के शर्त भी जोड़ दिहल गइल बाटे। हालांकि सरकार ई स्पष्ट कइले बिया कि जेकरा लगे भी पहिलहीं से टैक्सी के परमिट बा, ओह लोगन के एह फैसला से असर ना पडी। मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण के अध्यक्षता में भइल स्टेट कैबिनेट के बैठक में टैक्सी परमिट नियमन के बदले के फैसला कइल गइल। मुख्यमंत्री कार्यालय के एगो अधिकारी के कहनाम बा कि अब अब से खाली वइसने टैक्सी ड्राइवर के लाइसेंस दिहल जाई, जवन कि राज्य में कम से कम 15 साल से रह रहल बाटे, आ मराठी पढ़ आ लिख सकत होखे।
वइसे सरकार के एह फैसला के विरोध भी शुरू हो गइल बाटे। मुंबई में टैक्सी ड्राइवरन के सबसे पुरान एसोसिएशन एकर आलोचना करत एह फैसला के अस्वीकार्य करार दिहलस। असोसिएशन एह फैसला के राजनीति से प्रेरित करार दिहलस। करीब 15 साल के मुम्बई में टैक्सी चला रहल अब्दुल शफीक के ई फैसला आश्चर्यजनक लागल - "जे मराठी नइखे जानत, का ओकरा अपना मेहनत से रोजी-रोटी कमाये के कवनो हक नइखे? अपने देश में हमनी का पराया कइसे हो गइनी?"
एहिजा ई बतावल जरुरी बा कि मुंबई में करीब दू लाख टैक्सी ड्राइवर बाडे, आ एहमें काफी तादाद यूपी, बिहार, झारखंड आ उत्तराखंड के ड्राइवरन के बाटे। इस फैसला से एह राज्यन से आये वाला ड्राइवरन के लाइसेंस मिले के संभावना खतम हो जाई। मुंबई में हर साल करीब चार हजार टैक्सी ड्राइवरन के लाइसेंस दिहल जाला।
दोसरा ओर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मायावती एकरा के राजनीति से प्रेरित फैसला बतवले बाडी, जवन कि लोकतांत्रिक कायदा आ भारतीय संविधान के आत्मा के खिलाफ बाटे। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी एह फैसला पर हैरानी जतावत एकर विरोध कइले ह। कुछ राजनीतिक विश्लेषक एकरा के कांग्रेस सरकार द्वारा मनसे आ शिवसेना के समर्थकन के लुभाये के कोशिश बता रहल बाडे।


