मुंबई। महाराष्ट्र सरकार के टैक्सी ड्राइवरन खातिर काल्ह लिहल फैसला पर जब विरोध शुरु भइल, त मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण आज अपना बयान से पलटत कह देहलन कि हिन्दी आ गुजराती समेत कवनो स्थानीय भाषा जाने वाला के टैक्सी परमिट दिहल जाई।मुख्यमंत्री के एह फैसला पर एक ओर त उत्तर भारतीय लोगन में राहत देखल गइल, ओहिजे एह पर मनसे आ शिवसेना खिसिया गइल बाडे सन। मनसे सुप्रीमो राज ठाकरे एहिजा चव्हाण की टिप्पणी पर कहलन कि मुख्यमंत्री के अपना रुख पर अटल रहे के चाहीं। राज इहो चेतावनी देहलन कि अगर टैक्सी के नया परमिट मराठी लइकन के ना मिलल, त ऊ मुंबई के सड़कन पर एको गो टैक्सी ना चले दिहें।
चव्हाण के बयान पर सवाल उठावत राज कहलन कि आखिर ऊ अकेले पूरा कैबिनेट के सामूहिक फैसला के कइसे बदल सकेले। ऊ इहो कहलन कि मुख्यमंत्री कैबिनेट के फैसला के लागू कराये में सक्षम नइखन। ओने दोसरा ओर, शिवसेना एहिजा मुख्यमंत्री के अपना बयान से पलटी खाये के निंदा करत कहलस कि ऊ महाराष्ट्र आ मुख्यमंत्री के पद के महत्व के कम कइले बाडे। पार्टी के नेता संजय राउत कहलन कि एह तरह से बयान पलटला का वजह से मराठियों के अपमान भइल बा।
एह से पहिले बुधवार के महाराष्ट्र कैबिनेट फैसला कइले रहे कि मुंबई में टैक्सी के परिमट ओही के दिहल जाई, जेकि मराठी पढल-लिखल जानत होखे, आ राज्य में कम से कम 15 साल से रह रहल होखे। एह फैसला पर देश भर में तीखी प्रतिक्रिया मिलल रहे, आ कुछ लोग एकरा के राष्ट्रीयता के खिलाफ भी बता दिहल।


