कोलकाता। नक्सली एक बेर फेर सरकार के खुला चुनौती देले बाडे सन। हावडा से कुर्ला (मुंबई) जा रहल एगो प्रमुख ट्रेन ज्ञानेश्वरी एक्स्प्रेस के काल्ह नक्सली झाडग्राम (पच्छिम बंगाल) का लगे ब्लास्ट कर के उडा देहले सन, जवना में 150 से बेसी लोगन के मरला के संभावना बा। विस्फोट एतना खतरनाक रहे कि समूचा ट्रेन पटरी से उतर गइल, आ दोसरा लाइन से आ रहल एगो मालगाडी से टकरा गइल। रात डेढ बजे के करीब भइल एह घटना के बाद एह मार्ग पर ट्रेन के परिचालन पूरा तरह से बंद कइ दिहल गइल बा, आ बचाव-कार्य युद्ध-स्तर पर जारी बा। अभी तक करीब 75 लोगन के शव निकालल जा चुकल बा, जबकि 100 से ज्यादा घायलन के खडगपुर के एगो अस्पताल में भर्ती करावल गइल बाटे। अभी भी मलवा में करीब 150 से बेसी लोगन के फंसल होखला के आशंका व्यक्त कइल जा रहल बाटे।
सरकार द्वारा एह घटना में मारल गइल लोग खातिर पांच-पांच लाख आ घायलन खातिर एक-एक लाख रुपया के मुआवजा के ऐलान कइल गइल बाटे। रेल मंत्री ममता बनर्जी दुर्घटना-स्थल पत पहुंचे खातिर निकल चुकल बाडी।
एहिजा ई बतावल जरुरी बा कि खडगपुर से टाटानगर के बीच के ई रेलमार्ग हमेशा नक्सलियन के निशाने पर रहल बा। दू साल पहिले एही मार्ग पर एगो लोकल ट्रेन के नक्सली 2-3 घंटा ले अपहरण कइ के रखले रहले सन, ओकरा बाद करीब छह महीना पहिले एही मार्ग पर राजधानी एक्सप्रेस पर भी हमला भइल रहे। अउर त अउर, अभी 10 दिन पहिले एही मार्ग पर स्टील एक्सप्रेस के रोके के कोशिश कइल गइल रहे, आ जब ड्राइवर खतरा के भाँपते हुये ट्रेन के रफ्तार तेज कर के आगे निकले लागल, त ट्रेन पर कई राउंड गोली चलावल गइल रहे।
खाली 10 दिन के भीतर भइल एह दूसरा वारदात से इ लागता कि प्रशासन पिछला वारदात से कवनो सबक ना सिखले रहे, आ रेल-यात्रियन के सुरक्षा खातिर कवनो इंतजाम ना कइल गइल रहे। आखिर एह लेखां कब तक नक्सली हमला करत रहिहें सन, आ सरकार ओहनी से वार्ता के पेशकस करत रही? आखिर जब श्रीलंका जइसन एगो छोट देश अपना इहाँ से लिट्टे जइसन ताकतवर आतंकवादी संगठन के सफाया कर सकेला, त भारत काहें ना? आखिर कब ले आम आदमी के एही लेखां मरे खातिर छोड दी सरकार? कब ले एही लेखां हाथ-पे-हाथ धर के बइठल रही सरकार? मुआवजा के घोषणा से आम आदमी के कवनो भला ना होई, बल्कि जब ले एक के बदले दस नक्सलियन के मारे के निति पर अमल ना शुरु होई, तब ले आम आदमी के दिल के ठंढक ना पहुँची। अब सेना के लडाई में उतारे के वक्त आ गइल बा।


