बक्सर। पिछला हफ्ता जवन खुलासा के शुरुआत भोजपुरिया डोट कॉम पर भइल रहे, ओकर असर आज बक्सर में भी देखे के मिलल। चूँकि बक्सर में बिजली आ इंटरनेट के दिक्कत बा, त ओहिजा के युवा लोग हमनी के सन्देश आम जनता तक पहुंचाए खातिर एगो आसान तरीका खोजल - इश्तेहार छपवाए के। अउर ओकर असर अइसन भइल की आज सबेरे जब लोग उठल, तब हर गली-चौराहा पर भोजपुरिया डोट कॉम के खबर के इश्तेहार लागल रहे, अउर एह तरह रविकांत दुबे के सच्चाई बक्सर के बच्चा-बच्चा जान गइल।आज सबेरे बक्सर के हर गली-मुहल्ला आ चौक-चौराहा जनता के जागरूकता के एगो नया कहानी कहत रहे, कई जगह लोग लाइन लगा के एह एम वी कॉलेज में राजनीतिशास्त्र के एह विभागाध्यक्ष के करतूत के बारे में पढ़त रहे। अउर त अउर, ओह एम वी कॉलेज के मेन गेट पर भी कई गो इश्तेहार लागल रहे (फोटो देखीं), जहँवा रविकांत दुबे राजनीति शास्त्र के लेक्चरर हवन। कुछ लोग भले एह खुलासा से चकित लागल, लेकिन जेतना लोग रविकांत दुबे के जानेला, ओकरा पता रहे कि पाप के घड़ा जब भर जाला, त एक ना एक दिन ऊ फूटबे करेला। कुछ लोग दबल जबान में इहो कहत रहे कि अपना करनी के सजा त रवि कान्त दुबे के भोगहीं के रहल, आ इनकर चरित्र के देख के अभी तक के खुलासा काफी कम बाटे।
रवि कांत दुबे पर कई गो गंभीर आरोप लगावत स्थानीय निवासी श्री शारदा तिवारी के सवाल रहे कि आखिर अपना पिता से अभद्र व्यवहार करे वाला, अउर अपना पत्नी के असाधारण यातना देवे वाला व्यक्ति केतना दिन ले समाज के बेवकूफ बना के आपन कॉलर टाईट कइले रही? आखिर ओह लोगन के आंसू के हिसाब त होखही के रहे। वइसे अपना पत्नी से मुक़दमा लड़ चुकल ई व्यक्ति अगर समाज के बात करता, त केहू भी समझ सकेला कि जे परिवार तक के ना संभार पाइल, उ भोजपुरिया समाज के का उद्धार करी? जब हमनी का एह समाचार के तह में जाये के कोशिश कइनी जा, त पता चलल कि अपना पत्नी पर रविकांत दुबे बहुत अत्याचार कइले बाड़न, अउर पिता के हालत उनका द्वारा लिखल एगो लाइन से पता चलेला, जवन कि पांच-छह साल पहिले छपल एगो हैंडबिल में प्रिंट कइ के समूचा बक्सर में बँटवावल गइल रहे। कुछ स्थानीय लोग हमनी के ओह हैंडबिल के एगो प्रति भी उपलब्ध करावल, जवन कि निचे देखल जा सकेला। एह हैंडबिल में रविकांत दुबे के निजी जीवन के कई गो कडवा सच्चाई उजागर कइल गइल बाटे, अउर जवना तरह से रविकांत दुबे एकरा छपला के 6 साल बाद भी चुप बाडन, ऊ अपने-आप में एकर सत्यता के प्रमाणित कइ रहल बाटे।

अपना पहुँच के दम पर भोजपुरी अकादमी के चेयरमैन जइसन महत्वपूर्ण पद पर पहुंचल रवि कांत दुबे के सच्चाई केहू के भी हिला देवे खातिर काफी बा। ना जाने केतना तरह के आरोपन से घिरल एह व्यक्ति के बारे में एगो ख़ास बात इहो पता चलल कि ई अखबार में आपन नाम छपवाए खातिर कवनो हद तक जा सकेले। बक्सर के जनता के अगर मानल जाव, त सिर्फ अखबार में नाम आ फोटो छपवा के ई व्यक्ति लोगन के गुमराह करत चलेला, अउर एही प्रवृति आ आपन पहुँच का बदौलत ई भोजपुरी साहित्य-जगत में कवनो योगदान ना भइला के बावजूद भोजपुरी अकादमी के चेयरमैन नियन महत्त्वपूर्ण पद पर पहुँच गइल बाटे।
एह मामला के एगो अजीब पहलु इहो रहल कि हर पोस्टर के साटे से पहिले स्थानीय लोग ओकरा पर कई गो मैसेज ("का बक्सर के अखबार ई सच ना लिख सकेला?", "का बक्सर के पत्रकार लोग बिक गइल बा", आदि) लिखले बा, जवन कि ओहिजा के स्थानीय मीडिया पर रविकांत दुबे के पकड आ मीडिया के स्तर पर सवालिया निशान लगा रहल बाटे। बक्सर के जनता आज खुल के हर चौक-चौराहा पर रविकान्त दुबे के बारे में बतकही कइलस, अउर लोग सरकार से इहो मांग कइल कि रविकांत दुबे के यथाशीघ्र एह पद से हटावल जाव, अउर ओहिजा कवनो योग्य साहित्यकार के राखल जाव, ताकि ओह पद के गरिमा बनल रहो।




काहे खा तिर गइल हा तू आग मेँ कूदे,
भोजपुर के छाती पर लगलऽ पत्थल बूके,
इ कुल काम काहे कइलऽ हा ए बचवा, \
जे सून सून लोग लागल मुँहवे प थूके॥
-- शारदा प्रसाद तिवारी,बक्सर
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- शशिकांत उपाध्याय
yani priti agrwal se lekr aj tak ki sari yatraye sakar nzar ayengi.
jlta hai to koi jal jaye...........
SHANK SHEKHAR, BEURO PRMUKH RASHTRIYA SHARA, BUXAR