बक्सर। एक बहुत मशहुर कहावत है कि जिनके घर शीशे के होते हैं, वो दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं फेंका करते, लेकिन भोजपुरिया डॉट कॉम के संचालक पर झुठा मुकदमा कर चर्चा में आये रवि कांत दुबे की मानसिक स्थिति अब ऐसी हो गई है कि उन्होंने फेसबुक पर एक बार फिर हमें जेल भेजने की धमकी दी है। उन्होंने यह भी लिखा है कि हम लोग उनकी योग्यता और क्षमता पर कीचड उछाल रहे हैं, और जिस योग्यता और क्षमता की वो बात कर रहे हैं, उसका प्रमाण हमारे पास उनके द्वारा यह सवाल उठाये जाने के 24 घंटो के भीतर आ चुका है।जी हाँ, हम बात कर रहे हैं रवि कांत दुबे की क्षमता की, और उस योग्यता की जो उन्होंने एक लेखक के तौर पर अर्जित की है। बराक ओबामा पर एक किताब लिखने के बाद उस किताब को दुनिया के सामने दिखा कर अपनी अंतर्राष्ट्रीय पहचान बनाने का दावा करने वाले रवि कांत दुबे की अंग्रेजी पर और इस विषय (बराक ओबामा) पर पकड कितनी बढिया है, उसका अंदाजा महज इस बात से लगाया जा सकता है कि अप्रैल 2009 में शोध पत्रिका "सैद्धांतिकी" में बराक ओबामा पर छपा रवि कांत दुबे द्वारा लिखा गया शोध-पत्र अमेरिका के दो प्रसिद्ध लेखकों (Robert Hutchings और Frederick Kempe) की वेबसाइट से कॉपी किया गया है। मजे की बात यह है कि इन दो लेखकों में से एक अमेरिका के डिप्लोमैट रह चुके हैं। अगर आप उस शोध पत्र को देखें, तो आप डा. दुबे की काबिलियत का सच देख पायेंगे, जिसमें उन्होंने भाषा का प्रारुप बदलना तो दूर, कॉमा और फुल-स्टाप तक को हु-बहु उतार दिया है।
आपकी जानकारी के लिए हम यहाँ उस शोध पत्र के पहले पन्ने और उस वेबसाइट पर उसकी मूल प्रति को उपलब्ध करा रहे हैं। उसके अलावा बाकी पन्नों और उसकी मूल प्रति को भी यहाँ क्लिक कर डाउनलोड किया जा सकता है, जो इस स्वनाम धन्य लेखक की क्षमता का आकलन करती है। वैसे इस मामले में एक मजेदार तथ्य यह भी है कि उनके शोध-पत्र का कुछ हिस्सा अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की आधिकारिक वेबसाइट से भी कॉपी किया गया है, और कुछ हिस्सा अमेरिकी सरकार की वेबसाइट से भी लिया गया है, जो रवि कांत दुबे के दुस्साहस को दर्शाता है। एक अजीब बात यहाँ यह भी देखी जा सकती है कि एक ओर जहाँ शोध पत्र तारीखों पर निर्भर रहते हैं, वहीं कॉपी/पेस्ट के दौरान (पेज 4 पर) दुबे ने एक जगह रविवार (Sunday) का उपयोग किया है, जो सलुन (CNN की सहयोगी वेबसाइट) से लिया गया है। और तो और, दो जगह जहाँ वेबसाइट पर लिंक की वजह से शब्द रेखांकित (Underline) हो गये हैं, शोध-पत्र में भी वह उसी तरह दिख रहे हैं, जो कॉपी करने वाले व्यक्ति (रवि कांत दुबे) की काबिलियत को दर्शाता है। दूसरों का लिखा हुआ कॉपी कर के उसको अपने नाम पर छपवाने वालों की सजा कॉपीराइट एक्ट में क्या होती है, यह तो कानून बताएगा, लेकिन पाठकों और साहित्य-प्रेमियों की नजर में ऐसे व्यक्ति की इमेज एक ऐसे चोर की बन रही है, जो अपना नाम चमकाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।


वैसे इस शोध पत्र के बाद जब भोजपुरिया डॉट कॉम ने इस मुद्दे पर अपनी जाँच आगे बढाई, तो पाया कि रवि कांत दुबे की अपनी वेबसाइट पर उनकी बराक ओबामा वाली किताब के बारे में जो "परिचय" लिखा गया है, वो भी प्रसिद्ध अखबार द हिन्दू (The Hindu) और इंडियन एक्सप्रेस (Indian Express) की वेबसाइटों से चुराया गया है। अभी तक उपलब्ध आलेख जिस तरह कॉपी/पेस्ट की कहानी कह रहे हैं, वो उस किताब पर संदेह पैदा करने के लिए काफी है, जिसे दिखा कर रवि कांत दुबे नीतीश कुमार और अन्य लोगों की नजर में स्वयं को महान साबित करने की कोशिश करते हैं। हमारी टीम इस विषय में छानबीन कर रही है, और प्रारंभिक सूचना के अनुसार किताब के प्रकाशक के पास किताब की हस्तलिखित पाण्डूलिपी नहीं है, जिससे यह शक गहरा जाता है कि कहीं यह किताब भी इंटरनेट से कॉपी की गई, और दूसरे लोगों द्वारा लिखे गये आलेखों को एक साथ मिला कर अपने नाम पर छपवा लेने का मामला तो नहीं है? हमारी टीम इस बारे में विभिन्न लोगों की राय ले रही है, और बहुत जल्द हम सच को दुनिया के सामने ले आयेंगे।


एक कॉलेज में व्याख्याता के तौर पर पढा रहा एक व्यक्ति अगर इस तरह की चोरी करता है, तो उसका क्या मतलब निकाला जाए? अगर एक शिक्षक अपने निजी लाभ के लिए चोरी करेगा, तो फिर उसके छात्रों में इसका क्या प्रभाव पडेगा? रवि कांत दुबे जैसे घटिया लोगों से वैसे तो इस से ज्यादा कोई उम्मीद नहीं की जा सकती थी, लेकिन क्या इसी तरह के लोगों की वजह से देश की साख पर सवाल नहीं खडे होते? क्या इस तरह की मानसिकता वाले लोगों के लिए शिक्षा जगत में कोई स्थान है, जो अपने कृत्यों से ना सिर्फ लेखकों को, बल्कि पूरे साहित्य जगत को शर्मसार कर रहे हैं। बिहार सरकार को चाहिए कि अपने इस 'महान' प्रोफेसर के सच को देखे, और जनता के सवालों का जबाब दे।



ऐसे झूठे और चोर लोगों को भारतीय क़ानून के मुताबिक कड़ी से कड़ी सजा देनी चाहिए | अपने करतूतों से अपने परिवार और अपने समाज की नजरों से पहले हीं गिर चुका दुबे अब लेखकों की बिरादरी में भी अपनी काबिलियत दिखा चुका है | वैसे मैं बहुत आशावादी हूँ , उम्मीद करता हूँ दुबे सबके सामने आकर अपने कृत्यों के लिए माफी मांगेगा | शर्म करो दुबे ...अपने गुनाहों को कबूल कर एक नई शुरुआत करो |
Beta Dubey tumhari naukari bhi farzi tarike se hi mili hai mujeh to aisa hi lagta hai..anpadh.
Shame on u bcz u were cheating the people of Buxar. u wanted to become an icon of Bhojpuri Samaj, but u forgot that everything has to be come out whatever is going behind the certain.
Aise log hi badnam kar ke rakhte hai
खुबे खुल गईल पोल !