Home Samachar National मजदूरन खातिर मोबाइल आ साइकिल...

मजदूरन खातिर मोबाइल आ साइकिल...

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लुधियाना। एक ओर जहाँ एही देश के कुछ मतिभ्रम नेता बिहार/उत्तर प्रदेश के मजदूरन (जिनका के देश भर में बिहारी मजदूर के नांव से जानल जाला) के भगाये के नारा दे रहल बाडन, ओहिजे दोसरा ओर बिहारी मजदूरन के कमी से पंजाब के किसान अउर उधोग जगत के पसीना छूट रहल बाटे। हालात अब अइसन बा कि पंजाब के अर्थव्यवस्था चरमरा गइल बाटे, अउर ओहिजा के बिजनेसमैन अउर किसान लोग बिहारी मजदूरन के लुभाने खातिर मुफ्त में मोबाइल अउर साइकल बांट रहल बाटे।

मजदूरों के कमी खातिर कबो नीतीश कुमार के 'सुराज' के, त कबो 'मनरेगा' के एगो वजह बतावल जा रहल बाटे। देश के 'साइकल राजधानी' के नाम से मशहूर लुधियाना में साइकल अउर ओकरा कलपुर्जन के करीब 5,000 छोट अउर बड़ कारखाना बाटे, जहंवा एह साल मजदूरन के संख्या में करीब 30 फीसदी कमी हो गइल बाटे। एह में से कई गो कारखाना पर त मजदूरन के कमी के कारण बंदी के तलवार लटक रहल बाटे।

एहिजा साइकल उत्पादन में कुछ प्रमुख नाम हीरो, एवन अउर रॉलेक्स के बा। मजदूरन के कमी के असर एहिजा के खेती अउर कपड़ा उद्योग पर भी पड़ल बाटे। 'यूनाइटेड साइकल ऐंड पार्ट्स मैन्युफैक्चरिंग असोसिएशन' के पूर्व अध्यक्ष डी.एस. चावला के कहनाम बा कि, "मजदूरन के 50 से 200 रुपया तक के मोबाइल फोन के रिचार्ज कूपन भी दिहल जा रहल बाटे, ताकि ऊ अपना परिवार के लोगन से बात कर सके। एकरा अलावा करीब 2,500 रुपया के साइकल मुफ्त में या बहुत मामूली दाम में एह मजदूरन के दिहल जा रहल बाटे, ताकि ऊ लोग काम के जगह तक आसानी से आ सके।"

एगो सर्वे में पता चलल ह कि पंजाब अउर दिल्ली जइसन जगहन खातिर मजदूरन के प्रवास में 26 फीसदी तक कमी आइल बाटे। गैर सरकारी संगठन बिहार आर्थिक अध्ययन संस्थान का ओर से करावल गइल एगो सर्वे के मुताबिक बिहार से देश के कई हिस्सा में अनस्किल्ड मजदूरन के पलायन में 2001-03 की तुलना में 2006-08 में 26.53 फीसदी के कमी आइल बाटे।

किसान इंद्रजीत सिंह कहलन कि गेहूं अउर धान के बुआई अउर कटाई के मौसम में मजदूरन के गंभीर कमी के सामना कइ रहल किसान लोग मजदूरी के दोगुना (300 रुपए) तक कइ देले बा, लेकिन स्थिति जस के तस बा। चावला कहलन कि पहिले मजदूर अपना मालिकन से निहोरा करत रहलन कि लवटला पर उनका के काम पर राखल जाव, लेकिन आज परिस्थिति बदल गइल बाटे। अब के हालात ई बा कि कई गो मालिक खुद मजदूरन के घरे फोन करेलन, अउर कबो-कबो त उनका बैंक अकाउंट में पइसा डाल के उनका से वापस काम पर आये खातिर कहेलन।

हालात के गंभीरता के अहसास एही बात से लगावल जा सकेला कि साइकल कंपनी वाला लोग टेक्नॉलजी बेहतर करे खातिर विशेष कोष के माँग के लेके हाले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी अउर उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा से मुलाकात कइल रहे, ताकि ऊ लोग मजदूरन के कम संख्या के बावजूद आपन काम चला सके। (नभाटा से इनपुट का संगे)

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