जी हाँ, शायद बहुत लोग के विश्वास करे में तनी दिक्कत होखो कि प्रसिद्ध राम-कथा वाचक मोरारी बापू भी भोजपुरी के प्रभाव से अछूता नइखीं, लेकिन अगर रउरा आस्था टीवी पर उनुकर राम-कथा के सीधा प्रसारण सुनब, तब बुझाई कि बापू जी अब भोजपुरी पर भी चर्चा क रहल बानी, आ भोजपुरी कलाकार मनोज तिवारी पर भी।
बात लगभग 15-20 दिन पहिले के हवे, जब मोरारी बापू कबीर के धरती 'मगहर' में आपन नौ दिन के रामकथा शुरु कइले रहनी। ओह कथा के सुने खातिर भोजपुरी गायक मनोज तिवारी भी ओहिजा चहुँपल रहल, आ कथा के बाद ऊ बापू से मिललन। बापू उनुकर भोजपुरी गीतन के सुनके एतना प्रभावित भइनी कि अगिला दिन उनुका के अपना स्टेज पर भोजपुरी गीत सुनाये खातिर कहनी। ई शायद पहिला मौका रहे, जब बापू के राम-कथा के दौरान केहू के ओही स्टेज पर गाना सुनाये के मौका मिलल रहे।
"ए पहुना मिथिलेपुर में रहु ना, जे आनन्द विदेह नगर में, देह नगर में कहु ना..." ई गीत जब मनोज तिवारी ओहिजा सुनवलन, त राम कथा के भक्ति में डूबल लोगन के सामने जइसे एगो दृश्य जीवंत हो गइल। एह कार्यक्रम के बाद मगहर स्थिर कबीर पीठ के पीठेश्वर मनोज तिवारी से कहलन कि "कुछ प्रबुद्ध लोग रउरा बारे में आ भोजपुरी गीतन के बारे में बहुत दुश्प्रचार क रहल बाटे। एह से पहिले जब भी रउरा (मनोज) मगहर अइनी, लोग हमरा के रउरा से दुरी बनाये के सलाह दिहल। लेकिन आज हमरा अफसोस बा कि हम पहिले रउरा से काहें ना मिलनी।"
नौ दिन ले चलल एह कार्यक्रम के बाद बापू वापस गुजरात लौट गइनी, लेकिन उनुकर दिलो-दिमाग में भोजपुरी के प्रति ऊ सम्मान अबहियो बरकरार बाटे। एही वजह से काल्ह अपना आश्रम में प्रवचन के दौरान उहाँ का भोजपुरी के मिठास आ मनोज तिवारी पर काफी देर ले चर्चा कइनी। आउर त आउर, आस्था चैनल पर प्रसारित एह कथा के दौरान उहाँ का मनोज तिवारी के "artist with heart" (दिल वाला कलाकार) भी बतवनी।
एक ओर जहाँ कुछ लोग भोजपुरी के नाम सुनते नाक-भौं सिकोड लेला, ओहिजे मोरारी बापू जइसन प्रसिद्ध संत के भोजपुरी-प्यार एह भाषा आ एकरा बोले वालन खातिर एगो शुभ संकेत हवे। भोजपुरी के प्रति जवन लगाव मोरारी बापू जी के कथा के दौरान लउक रहल बा, ओकरा खातिर पुरा भोजपुरिया समाज उनुकर आभारी बा। मोरारी बापू के भक्तन के भारी संख्या देखते हुये ई कहल जा सकेला कि अगर मोरारी बापू चाहस त दुनिया भर के लोगन के भोजपुरी के प्रति सोच में काफी बदलाव आई।
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Bhojpuri Bhasha ke aachaar ,vyavhaar , Sanskaar aur Sanskrity
ki jamkar tareef ki thi . Gujraat se buxar aaye unke any sahyogiyo
ne bhi Bhojpuri ki Taereef kee thi ....