लखनऊ। उत्तर प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता प्रमोद तिवारी एहिजा मुख्यमंत्री मायावती द्वारा उत्तर प्रदेश राज्य के पुनर्गठित क के बुन्देलखण्ड आ पश्चिमी उत्तर प्रदेश राज्यन के गठन के सिलसिला में प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह के लिखल पत्र के एगो राजनैतिक स्टंट बतवलन।कांग्रेस विधान मंडल दल के नेता प्रमोद तिवारी के कहनाम बा कि मुख्यमंत्री भारत के संविधान के अनदेखी क के राज्य के विभाजन खातिर प्रधानमंत्री के पत्र लिख रहल बाडी, जबकि भारत के संविधान में ई स्पष्ट लिखल बा कि राज्यन के विभाजन चाहे वाला के विधानसभा में एगो प्रस्ताव लाके, ओकरा के भारत सरकार के भेजे के चाहीं।
प्रमोद तिवारी के कहनाम बा कि एकर जानकारी भइला के बावजुद चिठ्ठी लिखला के बात कइला से लागता कि मुख्यमंत्री बयानबाजी क के महंगाई, प्रदेश में कायम जंगलराज आ विकास के शून्य गति से नाराज जनता के ध्यान हटाये के कोशिश क रहल बाडी। तिवारी के कहनाम बा कि मुख्यमंत्री मायावती पहिलहुँ एगो अइसने पत्र पहले लिखले रहली आ उत्तर प्रदेश में नया सरकार के गठन के ठीक बाद अपना विजय रैली के संबोधित करत अलग बुन्देलखण्ड राज्य के गठन के घोषणा भी कइले रहली, लेकिन मौजूदा विधानसभा के ढाई साल बाद भी उनुकर घोषणा पर कुछ बात आगे ना बढल।
उनुकर कहनाम बा कि यदि मुख्यमंत्री वास्तव में एह प्रकरण पर गंभीर बाडी त अलग बुन्देलखण्ड राज्य आ पूर्वाचल राज्य के गठन के प्रस्ताव, जवना के कांग्रेस पार्टी विधानसभा में प्रस्तुत क चुकल बाटे, आ जवन कि आजो विधानसभा में लंबित बाटे, के समर्थन करस, आ यदि ऊ कांग्रेस पार्टी के प्रस्ताव के समर्थन नइखे कइल चाहत, त खुद एगो अलग प्रस्ताव लेके आवस, कांग्रेस पार्टी ओह प्रस्ताव के अध्ययन क के जनता के हित में ओकर समर्थन करी।
तिवारी के कहनाम बा कि कांग्रेस पार्टी छोट राज्यन के पक्षधर बिया - "हमनी का चाह तानी जा कि छोट राज्य बन सन, आ एही वजह से अलग बुन्देलखण्ड आ पूर्वांचल राज्य के गठन के प्रस्ताव हमनी का विधान सभा में ले अइले बानी जा।"


