गोरखपुर। अन्याय आ जुल्म के खिलाफ नारी-शक्ति के प्रतीक जानकी शायद पूर्वांचल में अकेली महिला शख्सियत हई, आ जब ऊ कवनो निर्बल आ असहाय के समर्थन में आपन सेना लेके खडा हो जाली, त बड-बड दबंग भी ओकरा डरे कांपे लागेले सन। साल 2005 में जानकी के नाम नोबेल पुरस्कार खातिर भी नामित भइल रहे। पुरस्कार त ना मिलल, लेकिन ओकर सेवा आ सहयोग के रफ्तार बढ़ गइल। गोरखपुर जिला के भटहट ब्लाक के ताजपिपरा गांव में रहे वाली 55 साल की जानकी का वजह से उनुकर गांव आज सुर्खियन में बा। जानकी जब खाली दस साल के रहली, तबे अपना से बहुत बड़ रामदुलारे यादव का संगे ओकर बियाह भइल रहे। ससुराल अइली, त छोटी उमिर में ही उत्पीड़न के दबाव में ओकर सब सपना टूट गइल। लोक लाज के डर से जानकी सब कुछ सहत रहली, लेकिन एक दिन जब डीएम के गाड़ी से ओकरा पति के एक्सीडेंट हो गइल, त ऊ चंडी रुप धारण कइली। तत्कालीन जिलाधिकारी के ना सिर्फ इलाज के खर्च उठाये के पड़ल, बल्कि जानकी के पति के नौकरी भी देवे के पड़ल। जिलाधिकारी के तबादला के बाद पति के नौकरी छूट गइल, तब जानकी का लाल्गल कि पढ़ल-लिखल ना भइला का वजह से ओकरा के छलल गइल बाटे। ऊ पढे के संकल्प लेहली, आ साल 1998 में ऊ महिला समाख्या से जुड़ के पढ़ल-लिखल सीख भी गइली।
ज्ञान, हुनर आ तेवर देख के उनुका के पंचायत कोर टीम आ महासंघ में शामिल कइल गइल। एहिजे से जानकी के मन में अपना गांव आ समाज के विकास के सपना जनम लिहल। कई गांव के औरतन के जुटा के ऊ आपन सेना भी खडा क लिहली, आ फेर जब भी कवनो असहाय पर मुसीबत आइल, तो लाठियन से लैस होके ऊ ओहिजा मौका पर पहुंचल शुरु कइली। अब जानकी के जज्बा के चर्चा तुलसीदेऊर, जमुनिया, खैराबाद, पिपराइच, भटहट, रामपुर आ आसपास के गांवन में सुने के मिल जाला।
तुलसीदेउर में 15 साल से एक दबंग रस्ता रोक दिहले रहे, जानकी के सेना ओहिजा पहुंचल, त रस्ता खाली हो गइल। जवन दबंग कमजोर पट्टीदारन के उत्पीड़न करत रहे, ओकरा के जेल भी भिजवा दिहल गइल। दोसरे गांवन में भी इहे कहानी दोहरावल गइल। खैराबाद के एगो बीए पास लइला शादी के झांसा देके अनपढ़ गरीब लइकी के इज्जत से खेलत रहे। जब जानकी के ई बात पता चलल, त ऊ समाज के सामने लइका के शादी खातिर मजबूर क दिहली। एकरा अलावा जानकी गांव-गांव में साक्षरता के ज्योति जरवली, विधवा विवाह करवली, सामूहिक खेती के अलख जरवली, आ नरेगा में नाइंसाफी के मुखालफत तक कइली। जानकी के पति आ बड़का लइका राजनाथ विकलांग बाटे। दोसरका बेटा बृजनाथ पत्नी आ छोट भाई शेषनाथ का संगे लुधियाना में रहेला। दोसरा ओर एह छोट गांव में रह के जानकी महिला समाख्या के नारी अदालत के कानून कोर टीम की सदस्या के रुप में जुल्म के खिलाफ आवाज उठा रहल बाडी।
नारी-शक्ति के एह साक्षात प्रतिमूर्ति के भोजपुरिया डॉट कॉम के सलाम। (साभार: जागरण)



बाकी त यु पी मे का चल रहल बा उ सबके मालुम बा, काल्हु के मउ मे सुमनलता अध्यापक के संगे भईल घट्ना के बाद हमरा ई लागल की यु पी के ढेर सारा जानकी के जरुरत बा।
आ जहा तक नेतवन के बात बा त ओकनी के घोंसार मे डाल के नीमन से सोनाही देबे के चाही, उ बईठ के माजा लेत बाडन स आ देश दिन प्रतिदिन गर्त मे जा रहल बा।
जानकी जी हम उमेद करत बानी की तोहार ई निश्चय के देख के ढेर लोग आगे आई एह विकृत समाज के सुधारे खातिर।
एगो भोजपुरिया के ई आगाज देख के बहुत नीमन लागल ।
जय भोजपुरी
हमन के साल में एक बार अईसन लोगन के अपना तरफ से कुछ प्रोत्साहन देबे के चाहीं .