काल्ह हमनी का भोजपुरी साहित्यकार मनोज भावुक का ओर से लगातार मिल रहल धमकी से तंग आके ओह पर एगो आलेख लिखनी जा, आ रात होते-होते ओह पर मनोज भावुक के जबाब भी आ गइल। ओह जबाब में हमनी द्वारा उठावल एको मुद्दा पर जबाब त ना दिहले मनोज भावुक, बाकिर आगे बढ के भोजपुरी के सबसे बडहन वेबसाइट के कुकूर आ ओकरा पाठकन के चमचा करार दिहले। का कहल जाव एकरा के... ? एगो साहित्यकार के साहित्य ? कि सच के जबरदस्ती झुठलाये के एगो कुत्सिक प्रयास? कि ठगी के चक्कर में आपन नौकरी गंवा चुकल एगो व्यक्ति द्वारा सारा दुनिया के देखे के नजरिया...?अपना जबाब में भोजपुरिया डॉट कॉम पर आ खास तौर पर हमरा पर बहुत ही घटिया स्तर के आरोप लगावे के साहस कइले बाडे मनोज भावुक, आ इहो कहले बाडे कि ऊ 30 लाख रुपया हर साल कमात रहलन यूके में, शायद ई साबित करे के कोशिश करत रहलन कि उनुका खातिर पंकज प्रवीण द्वारा लगावल 55 हजार रुपया के ठगी के आरोप मायने ना राखेला। हम उनुका के ई बतावल चाहेब कि हम एगो बहुत ही साधारण आदमी हईं, आ 30 लाख रुपया त हम अपना जिनगी में कबो एक साथ देखले भी नइखी, लेकिन हमार ताकत ह एगो कलम आ हमरा के सच लिखे से दुनिया के कवनो ताकत नइखे रोक सकत। आ एह बात के मनोज तिवारी, रवि किशन समेत भोजपुरी फिल्म आ साहित्य जगत के बड-बड हस्ती भी स्वीकार करेला। ई कहाँ लिखल बा की ठगी उ लोग ना करेला जेकरा लगे पइसा रहेला? नांव गिनावल जाव...? केहु 50 लाख कमाव भा करोड कमाव, ई कमाई एह बात के गारंटी नईखे के उ केहु के ठग ना सकेला, और कम से कम मनोज लेखां लोगन के कुण्डली देख के त ईहे लागत बा कि अईसन लोगन के (जे आपन कमाई के ब्योरा एह खातिर देखावत बा कि सामने वाला उनुकर लाख के सुन के पगला जाई, लेकिन उ काहे नयिखन समझत आ बुझत कि भोजपुरियन खातिर आपन मान सम्मान और इज़्ज़त जरुरी होला ई लाख के राख बना देलन स भोजपुरिया) एक मात्र लक्ष्य खाली पैसा कमाईल बा और उ " येन केन प्रकारेण " माने कइसे भी आव।
अपना जबाब में मनोज भावुक खुद स्वीकार कइले बाडे कि आरा के वीर कुंवर सिंह विश्वविधालय उनुका ऊपर धोखाधडी के मुकदमा दायर कइले बा, जवन कि अदालत में विचाराधीन बाटे, आ शायद पहिला बेर इहो सकरले बाडे कि “आरडी म्यूजिक” उनुकरे कंपनी रहे, त फेर जब इहे बात भोजपुरिया डॉट कॉम पर भी लिखल रहे, त ओकरा के हटवाये खातिर एतना छटपटाहट काहें? माने तू चोरी कर, ठगी कर, सब ठीक... आ केहू ओह के लिख देव, त ऊ गलत? काहें ओह खबर के हटवाये खातिर भोजपुरी जगत के कई गो हस्ती से लगातार फोन करावल जाता? काहें एगो सच के कुचले के कोशिश हो रहल बा? काहें एगो सच पर एतना हाय-तौबा मच रहल बाटे? एह सवालन के कवनो जबाब नइखे उनुका लगे। मनोज भाई, एह से पहिले रउरा एगो फ्रॉड टीवी चैनल “पूर्वा टीवी” के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) भी रह चुकल बानी, ओकरो कहानी जनता के बताये के पडी का?
मनोज लिखले बाडे कि विश्वविधालय वाला मामला में ऊ कहीं नइखन, त फेर उनुकर नाम, पता, फोटो, हस्ताक्षर आ ओह सब से बढके स्नातक (ग्रेजुएशन) के सर्टिफिकेट वीर कुंवर सिंह विश्वविधालय में कइसे पहुँचल? बिहार में कवनो विश्वविधालय में 70 फीसदी उपस्थिति ना रहे वाला लोगन के भी फार्म भरा दिहल जाला, ई बात केहू से छूपल नइखे। लेकिन एगो बात के जबाब ना देहनी भावुक जी, कि अगर ऊ लइका परीक्षा पास हो जाइत, त सर्टिफिकेट केकरा नाम पर बनित, राउर कि ओकर? रउरा नांव पर बनित, आ ई बात ऊ लइका भी सकरले बा, जेकरा के रउरा पइसा देके अपना नाम पर परीक्षा देवे खातिर भेजले रहनी, जेकरा वजह से ओकरा जेल भी जाये के पडल। आउर हाँ, खबर छपला के तीन महीना बाद उनुकर फोन आइल रहे, ई बात हम पहिले भी कह चुकल बानी, लेकिन उनुकर माँग बहुत साफ रहे कि ओह खबर के ओहिजा से हटा दिहल जाव, लेकिन काहें हटावल जाव, एकरा पीछे कवनो तर्क ना दे पवले। मनोज अपना जबाब में इहो लिखले बाडन कि “हम नेट पर गीत-ग़ज़ल आ कविता कहे खातिर प्रसिद्ध बानी आ इहे हमार पहचान रहल बा”, त फेर पिछला 4-5 महीना में रउरा नेट से गायब काहें बानी? आ काहें राउरे आपनो लोग राउर साथ छोड देले बा? काहें राउर सब ब्लॉग एक-एक क के बंद हो गइल? मनोज बाबु, छह महीना बाद याद आवता गलत आ सही के? ओह लोगन से फोन करववला, आ धमकी दियवला का जगह अगर रउरा कुछ तथ्य आ सबूत पेश कइले रहिति, त बात कुछ आउर रहित।
मनोज इहो आरोप लगवले बाडे कि भोजपुरिया डॉट कॉम पर सब का सब कॉमेंट हमनी का खुदे लिखले बानी, जवना में उनुका के भला बुरा कहल गइल बा, त हम ई बतावल चाहेब कि सब कॉमेंट अलग-अलग आदमी के हवे, आ ओहमें उनुकर ई-मेल आईडी भी लिखल बा। का संतोष पटेल, डा. रविकांत दुबे आ बाकी बुद्धिजीवी लोग, जे ओह मामला पर कॉमेंट देले, ऊ सब चमचा हवे? भावुक जी, कुकूर- कुकूर चिल्लइला से काम ना चली। तनी तथ्य पर आईं, आ हमनी के लगावल एको आरोप के अगर जबाब बा, त लिखे के साहस करीं। आ अगर हमनी का सच लिखले बानी जा, त फेर ओकरा के हटवाये खातिर एतना पैरवी आ धमकी काहें दिहल गइल, ई बताईं? मुद्दा के भटका के ओह में भावुकता डाले के कोशिश मत करीं। भोजपुरिया डॉट कॉम के लाखों पाठकन के चमचा बताये के जवन दुस्साहस रउरा कइले बानी, ओकर सजा का होई, ई हम अपना पाठकन पर ही छोड दे तानी।
एगो बात हम आउर साफ क दिहल चाहेब, हमार मनोज भावुक या फिर एह मामला से जुडल कवनो व्यक्ति से निजी दुश्मनी नइखे (ई बात अलग बा कि मनोज भावुक पिछला 3-4 साल में जेकरा से भी हमनी के बारे में बात कइले, खाली गाली दिहले आ विरोध कइले, काहें कि एक बेर हमनी का उनुकर गजल हटा देहले रहनी)। हमनी के काम करे के तरीका बहुत साफ बा – “कबिरा खडा बाजार में, पूछे सबकी खैर, ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर”। आ ई बात सारा दुनिया जानता, आ एकरे खातिर भोजपुरिया डॉट कॉम के कई बार राष्ट्रीय आ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित भी कइल जा चुकल बा। कई बेर एह देश के मीडिया हमनी के निष्पक्षता के ना सिर्फ सरहले बा, बल्कि ओकरा के अपनाये के वकालत भी कइले बाटे। जइसन कि नीदरलैंड से जारी डाक टिकट वाला मामला में टाइम्स ऑफ इंडिया, आ दैनिक जागरण से लेके देश के हर एक अखबार हमनी के देखावल राह पर चलल रहे।
पत्रकारिता खातिर हमनी के मनोज भावुक जइसन धूर्त आदमी से कवनो सर्टिफिकेट ना चाहीं, आ नाही उनुका साथी पत्रकारन से, जे अपना मित्र के फंसत देख के मुँह बंद क लेवेले, खाली चमचई निभाये खातिर। उनुकर साथी लोगन से हम इहे कहब कि चमचई कइल बहुत आसान बा, कबो सच के पत्रकारिता क के देखीं, औकात पता चल जाई। आ अगर सच नइखी लिख सकत त बंद क दीं आपन पत्रिका/वेबसाइट, आ मनोज बाबा के गोड ध के आपन जिनगी गुजारीं, पत्रकारिता के नाम बदनाम मत करीं। सच बहुत कडवा होला मनोज बाबु, आ ओह से तकलीफ भी बहुत लोगन के होला, लेकिन एह मामला में गलती रउरा कइले बानी, त परिणाम त भोगहीं के पडी। अंत में ई बात हम साफ क दिहल चाहेब कि भोजपुरिया लोगन के सबसे बडहन आवाज बन चुकल भोजपुरिया डॉट कॉम ना कबो झूठ के सामने झुकल बा, आ नाही झुकी, भले ही केहू एह देश के प्रधानमंत्री भा अमेरिका के राष्ट्रपति के पैरवी काहें ना ले आवे।




e ago bemari ha ehi bimari manoj ke pakad le le ba.......
lekin hamni ke jai bhojpuri (aur Bhojpuria) ke sath bani san pura bharat me jai bhojpuri ke apar samarthan mil rahal ba.....
kuchh kutta bina matlab ke bhaunkat rahe la.....
Jai Bihar , Jai Bhojpuri
Kunwarjee
Sach - Sach hola okra ke kehu jhuthla na sakela a kehu ke dhamki se raura mat derain kahe ki ago kahaut ba ki khisiyani billi khambha noche.
Bhawuk jee ke kuchhu kahala se ka hoi hunka bare mein aam aadmi ke sabh kuch malum ba ke u ketna sharif hawe.
So, We wish you all the best! ehi tarah raura sach ke sath deen raura sathe sabh bhojpuria log ba har kadam.
Jai Bhojpuri.
Regards,
Ravi Ranjan
Jo kuchh bhi ho rahal bate ehkra ke Bhojpuriat ke Dristi se achha naike,
aur sanch baat ke ujagar karke aap bhojpuria samaj ke sachet kar rahal baane se bahot achha baat bate, take PANKAJ PRAVEEN ke jaisan aur log pagal na bane. aur eh trah ke log se savdhaan rahe.
ek taraf log Bhojpuri ke badhava de rahal bade aur doosar taraf eh trah ke log Jo Bhojpuri ko badnaam karne ka kaam kar rahe hain, agar aisane chalat rahi ta ho gail Bhojpuri ke Bera Paar,
Galti maaf,
Jai Bhojpuri, Jai BIHAR,
kehu k kuchh bhi kahe se pahle soch samajh k kahe ke chahi ghamand thik bat naikhe...