मुंबई। "हमरा बेटी के अपाहिज बनाये वाला अउर एह देश पर हमला करे वाला कसाब के सरेआम चौराहा पर फांसी दिहल जाव, आ ओकर लाइव टेलेकास्ट भी होखो, ताकि दुनिया देखो कि हमनी पर हमला करे वालन के का हश्र होला, अउर आगे से कवनो अइसन आतंकवादी हमनी का ओर आँख उठाये के भी हिम्मत ना कर सको," मुंबई के सीएसटी स्टेशन पर आतंकवादियन के गोली के शिकार होके जिनगी भर खातिर अपाहिज बन चुकल देविका के पिता नटवरलाल रोतवान एहिजा पत्रकारन के जरिये अदालत के आपन संदेश भेजे के कोशिश कइलन। देविका ओह समय कसाब के गोली के शिकार बन गइल रहे, जब ऊ अपना बाबुजी अउर भाई का संगे सीएसटी पर पुणे जाये वाली ट्रेन के इंतजार करत रहे।एही हमला में गोलियन के शिकार भइल एक व्यक्ति के रिश्तेदार साठ वर्षीय मुहम्मद हनीफ पीर मुहम्मद के कहनाम बा कि कसाब के बिना कवनो दया के फांसी पर लटका दिहल जाये के चाहीं। अइसन खुन के प्यासा आतंकवादी का संगे कवनो रहम करे के जरुरत नइखे, अइसने कुछ लोगन का वजह से आज दुनिया भर में मुस्लिम लोग के शक के निगाह से देखल जाला, लेकिन ओह लोगन के इहो नइखे पता कि एगो आतंकवादी के कवनो धर्म ना होला, आ इस्लाम में कवनो निर्दोष के जान लेवे के इजाजत नइखे।
जी हाँ, देश पर भइल सबसे बड़हन आतंकी हमला खातिर जिम्मेदार आतंकी अजमल आमिर कसाब के किस्मत के फैसला 17 महीना के लमहर इंतजार के बाद आज हो जाई। शायद कवनो चमत्कार भी ओकरा के आज फांसी के सजा से ना बचा पाव, लेकिन ई कहल मुश्किल बा कि ऊ फांसी पर कब लटकी। यदि ऊ मृत्युदंड के सजा के खिलाफ अपील नाहियो करी, तबो एह सजा के पुष्टि बांबे हाईकोर्ट से होई। हाईकोर्ट के फैसला के बाद ओकर खेल खत्म हो सकेला, लेकिन अगर ऊ हाईकोर्ट अउर फेर सुप्रीम कोर्ट के दरवाजा खटखटाये के फैसला करी, अउर सजा अपरिवर्तित रहला के सूरत में राष्ट्रपति के पास दया याचिका दाखिल करी, त फेर ऊ ओही कतार में खड़ा हो सकेला, जवना में संसद पर हमला के आरोपी अफजल खड़ा बाटे, अउर ओह कतार में ओकर अफजल के नंबर 27वां बाटे।
अगर कसाब के एह कतार में शामिल कइल गइल, त फेर ओकरा पर भारत सरकार के करोड़न रुपया खर्च करे के पडी। कसाब के सुरक्षित राखे खातिर अब ले 31 करोड़ से ज्यादा खर्च कइल जा चुकल बाटे, यानी रोजाना करीब 8.5 लाख रुपया। मुंबई के आर्थर रोड के जवना जेल में ओकरा के राखल गइल बा, ओहिजा ओकरा सुरक्षा खातिर एगो विशेष अंडा सेल बनावल गइल बाटे, जेकरा बनाये में 5.2 करोड़ लागल रहे। ई सेल एतना सुरक्षित बा कि यदि विस्फोटकन से लदल ट्रक भी एह से लड़ा दिहल जाई, त एह सेल के कवनो नुकसान ना होई। एकरा अलावा ओकरा के लाये आ ले जाये खातिर छह करोड़ रुपया के लागत से एगो विशेष बुलेटप्रूफ वाहन के आयात कइल गइल। ओकरा पैरवी करे वाला वकील के हर पेशी पर 2,500 रुपया दिहल गइल, आ भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के लगभग 200 जवान 24 घंटा ओकरा सुरक्षा में लाग रहेले सन, ओह लोगन के खर्चा अलग से बा। एतने ना, मुंबई के जेजे अस्पताल में एक करोड़ के लागत से ओकरा खातिर दूगो विशेष सेल बनावल गइल बाटे, ताकि इलाज खातिर ओकरा के ओहिजा राखल जा सको।
वइसे विधि विशेषज्ञन के मानना बा कि कसाब को मौत के सजा ही सुनावल जाई, लेकिन एकरा संगे-संगे ऊ लोग इहो मानता कि फैसला के खिलाफ अपील पर ओकर फांसी के सजा लटक सकेला। इकर कारण ऊ धीमी प्रक्रिया हवे, जेकरा तहत फांसी के सजा पा चुकल लोगन के दया याचिका का निपटारा नइखे हो पावत। संसद पर भइल हमले के आरोपी अफजल के 2004 में मौत के सजा सुनावल गइल रहे, लेकि ओकर दया याचिका अभी भी गृह मंत्रालय में लंबित बाटे। कुल लंबित 28 दया याचिका में ओकर नंबर 27वां बा, अउर अभी तक अइसन कवनो उम्मेद नइखे कि एह कतार के तोड़ के केहू के पहिले निपटारा कइ दिहल जाव।
अगर हमनी के सरकार खाली मुस्लिम तुष्टीकरण का नीति के तहत 6 साल बाद भी अफजल गुरु के सजा नइखे दे पावत, त फेर का फायदा बा एतना ड्रामा आ ताम झाम के। अगर सरकार सजा नइखे दे सकत, त फेर ऊ कवन मुँह देखाई मेजर उन्नीकृष्णन अउर हवालदार गजेन्द्र सिंह के परिवार के, जवन कि एह हमला में जान गंववले रहे लोग। का हेमंत करकरे, अशोक काम्टे अउर विजय सालस्कर के कुर्बानी व्यर्थ हो जाई? का एह आतंकियन के बचा के सरकार शहीद हेड कांस्टेबल तुकाराम के शहादत पर पानी फेर दी, जेकि कसाब के एके-47 के नली पकड लेले रहलन, आ लगातार उनका बदन में गोली धंसत गइल, लेकिन ऊ तब ले ओकरा के ना छोडलन, जब ले बाकी के पुलिस वाला कसाब के पकड ना लिहले सन। एह से पहिले कि ई कुल्ह शहीदन के परिवार के न्यायपालिका से विश्वास उठ जाव, एह से पहिले कि सेना के मनोबल पर एकर असर पडो, सरकार के चाहीं कि एह कुल्ह दया याचिका पर कुंडली मार के बइठला के जगह, ओकर त्वरित निस्पादन के व्यवस्था कइल जाव।
अपना एगो पुरान आलेख में हम एगो सवाल उठवले रहनी, जवन कि आज दोबारा उठावल चाहेब। हमार ई सवाल एह देश के प्रधानमंत्री से बा, आ ई सवाल खाली हमहीं ना, बल्कि एह देश के करोडों लोग पुछल चाहता – "का हमनी का टैक्स एही खातिर देवेनी जा, कि ओह पइसा से राज ठाकरे जइसन देशद्रोही के Z-plus सुरक्षा दीहल जा सको? आ ओही पइसा से अफजल गुरु आ कसाब जइसन आतंकवादी के अपना जेल में रख के सालों-साल खियावल जाव?" देश जबाब चाहता प्रधानमंत्री जी !!!



aur wioase log pure world ke liuye khatra ka suchak hai.
aise logo ke liye kv koi dharm ya majahab nahi hota hai.
aur na aise logo ke liye koi raham honi chahiye... kasab ke liye to fasi k v saja chotti hogi.