मुंबई। देश के स्वाधीनता के पहिला संघर्ष के अनेक नायक आज अतीत के अँधेरा में गुम हो हो चुकल बा लोग, लेकिन कुछ अइसनो लोग बा जिनकर शौर्य आज भी देशवासियन के प्रेरित करत रहेला। एह लोगन के तेज से तत्कालीन साम्राज्यवादी शासक भी अच्छी तरह अवगत रहलन। आ अइसने रणबांकुर रहलन बिहार के भोजपुर जिला के जगदीशपुर के बाबू कुंवर सिंह। कुंवर सिंह के जनम 1782 में भइल रहे। इहाँ के पिता बाबू साहबजादा सिंह प्रसिद्ध शासक भोज के वंशज में से रहलन। उनकर छोट भाई अमर सिंह, दयालु सिंह अउर राजपति सिंह, एही खानदान के बाबू उदवंत सिंह, उमराव सिंह तथा गजराज सिंह नामी जागीरदार रहलन अउर अपना आजादी कायम रखे खातिर अंग्रेजन से समय-समय लोहा लेत रहलन। 1857 में अंग्रेजन के भारत से भगाये खातिर हिंदू अउर मुसलमान लोग मिल के कदम बढ़वलन। मंगल पांडेय के बहादुरी समस्त देश में विप्लव मचा देहसल। बिहार के दानापुर रेजिमेंट, बंगाल के बैरकपुर और रामगढ़ के सिपाही लोग जब बगावत कर देहलन अउर मेरठ, कानपुर, लखनऊ, इलाहाबाद, झांसी अउर दिल्ली में भी आग भड़क उठल, तब अइसन हालात में बाबू कुंवर सिंह भारतीय सैनिकन के नेतृत्व कइलन।
27 अप्रैल 1857 के दानापुर के सिपाही, भोजपुरिया जवान अउर अन्य मित्रन का संगे आरा नगर पर वीर कुंवर सिंह कब्जा कइ लिहलन। अंग्रेजन के लाख कोशिश के बाद भी भोजपुर लम्बा समय तक स्वतंत्र रहल। जब अंग्रेजी फौज आरा पर हमला कइल त बीबीगंज अउर बिहिया के जंगल में घमासान लड़ाई भइल। बहादुर स्वतंत्रता सेनानी जगदीशपुर की ओर बढ़त गइलन। आरा पर फिर से कब्जा जमवला के बाद अंग्रेज जगदीशपुर पर आक्रमण कर देहलन। बाबू कुंवर सिंह अउर अमर सिंह के जन्म भूमि के छोड़े के पडल। अमर सिंह अंग्रेजन से छापामार लड़ाई लड़त रहलन अउर बाबू कुंवर सिंह रामगढ़ के बहादुर सिपाहियन का संगे बांदा, रीवां, आजमगढ़, बनारस, बलिया, गाजीपुर अउर गोरखपुर में लड़ाई के बिगुल बजावत रहलन। ब्रिटिश इतिहासकार होम्स उनकरा बारे में लिखले बाडन की, "एगो बुढ राजपूत ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध अद्भुत वीरता और आन-बान के साथ लड़ाई लडलन। गनीमत इ रहे कि युद्ध के समय कुंवर सिंह के उमिर अस्सी साल के करीब रहे। अगर उ जवान रहतन, त शायद अंग्रेजन के 1857 में ही भारत छोड़े के पड़ल रहित।
आज देश के आजादी के जश्न मनावत समय हमनी के कुंवर सिंह, मंगल पाण्डेय, चित्तु पांडेय अउर अपना माटी से जुडल बाकी सपूतन के याद करे के चाहीं, जे एह देश खातिर आपन जान के बाजी लगा दिहल लोग। जय हिन्द, जय भोजपुरी।


