जीरादेई (सिवान)। पाँच दिसम्बर 2010 के दिन भोजपुरी भाषा अउर संस्कृति के आन्दोलन के इतिहास में स्वर्णाक्षरन में लिखल जाई, काहें कि एह दिन जीरादेई के धरती पर जवन भइल, ओकर कल्पना भी एह से पहिले केहु ना कइले रहे। एह दिन हजारन का संख्या में आम लोग, अउर खास कर के युवा वर्ग के लोग इकठ्ठा भइल, भोजपुरी आन्दोलन के एगो नया दिशा देवे खातिर, अउर एह में सबसे खास बात इहे रहे कि मंच पर नाही केहु नेता रहे, नाही कवनो मंत्री.. बल्कि भोजपुरिया समाज के आम लोग जुटल रहे, अपना भोजपुरी के सम्मान के पुन: प्रतिष्ठित करे के उद्देश्य से। वइसे त एह आयोजन के तैयारी कई महीना पहिले से चलत रहे, लेकिन जीरादेई के स्थानीय लोगन के एह बात के तनिको अंदेशा ना रहे कि ई तारीख ओह लोगन के सोचे के तरीका ही बदल दी। “आज जवना तरह से जय भोजपुरी परिवार के लोग एहिजा जुटल, अउर एतना सफल आयोजन कइल, ओह से हमनी का आश्चर्यचकित बानी जा। राजेन्द्र बाबु के माटी के उचित सम्मान नइखे मिलत, ई कहे वाला त एहिजा ढेर लोग रहे, लेकिन आज ले केहु एह तरह के पहल ना कइल,” स्थानीय निवासी अभिषेक कहलन।
कार्यक्रम के 3-4 दिन पाहिले से जय भोजपुरी डॉट कॉम के एगो टीम एहिजा कॉलेज भवन में ही कैंप कइले रहे, अउर आयोजन के तैयारियन के आखिरी रुप देत रहे। एह टीम के मेहनत के नतीजा ई भइल कि दोपहर 12 बजे जब कार्यक्रम शुरु भइल, तब मैदान में एगो तिल राखे खातिर भी जगह बाकी ना रहे, अउर सैकडन लोग आयोजन-स्थल के बाहर खडा होके कार्यक्रम के बारे में जाने के कोशिश करत रहे। अउर ई हाल तब रहे, जबकि सबके पता रहे कि कार्यक्रम के मुख्य आकर्शण भरत शर्मा व्यास के कार्यक्रम सांझी खान होई। कार्यक्रम के शुरुआत करे से पहिले देश-विदेश से जुटल जय भोजपुरी परिवार के लोग राजेन्द्र बाबु के पैतृक आवास पर गइल, अउर ओहिजा मौजुद उनका प्रतिमा के माल्यार्पण कइल। ओहिजे भोजपुरिया माटी अउर भाषा के सम्मान के पुन: प्रतिष्ठित करे के संकल्प भी लिहल गइल, जेकर पहिला पडाव ई आयोजन रहे।
कार्यक्रम के उदघाटन राजेन्द्र बाबु के सहयोगी रह चुकल 75 वर्षीय श्री बाँके बिहारी कइलन, ओकरा बाद विख्यात गायिका मधुबाला शर्मा स्वागत गान (गाय के गोबरे महादेव चउक लिपाई...) प्रस्तुत कइली। एह गीत पर उनका संगे तबला पर विख्यात संगीत गुरु रमैया जी रहलन, जबकि बाँसुरी पर मुरारी। एकरा बाद स्कूल के कुछ लइकी (स्वीटी, नेहा, पारुल अउर अन्य प्रेमशीला जी के नेतृत्व में) मिल के एगो भाव-नृत्य नाटिका पेश कइली सन, जवन लोगन के दिल के छू गइल। एकरा बाद जय भोजपुरी परिवार के वरिष्ठ सदस्य नवीन भोजपुरिया ओहिजा उपस्थित जन-समूह के जय भोजपुरी डॉट कॉम, एकर उद्देश्य अउर कार्यक्रम के उद्देश्य से परिचित करवलन। बेहद ही जोशवर्द्धक अंदाज में दिहल उनकर भाषण, अउर आधुनिक पहनावा के बावजुद कंधा पर गमछी राखे के अंदाज पूरा सभागार के जोश में भर दिहलस। करीब दस मिनट के वक्तव्य में केतना बेर ताली बाजल, एकर कवनो गिनती नइखे, अउर जब ऊ मंच से उतरलन त युवा भोजपुरियन के एगो नया ग्रुप उनकर इंतजार करत रहे, जवन कि उनकर फैन बन चुकल रहे।
एकरा बाद शुरु भइल बतकही, जेकर संचालन संजय कुमार सिंह करत रहलन। उत्तर प्रदेश सरकार के एगो अधिकारी का पद पर आसीन संजय कुमार सिंह के मंच संचालन करे के अंदाज अउर आत्मविश्वास कबिले-तारिफ रहे। एह बतकही के विषय रहे – “देशरत्न के भाषा अउर माटी के उपेक्षा काहें?“ एह विषय पर बतकही में आपन विचार देत लोग भोजपुरी के एह दुर्दशा खातिर कुछ विशेष कारण गिनावल, जवना में भोजपुरी गीत-संगीत में व्याप्त अश्लीलता के एकर मुख्य वजह मानल गइल। एह विषय पर चर्चा करत वरिष्ठ शिक्षाविद घनश्याम शुक्ल कहलन कि अगर सरकार हमनी के भाषा के उपेक्षा कर तिया, त हमनी के आन्दोलन शुरु करे के चाहीं। ऊ इहो कहलन कि भोजपुरी गीत-संगीत में व्याप्त अश्लीलता का वजह से एकर स्तर एतना गिर गइल बा कि जब कबो ऑर्केस्ट्रा उनका घर का लगे आयेला, ऊ घर-दुआर छोड के 2 किलोमीटर दूर खेत में सुते चल जालन, काहें कि एह तरह के गीतन के सुनल उनका बस में नइखे। उनका अलावा एह विषय पर तंग इनायतपुरी, मोहन प्रसाद विद्धार्थी, दीपक कुमार, रामजी सिंह, शैलेन्द्र सिंह, अभिषेक आदि भी आपन विचार व्यक्त कइलन।
एही सत्र में भोजपुरी संगीत से अश्लीलता के उखाड फेंके के संकल्प लिहल गइल, अउर सरकार पर दबाव बनाये खातिर जमीनी स्तर पर आन्दोलन चलाये के रुपरेखा बनावल गइल। बतकही के बाद शुरु भइल कवि-सम्मेलन, जेकर संचालन विख्यात कवि तंग इनायतपुरी कइलन, अउर ओह में डा. सुभाष यादव, रामदयाल शर्मा, पंचानंद सिंह, बादशाह तिवारी, शैलेन्द्र सिंह समेत एक दर्जन से बेसी कवि लोग कविता पाठ कइल।
कुल मिला के कहल जा सकेला कि ई एगो ऐतिहासिक दिन रहे, जब एगो ऑनलाइन वेबसाइट अपना के जमीन से जोडे के कोशिश कइलस, अउर एकर सफलता के अंदाज सिवान के मिडिया द्वारा कइल कवरेज से लाग सकेला। एक ओर जहाँ दैनिक जागरण एकरा के एगो नया युग के सूत्रपात बताते हुए एकर सफलता पर खुशी जतवलस, ओहिजे हिन्दुस्तान, प्रभात खबर अउर अन्य अखबार एकरा के भोजपुरी के दशा अउर दिशा तय करे वाला दिन बतवले सन। विश्व के सबसे बेसी पढे जाये वाला अखबार त इहो लिखलस कि पिछला 63 साल में अइसनो कवनो आयोजन जीरादेई के धरती पर ना भइल रहे।
एह कार्यक्रम के सफल बनाये में नवीन सिंह परमार, पंकज प्रवीण, कृष्ण कुमार सिंह, फैयाज अहमद (रिंकू), मुर्तजा जाफरी, भास्कर रंजन, सत्येन्द्र उपाध्याय, दिनेश सिंह, बृज किशोर तिवारी, आशुतोष रंजन, शरत निखिल, राजीव मिश्रा, अवनीश तिवारी, शिवानन्द द्विवेदी, आशुतोष तिवारी, छोटन राय, पंकज कुमार सिंह, विनोद तिवारी, संतोष सिंह, मनोज कुमार गुप्ता, बंटी, विकास अउर “नवचेतना समिति” के सदस्यन के अलावा जीरादेई के स्थानीय लोगन के महत्वपूर्ण योगदान रहे।




गीतकार
ओ.पी .अमृतांशु