Home Samachar Vishesh ऐतिहासिक हो सकेला स्वाभिमान सम्मेलन

ऐतिहासिक हो सकेला स्वाभिमान सम्मेलन

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सिवान। ई शायद कुछ नवहा लोगन के उत्साह रहे, अपना माई-भाषा के प्रति जज्बा रहे, जवन इंटरनेट पर एगो अइसन भाषा के लेके जुटल रहे, जेकरा बोले में कई गो तथाकथित पढल-लिखल लोगन के 'लाज' लागेला। पता ना महानगर में रह रहल ई लोग एह भाषा के बारे में का सोचेला, लेकिन भोजपुरिया डॉट कॉम पर जे भी पहिला बेर आइल, एक बेर अपना माई-भाषा के इयाद कइ के ओकर आँखि जरुर नम हो गइल। साल 2005 में शुरु भइल एह वेबसाइट के देश-विदेश में केतना अवार्ड आ सम्मान मिलल, ई त गिनल मुश्किल बा, लेकिन एक बात तय बा कि एकरा संचालक लोग के जिन्दगी के एगो नया मकसद मिल गइल।

भोजपुरिया डॉट कॉम के वरिष्ठ सदस्यन के माँग पर साल 2009 में जब भोजपुरी के सोशल नेटवर्क के रुप में जय भोजपुरी डॉट कॉम के शुरुआत भइल, त केहु के अंदाज ना रहे कि ई वेबसाइट कम्यूटर के स्क्रीन से बहरी निकल के आम लोगन के दिल में एगो खास जगह बना पाई। शुरुआत में, फेसबुक अउर ट्विटर जइसन सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटन के बीच "भोजपुरी" पर आधारित सोशल नेटवर्क चलावे के बातो सोचल हास्यास्पद लागत रहे, लेकिन जइसन कि एह वेबसाइट के वरिष्ठ सदस्य नवीन भोजपुरिया के कहनाम बा - "फेसबुक रउआ के दुनिया से जोड सकेला, लेकिन जब रउआ दुनिया भर में घुम के अकुता जाईं, त जय भोजपुरी डॉट कॉम के माहौल घर नियन लागी। ई वेबसाइट रउआ के अपना माटी से, अपना लोगन से जोड सकेले, आ रउआ दुनिया में कहीं भी रहीं, ई वेबसाइट रउआ के घर नियन शांति दे सकेले, अपना लोगन से, आ अपना संस्कृति से प्यार करे के सिखा सकेले।"

पच्छिमी सभ्यता के अंधानुकरण करत एह दुनिया में ई वेबसाइट भोजपुरिया लोगन खातिर एगो सुखद अहसास लेके आइल, अउर ओकरा बाद एकरा के जमीन से जोडे के तैयारी शुरु भइल। वेबसाइट के पहिला सार्वजनिक कार्यक्रम दिल्ली के राजेन्द्र भवन में भइल, जवना में सदस्यन के जज्बा देखे लायक रहे। ओकरा बाद ओहिजे मनावल गइल वेबसाइट के पहिला वर्षगांठ में एगो भोजपुरी टीवी चैनल के प्रमुख समेत कई गणमान्य लोग पहुँचल रहे। पिछला साल एह उडान में एगो नया पाँख लाग गइल, जब जय भोजपुरी परिवार दिसम्बर में राजेन्द्र बाबु के जन्मदिन पर जीरादेई (सिवान) में एगो बडहन कार्यक्रम के आयोजन कइलस। बिहार के एगो सुदुर गांव में भइल ई आयोजन ना सिर्फ आयोजक लोगन खातिर एगो नया अनुभव रहे, बल्कि ओहिजा उपस्थित दस हजार से बेसी लोगन खातिर भी ई भोजपुरिया संस्कृति के गौरव-गाथा के दोहराये के पल रहे। प्रसिद्ध भोजपुरी लोक गायक भरत शर्मा के शब्दन में कहीं त "ई आयोजन एह तरह के बाकी कार्यक्रमन से काफी अलग रहे। भोजपुरी भाषा अउर संस्कृति के लेके नवहा लोगन में जवन जोश, अउर जवन अनुशासन एह कार्यक्रम में लउकल, ओह से ई कहल जा सकेला कि एह भाषा के भविष्य उज्ज्वल बा।"

वइसे एह कार्यक्रम के देख के मीडिया भी खासा अचंभित रहे। जीरादेई में मीडिया सबसे एके बात जानल चाहत रहे कि आखिर देश-विदेश में अपना-अपना जगह पर स्थापित ई नवहा लोग एगो अइसन गांव में का करे आ रहल बा, जहाँ बिजली तक के सुविधा नइखे? दिन भर इंटरनेट अउर मोबाइल पर ऑनलाइन रहे वाला ई लोग आखिर कवना वजह से एगो स्कूल के अंधेरा कमरा में, कडकडात सर्दी का बीच, दरी बिछा के काहे सुत रहल बाटे? जबाब जनला के बाद मीडिया भी भोजपुरी के आगे नतमस्तक लउकल, अउर एह कार्यक्रम के हर कवरेज, पहिले भइल एह तरह के कवनो कार्यक्रम के कवरेज से बेहतर रहे। मीडिया के साथ-साथ ओहिजा उपस्थित भोजपुरी साहित्यकार लोगन खातिर भी ई कार्यक्रम एगो अजूबा से कम ना रहे, जे शायद पहिला बेर एगो अइसन कार्यक्रम के हिस्सा बनत रहे, जवना में आयोजक-मंडल में एको सदस्य उनका पीढी के ना रहे। वरिष्ठ साहित्यकार तंग इनायतपुरी के अनुसार "एह कार्यक्रम के बाद ई कहल जा सकेला कि हमनी के अगिला पीढी भोजपुरी भाषा आ संस्कृति के गंभीरता के समझेले, अउर ओकरा प्रचार-प्रसार में नवहा लोगन के योगदान अब नकारल ना जा सकेला।"

एह कार्यक्रम के बाद हमनी का ओहिजा वादा कइले रहनी जा, अगिला साल राजेन्द्र बाबु के जन्मदिन पर लवट के आये के, अउर एह साल तीन दिसम्बर के हमनी का आपन वादा पुरा करे जा रहल बानी जा। अबकी के भोजपुरिया स्वाभिमान सम्मेलन, जवन कि सिवान जिला के रघुनाथपुर थाना क्षेत्र के प्रभा प्रकाश डिग्री कॉलेज में मनावल जाई, कई मायना में पिछला सम्मेलन से अलग होई। एक ओर जहाँ पिछला बेर छपरा/सिवान के कई गो ख्यातिप्राप्त साहित्यकार कार्यक्रम के हिस्सा बनल रहलन, ओहिजे एह बेर ओह लोगन के साथ देवे खातिर पटना, मुजफ्फरपुर अउर जमशेदपुर से कई गो अउर दिग्गज साहित्यकार पहुँच रहल बाडन।

कार्यक्रम के शुरुआत सबेरे सात बजे प्रभात फेरी से होई, जवना में स्थानीय स्कूल-कॉलेज के छात्र लोग भोजपुरी के अलख जगाई। कुछ वरिष्ठ भोजपुरी साहित्यकार लोग एह कार्यक्रम के हिस्सा बनी, अउर नया पीढी के भोजपुरी भाषा अउर संस्कृति पर गर्व करे के सीख दी। कार्यक्रम के औपचारिक उदघाटन सबेरे दस बजे होई, ओकरा बाद लोगन के जय भोजपुरी डॉट कॉम के उद्देश्य बतावल जाई। उदघाटन सत्र के बाद एगो भाव नृत्य के आयोजन होई, जवना में स्थानीय कलाकार आपन कला के माध्यम से लोगन के भोजपुरी भाषा अउर संस्कृति के प्रति जागृत करिहन। एकरा बाद पाँच गो स्थानीय छात्र "नौनिहालन के नजर में भोजपुरी" विषय पर आपन राय रखिहन, अउर लोगन के भोजपुरी बोले खातिर कइसे प्रेरित कइल जाव, एह पर आपन सुझाव दीहन। एह कार्यक्रम के बाद स्थानीय छात्र-छात्रा लोग द्वारा एगो नाटक के मंचन कइल जाई, जवना में भोजपुरी के संविधान के आठवीं अनुसूची में शामिल करे के माँग प्रमुखता से उठावल जाई।

दोपहर 2 बजे से साहित्यकार लोग "भोजपुरी के संवैधानिक मान्यता" अउर "भोजपुरी गीत-संगीत से अश्लीलता मिटावे" के संबंध में आपन राय दी, अउर जे लोग भोजपुरी बोले में लजाता, ओकरा के भोजपुरी का ओर वापस ले आये खातिर आपन बहुमुल्य सुझाव दी। एकरा तुरंत बाद, मने करीब चार बजे कवि-सम्मेलन शुरु होई, जवन कि सात बजे ले चली। भोजपुरी के दिग्गज कवि लोगन के उपस्थिति में ई कार्यक्रम अपने आप में अनूठा आ सबसे अलग रही। कार्यक्रम के अंत में बिमलेश त्रिपाठी (कोलकाता), भानुश्री (नई दिल्ली), पंकज प्रवीण (नई दिल्ली) समेत कुछ स्थानीय कलाकार लोग सांस्कृतिक कार्यक्रम के शुरुआत करी, अउर ओकरा बाद भोजपुरी सम्राट भरत शर्मा, अराधना सिंह अउर अन्य कलाकारन का संगे ई कार्यक्रम देर रात ले जारी रही।

भोजपुरी भाषा, साहित्य, संस्कृति अउर कला के अधिकतर विधा के मिला के आयोजित हो रहल एह कार्यक्रम में भारी संख्या में देश-विदेश से आइल प्रतिनिधियन के भाग लेवे के उम्मीद बा। एकरा अलावा एह कार्यक्रम के दौरान हजारन के संख्या में स्थानीय पुरुष, महिला अउर लइकन के उपस्थिति एह कार्यक्रम के ऐतिहासिक बनाये खातिर काफी होई। भोजपुरिया डॉट कॉम अउर जय भोजपुरी परिवार का ओर से हमनी का रउआ के एह कार्यक्रम में शामिल होखे के, अउर एह ऐतिहासिक क्षण के गवाह बने के, नेवता दे तानी जा। आईं, भोजपुरी खातिर कुछ कइल जाव...

 


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Comments (2)
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1 Saturday, 03 December 2011 04:59
Mukul kumar singh
Wah maja aa gael.hmro man me lalsa uth gael e bhojpuri site ke dhekhla k bad.hmhu ekra se jurl chahtani hmra k sujhaw dìhl jaw. Hmar ghar siwan k raghunathpur thana me harnathpurme ba.hm patna dental colage me dental doctr bani
भारतीय रुपिया पर बाबू डा राजेन्द्र प्रसाद के तस्वीर होखे के चाही
2 Monday, 05 December 2011 09:03
Rajnandan
हमरा मन में एगो बात बहुत दिन से बा कि भारतीय रुपिया पर गाँधी जी के जगह
बाबू डा राजेन्द्र प्रसाद के तस्वीर होखे के चाही, काहे कि अधिकारिक तौर पर
उहे भारत के प्रथम राष्ट्रपति रहलें. अगर संभव हो सके त सम्मेलन में एह बात के भी राखल जाव
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